तैयारी: बीस साल में कहां पहुंचा शंघाई सहयोग संगठन, सितंबर में होगी 20वीं शिखर बैठक
रूस सरकार की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि एससीओ अब दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण संगठनों में शामिल हो चुका है। यह वैश्विक मंच पर भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरा है।
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ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में इन दिनों शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 20वीं शिखर बैठक की जोरदार तैयारियां चल रही है। यह संगठन जब बना था, तब से लेकर अब तक लंबी यात्रा तय कर चुका है। इसके सदस्यों और पर्यवेक्षकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई। अब इसे दुनिया में एक महत्त्वपूर्ण आवाज समझा जाता है। संगठन में भारत, रूस, चीन, और पाकिस्तान के अलावा आठ यूरेशियाई देश शामिल हैं। 20वीं शिखर बैठक की तैयारी के लिए शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक दुशांबे में 13 और 14 जुलाई को होगी। शिखर बैठक सितंबर में होनी तय है। चूंकि, यह 20वीं शिखर बैठक होगी, जिसके चलते इसे अहमियत दी जा रही है।
एससीओ की विदेश मंत्रियों की बैठक के बारे में इस हफ्ते रूस की सरकार की तरफ से औपचारिक जानकारी दी गई। रूस सरकार की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि एससीओ अब दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण संगठनों में शामिल हो चुका है। यह वैश्विक मंच पर भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरा है। जखारोवा ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन की गतिविधियां दूसरे देशों के खिलाफ नहीं हैं। इस समूह ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करने के बारे में अनुभव विकसित किए। इन क्षेत्रों में सुरक्षा, व्यापार, और मानवीय सहायता शामिल हैं। वैसे इस समूह की प्राथमिकता नहीं बदली। आज भी इसकी प्राथमिकता इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता कायम रखना ही है।
चीन, रूस और मध्य एशियाई देश कजाखिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान शुरुआत से शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य हैं। भारत और पाकिस्तान भी काफी समय तक इस समूह में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल रहे। 2017 में दोनों देशों ने औपचारिक रूप से इस समूह की सदस्यता ग्रहण की। गौरतलब है कि शंघाई सहयोग संगठन आबादी और भूगोल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है। दुनिया की कुल आबादी के आधे हिस्से की नुमाइंदगी यह समूह करता है। एससीओ की कार्यसूची में आतंकवाद का मुकाबला एक अहम मुद्दा रहा है। भारत जब से इस समूह का सदस्य बना, उसने इस मुद्दे पर खास जोर दिया। एससीओ ने उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आतंकवाद विरोधी समन्वय केंद्र स्थापित किया। इसके तहत लगातार सुरक्षा बलों के आतंकवाद विरोधी अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।
इस साल एससीओ के ‘शांति मिशन’ के तहत एक बड़ा सैनिक अभ्यास रूस में होगा। यह अभ्यास पिछले साल ही होना तय था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया। अनुमान है कि इस अभ्यास में एससीओ के सदस्य सभी देशों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। बीते एक साल में एससीओ ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई के क्रम में साझा प्रयास किए। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने इस हफ्ते प्रस्ताव रखा कि इन देशों को आपस में महत्त्वपूर्ण मेडिकल डाटा का आदान-प्रदान करना चाहिए। इसके तहत वैक्सीन के असर और कोरोना वायरस के पैदा हो रहे नए स्ट्रेन और वैरिएंट से संबंधित सूचनाएं शामिल की जानी चाहिए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक, ये तमाम पहल एससीओ के बढ़ते दायरे का संकेत देती हैं।