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निर्यात में बढ़ोतरी: यूक्रेन पर हमले के बावजूद एशिया में कौन-कौन खरीद रहा है रूसी तेल?

Fri, 22 Apr 2022 04:22 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 22 Apr 2022 04:22 PM IST
सार

रूस से एशिया भेजे गए टैंकरों में 52 चीन, 28 दक्षिण कोरिया, 25 भारत, नौ जापान और एक मलेशिया के लिए था। इसका मतलब है कि इस अवधि में रूस से भारत भेजे गए तेल में आठ गुना बढ़ोतरी हुई। जबकि चीन को निर्यात हुए तेल में 33 फीसदी का इजाफा हुआ...

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which countries are buying Russian oil in Asia amid of ukraine russia war
रूस तेल निर्यात - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूक्रेन पर रूसी हमले को लगभग दो महीना पूरा होने जाने के बावजूद एशिया में रूस के कच्चे तेल का आयात बड़े पैमाने पर जारी है। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत उसके सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं। ये बात ताजा टैंकर ट्रैकर डाटा से सामने आई है। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। तब से 18 अप्रैल तक के आंकड़े फिलहाल उपलब्ध हुए हैं।

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उनका आंकड़ों का विश्लेषण वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने किया है। उसके मुताबिक 24 फरवरी से 18 अप्रैल के बीच कुल 380 ऑयल टैंकर रूस से रवाना हुए। जबकि पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 357 टैंकर ही रवाना हुए थे। यानी रूसी तेल निर्यात पर उस अवधि में कुल मिलाकर बढ़ोतरी ही हुई। इस वर्ष इस अवधि में 115 टैंकर एशिया के लिए रवाना हुए।

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भारत भेजे गए तेल में आठ गुना बढ़ोतरी

रूस से एशिया भेजे गए टैंकरों में 52 चीन, 28 दक्षिण कोरिया, 25 भारत, नौ जापान और एक मलेशिया के लिए था। इसका मतलब है कि इस अवधि में रूस से भारत भेजे गए तेल में आठ गुना बढ़ोतरी हुई। जबकि चीन को निर्यात हुए तेल में 33 फीसदी का इजाफा हुआ। जबकि साझा तौर पर अन्य देशों के आयात में 16 फीसदी की गिरावट आई।

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अमेरिका और ब्रिटेन ने एलान किया है कि यूक्रेन पर हमले के विरोध में वे रूस से तेल का आयात रोक देंगे। दोनों देशों की इस घोषणा के पहले ही तेल कारोबार से जुड़ी कंपनियों बीपी और शेल ने कहा था कि वे अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेंगी। इन घोषणाओं के कारण यूरोप में रूसी तेल का भाव काफी गिर गया। रिफिनिटिव डाटा के मुताबिक मार्च के शुरू में यूरोप में रूसी तेल का भाव 111 डॉलर प्रति बैरल था, जो अप्रैल के मध्य में 78 डॉलर रह गया।

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि एशियाई खरीदार इसी स्थिति का लाभ उठा रहे हैं। भारत ने साफ कहा है कि वह अपनी जनता के हित में रूस से तेल की खरीदारी जारी रखेगा। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक रूस भारत को बहुत ही सस्ती दर पर तेल दे रहा है। वह 35 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से भारत को तेल बेच रहा है।

इंडोनेशिया भी फायदा उठाने की तैयारी में

इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि उनके देश ने हाल में रूस से तेल नहीं खरीदा है, लेकिन अब संभव है कि वह ऐसा करे। इससे इंडोनेशिया के अंदर तीखी बहस खड़ी हो गई है।

टैंकर ट्रैकर कंपनी पेट्रो-लॉजिस्टिक्स के सीईओ डैनियर गेर्बर ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा कि संभवतः भारत और चीन ही मौजूदा बने हालात का सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगेँ। उन्होंने कहा- मार्च में तो उन देशों का रूसी तेल का आयात बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा। लेकिन अगले दो या तीन महीनों में हम ऐसा होता देख सकते हैं।



विश्लेषकों ने कहा है कि भारत और चीन ने यूक्रेन मामले में स्पष्ट रुख अपनाया है। लेकिन जापान या दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने का एलान करने के बावजूद रूसी तेल का आयात पूरी तरह नहीं रोका है।

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