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अफगानिस्तान: क्या है ईरानी मॉडल जिसकी तर्ज पर सरकार बनाने की तैयारी में है तालिबान, जल्द ही एलान संभव
Thu, 02 Sep 2021 12:46 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 02 Sep 2021 12:46 PM IST
सार
तालिबान अफगानिस्तान में अपनी दूसरी पारी शुरू करने जा रहा है। उसने अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनाने का भरोसा दिया है। बताया जा रहा है कि वह ईरान की तर्ज पर सरकार बनाने की तैयारी में है।
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शेख हिबतुल्ला अखुंदजादा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान में नई सरकार के गठन की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। जल्द ही इसका एलान संभव है। बताया जा रहा है कि तालिबान सरकार गठन में ईरानी मॉडल को अपनाने जा रहा है। इसके तरहत तालिबान प्रमुख शेख हिब्तुल्लाह अखुंदजादा को सर्वोच्च नेता घोषित किया जा सकता है। उसके नाम पर लगभग सहमति बन गई है।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक तालिबान ईरान मॉडल को सबसे ज्यादा तवज्जो दे रहा है। वह इसी मॉडल के आधार पर सरकार बनाना चाहता है। तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य अनामुल्लाह समनगनी के अनुसार नई सरकार को लेकर बातचीत चल रही है। हमारी नई इस्लामिक सरकार दुनिया के लिए मॉडल बनेगी। नई सरकार में मुल्ला हिब्तुल्लाह अखुंदजादा अफगानिस्तान का नया सर्वोच्च नेता हो सकता है।
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मुल्क के संचालन के लिए गठित शूरा काउंसिल की कमान अखुंदजादा के हाथों में होगी। सरकार में एक प्रधानमंत्री भी होगा जिसकी अपनी कैबिनेट होगी। समनगनी का कहना है कि सरकार में अखुंदजादा की मौजूदगी को लेकर कोई संदेह ही नहीं है। वह सरकार के नेता होंगे और इस पर कोई सवाल नहीं होना चाहिए।
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तालिबान पहले ही प्रांतों और जिलों के लिए गवर्नर, पुलिस प्रमुख और पुलिस कमांडर नियुक्त कर चुका है। तालिबान के एक सदस्य अब्दुल हनान हक्कानी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बताया है कि इस्लामिक अमीरात हर प्रांत में सक्रिय है। प्रत्येक प्रांत में एक राज्यपाल बनाया गया है जिसने काम करना शुरू कर दिया है। प्रत्येक जिले के लिए एक जिला गवर्नर और प्रत्येक प्रांत में एक पुलिस प्रमुख भी बनाया गया है। तालिबान ने अपनी पहली सरकार 1996 से 2001 तक शरीया कानून के तहत चलाई थी और इस कानून को क्रूरता से लागू किया था।
विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार को अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं और निवेशकों का कितना समर्थन मिलता है यह देखना महत्वपूर्ण है। क्योंकि नई सरकार की वैधता अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगी, जो तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद लगभग ढहने के कगार पर है। देश अभी सूखे और आर्थिक तंगी की मार भी झेल रहा है।
क्या है ईरानी मॉडल
ईरान में इस्लामिक सरकार है। जहां पर एक सर्वोच्च नेता होता है। पूरी सरकार का नियंत्रण उसके हाथों में ही होता है। सर्वोच्च नेता के तहत ही राष्ट्रपति सरकार चलाता है। संसद भी साथ-साथ काम करती है। अभी ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई सर्वोच्च नेता हैं। वहीं इब्राहिम रईसी ईरान के राष्ट्रपति हैं। रईसी को खामनेई के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान में 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद दो ही सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हुए हैं जिनमें अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी और उनके उत्तराधिकारी, अयातुल्ला अली खामेनेई हैं। शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन को उखाड़ फेंकने के बाद खुमैनी ने ईरान की राजनीतिक संरचना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अयातुल्ला खामेनेई 1989 में खुमैनी की मृत्यु के बाद सर्वोच्च नेता बने। उन्होंने सत्ता पर एक मजबूत पकड़ बनाए रखी है।
ईरान में सर्वोच्च नेता ही ईरान के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ होते हैं और सुरक्षा सेवाओं का पूरा नियंत्रण उनके हाथों में ही होता है। वह न्यायपालिका के प्रमुख, प्रभावशाली लोगों की परिषद के आधे सदस्यों, शुक्रवार को होने वाली प्रार्थना के नेताओं और राज्य टेलीविजन और रेडियो नेटवर्क के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है। सर्वोच्च नेता की बहु-अरब डॉलर की धर्मार्थ नींव भी ईरानी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को नियंत्रित करती है।
राष्ट्रपति दूसरा सर्वोच्च अधिकारी
ईरान के संविधान में राष्ट्रपति को देश का दूसरे सर्वोच्च अधिकारी का स्थान हासिल है। राष्ट्रपति चार साल के लिए चुना जाता है और लगातार दो कार्यकाल से अधिक नहीं रह सकता है। वह सत्ता की कार्यकारी शाखा का प्रमुख होता है और संविधान लागू कराने की जिम्मेदारी राष्ट्रपति के कंधों पर ही होती है। घरेलू नीति और विदेश मामलों पर राष्ट्रपति का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। लेकिन राज्य के सभी मामलों पर अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता का ही होता है। संसद में 290 सदस्य होते हैं। संसद के पास कानूनों को पेश करने और वार्षिक बजट को अस्वीकार करने के साथ-साथ मंत्रियों और राष्ट्रपति को बुलाने और महाभियोग चलाने की शक्ति है।