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ईरान: परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद क्या हुआ? संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी बोली- मरम्मत के सबूत नहीं मिले

Wed, 28 Oct 2026 09:41 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 28 Oct 2026 09:41 AM IST
सार

अमेरिकी और इस्राइली हमलों में क्षतिग्रस्त ईरान के परमाणु ठिकानों की मरम्मत के सबूत नहीं मिले, लेकिन यूरेनियम के भंडार और निरीक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बरकरार है।

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What happened after US strike on Iran nuclear sites UN agency says no evidence of repairs found
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने मंगलवार को कहा कि अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ईरान ने अमेरिकी और इस्राइली हमलों में क्षतिग्रस्त हुए अपने परमाणु ठिकानों की मरम्मत या उन्हें दोबारा बनाने की कोशिश की हो। हालांकि, एजेंसी अब भी ईरान के परमाणु भंडार की पूरी जानकारी हासिल नहीं कर पाई है।

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'परमाणु ठिकानों की मरम्मत के सबूत नहीं'
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में ग्रोसी ने कहा कि जून 2025 के बाद से ऐसी कोई गतिविधि नजर नहीं आई, जिससे पता चले कि 2025 और 2026 के सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त परमाणु ठिकानों को दोबारा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने ईरान से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को सभी परमाणु ठिकानों पर जाने की अनुमति दे। इसमें वे स्थान भी शामिल हैं, जिन्हें सैन्य हमलों में नुकसान पहुंचा था।
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ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम खत्म करने का किया था दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की एक बड़ी वजह उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों ने उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया। हालांकि, इन ठिकानों की मौजूदा स्थिति और ईरान के परमाणु भंडार की जानकारी हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण अब भी अहम माना जा रहा है।
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यूरेनियम के भंडार ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित यूरेनियम का 440.9 किलोग्राम भंडार था। यूरेनियम को करीब 90 फीसदी तक संवर्धित करने पर उसे परमाणु हथियार बनाने के स्तर का माना जाता है। हालांकि, 60 फीसदी संवर्धन का मतलब यह नहीं है कि ईरान ने परमाणु हथियार बना लिया है। एजेंसी की चिंता यह है कि निरीक्षण की कमी के कारण वह यह पता नहीं लगा पा रही कि ईरान के पास अब कितना यूरेनियम बचा है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और ईरान आमने-सामने
सुरक्षा परिषद की बैठक कई देशों की मांग पर बुलाई गई थी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने परमाणु अप्रसार से जुड़ी जिम्मेदारियों का पालन न करने के मामले में ईरान को सुरक्षा परिषद के पास भेजा था। रूस और चीन ने बैठक रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान को अपनी परमाणु गतिविधियों की जानकारी देनी होती है और निरीक्षकों को जांच की अनुमति देनी पड़ती है।

ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप-राजदूत गुलामहोसैन दर्जी ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों की निंदा की। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ आक्रामक युद्ध बताते हुए अमेरिका पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया। उन्होंने इस्राइल के परमाणु हथियारों का मुद्दा भी उठाया। हालांकि, इस्राइल ने कभी आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार नहीं किया है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं।


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अमेरिका ने ईरान से मांगा जवाब
अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान को क्रूर तानाशाही बताते हुए सवाल किया कि वह अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर एजेंसी के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान को आरोप लगाने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों पर जवाब देना चाहिए। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी हमलों, परमाणु निरीक्षण और यूरेनियम के भंडार को लेकर तनाव बना हुआ है। वहीं, युद्ध के आर्थिक असर और ईंधन की बढ़ती कीमतें भी ट्रम्प प्रशासन के लिए चुनौती बन रही हैं।

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