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India-Canada Row: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की आखिर क्या है मंशा, भारत क्यों नहीं दे रहा है भाव?

Thu, 17 Oct 2024 10:30 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 17 Oct 2024 10:30 PM IST
सार

India-Canada Row: कनाडा में रह चुके पूर्व राजनयिक के अनुसार, भारत और कनाडा के रिश्ते बहुत मजबूत हैं। कारोबारी भी और नागरिकों के स्तर भी। यह कठिन दौर से जरूर गुजर रहा है, लेकिन इतनी आसानी से कमजोर होने वाला नहीं है।

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What is the intention of Canadian Prime Minister Justin Trudeau, why is India not paying any attention?
कनाडा की विदेश मंत्री, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता - फोटो : ANI

विस्तार

कनाडा की विदेश मंत्री मेलॉनी जॉली ने भारत और कनाडा के संबंध पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रतिबंध लगाने तक की चेतावनी दे दी थी। जॉली ने कहा कि उनके देश के पास यह विकल्प खुला है। हालांकि भारतीय राजनयिकों को जॉली की यह चेतावनी हवा हवाई लगती है। ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि जस्टिन ट्रूडो के इतने गंभीर आरोप के बाद भी भारत उन्हें अधिक भाव क्यों नहीं दे रहा है? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की प्रतिक्रिया तो सीधे जस्टिन ट्रूडो की मंशा पर ही सवाल खड़ा कर दे रही है।
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कनाडा में रह चुके पूर्व राजनयिक का कहना है कि भारत और कनाडा के रिश्ते बहुत मजबूत हैं। कारोबारी भी और नागरिकों के स्तर भी। यह कठिन दौर से जरूर गुजर रहा है, लेकिन इतनी आसानी से कमजोर होने वाला नहीं है। सूत्र का कहना है कि अगस्त 2025 में कनाडा में प्रस्तावित चुनाव के बाद सब ठीक हो जाएगा। दिल्ली के एक नौकरशाह का परिवार टोरंटो में रहता है।
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  • कनाडा में करीब 18 लाख भारतीय, ढाई लाख छात्र
  • टोरंटो, वैनकुवर, कलगैरी में ज्यादातर भारतीय आबादी
  • अगस्त में भारत ने किया 2.79 मिलियन डॉलर का निर्यात और 3.24 मिलियन का आयात
  • प्रतिबंध का दौर शुरू भी हुआ तो नहीं आएगी कोई खरोंच

सूत्र का कहना है कि रिश्ते में गिरावट का कारण कनाडा नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हैं। जस्टिन ट्रूडो की सरकार न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी और उसके नेता जगमीत के. सिंह के सहयोग से चल रही है। फिर कनाडा में वहां की आबादी का 2.1 प्रतिशत के करीब सिक्ख रहते हैं। इसलिए ट्रूडो सरकार वहां राजनीतिक मंशा से रिश्तों को इस तरह का रंग दे रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल भी खराब रिश्ते का कारण जस्टिन ड्रूडो के बेबुनियाद आरोप और उनकी घरेलू राजनीतिक मंशा को ही बता रहे हैं।  
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कितने मजबूत हैं कनाडा और भारत के रिश्ते
भारत में विदेशी निवेश के मामले में कनाडा 18 वें स्थान पर है। भारत के कुल विदेशी निवेश में कनाडा का योगदान 3.31 अरब डॉलर (विदेशी निवेश का आधा प्रतिशत) का है। भारत से कनाडा रत्न, आभूषण, मंहगे पत्थर, दवाइयां, कपड़े आदि का आयात करता है। जबकि औद्योगिक रसायन, न्यूज प्रिंट, वुड पल्प, दाल आदि का निर्यात करता है। अगस्त के महीने में भारत ने कनाडा को 2.79 मिलियन डॉलर का निर्यात किया था और 3.24 मिलियन डॉलर का आयात किया था। कनाडा की छोटी बड़ी 1025 के करीब कंपनियां भारत से कारोबार करती हैं। 550 से अधिक कनाडा की कंपनियों ने भारत से अपना कारोबार कर रही है। कनाडा से सबसे अधिक पेंशन फंड में निवेश होता है। यह 74 अरब डॉलर के करीब है, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव की मानें तो यह निवेश रिटर्न पर आधारित है।

निवेश के मामले में भारत को बहुत सुरक्षित
सूत्र का कहना है कि भारत इस समय दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था है। विश्व की रेटिंग एजेंसी ने भी निवेश के मामले में भारत को बहुत सुरक्षित बताया है। इसलिए अभी आने वाले समय में भारत में कनाडा के कारोबार और निवेश में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिखाई देते। फार्मा एक्सपोर्ट प्रमोशन काऊंसिल से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि भारत कनाडा में दवाओं का निर्यात करता है। सूत्र का कहना है कि कनाडा की विदेश मंत्री के ही बयान पर मत जाइए। वहां की वाणिज्य मंत्री मैरी एनजी ने भी बयान दिया है। मैरी एनजी ने कहा कि है कि दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अपने देश में लगातार गिर रही जस्टिन ट्रूडो की लोकप्रियता
बनारस के नीलेश सिंह परिवार के साथ वैंकुवर में रहते हैं। नीलेश सिंह कहते हैं कि 2008 में जस्टिन ट्रुडो कनाडा की राजनीति में आए थे। तब उनकी लोकप्रियता शुरू हुई थी। देश में बहुत लोकप्रिय हुए, लेकिन पिछले चुनाव में उनकी पार्टी की सीटें काफी घट गई थी। उनकी सरकार इस समय न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के जगमीत सिंह के सहयोग से चल रही है। मौजूदा समय में भी देश में मंहगाई, बेरोजगारी समेत तमाम मुद्दों पर विरोधी जस्टिन ट्रूडो की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। नीलेश कहते हैं कि कनाडा में श्रम करने वालों को एक घंटे की मजदूरी 15 डॉलर तक मिल जाती है। लेकिन मंहगाई की स्थिति मौजूदा सरकार को अलोकप्रिय बना रही है। दूसरे देश के तीन शहरो में सिक्ख मतदाताओं की संख्या ठीक है। गुरुद्वारा का नेटवर्क है। इसलिए प्रधानमंत्री ट्रुडो कनाडा में राष्ट्रवाद का मुद्दा उछालकर अपनी छवि को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं।


भारत क्यों नहीं दे रहा है बहुत भाव?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का वक्तव्य इस तरफ साफ ईशारा कर रहा है। जायसवाल कहते हैं कि भारत ने जस्टिन ट्रूडो की सरकार से बार-बार उसकी जमीन से चल रही भारत विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कनाडा ने रत्ती भर भी कार्रवाई में रुचि नहीं दिखाई। भारत का साफ कहना है कि उसके लिए अपना राष्ट्रीय हित और सुरक्षा सबसे प्रमुख है। भारत का कहना है कि उसने टस्टिन ट्रूडो के सरकार के आरोपों पर प्रमाण मांगे, लेकिन ट्रुडो की सरकार कोई भी ठोस सबूत नहीं दे सकी। इसे जस्टिन ट्रूडो ने भी अपने वक्तव्य में स्वीकार किया है कि उनके पास केवल खुफिया सूचना है। ठोस इनपुट का अभाव है। भारत इसी आधार पर जस्टिन ट्रूडो के आरोप को बेबुनियाद और कनाडा के प्रधानमंत्री की राजनीतिक मंशा से प्रेरित बता रहा है।


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