बड़ा संकट: अमेरिका-यूरोप के पास रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों के सिवा रास्ता ही क्या है? पुतिन ने दे दिया पड़ोसियों को संदेश
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विस्तार
रूस ने यूक्रेन के दो शहरों लुहांस्क और डोनेत्स्क को दो अलग देशों की मान्यता दे दी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इन दोनों देशों को सुरक्षा देने की प्रतिबद्धता को दोहराया है। रूस के भरोसे रूस समर्थित विद्रोही इन दोनों क्षेत्रों में स्वतंत्र देश का झंडा लहरा रहे हैं। सीरिया और बेलारूस ने राष्ट्रपति पुतिन के निर्णय को सही ठहराया है। चीन ने परोक्ष रूप से रूस का साथ देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया कूटनीतिक तड़का लगाया है। दूसरी तरफ रूस के इस आक्रामक कदम के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटों संगठनों और यूरोपीय देशों ने रूस की कड़ी आलोचना की है। रूस पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को लगाने की पहल हो रही है। इसके सामानांतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रूख में कोई बदलाव नहीं आया है।
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की निगाह अब पुतिन के अगले कदम पर टिकी है कि क्या रूस यूक्रेन के भीतर अपनी सेना को भेजेगा? यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी बेहद तनाव और भारी दबाव में चल रहे हैं। हालांकि जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा कि वह रूस के कदम से डरे नहीं हैं। उनकी निगाह अमेरिका और पश्चिमी देशों के अगले कदम या भरोसे पर टिकी है। जबकि व्लादिमीर पुतिन ने संकेत देते हुए कहा कि कूटनीतिक तरीके से यूक्रेन संकट के समाधान का समय निकल गया है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के आर्थिक प्रतिबंधों पर कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह देश पारदर्शिता के साथ समस्या का समाधान करने के पक्ष में नहीं हैं। यह पहले से ही रूस को बदनाम कर रहे थे और धमकियां दे रहे थे। लावरोव ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को आर्थिक प्रतिबंधों की जननी बताया। लावरोव के इस रूख से साफ है कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के प्रतिक्रिया की गणना करके अपने भावी कदम की रूपरेखा बना ली है। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस द्वारा दो अलग देश घोषित करने को मानने से इनकार कर दिया है। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने भी रूस के कदम को गैर कानूनी, अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं का उल्लंघन बताया है। ब्रिटेन ने साफ प्रतिक्रिया दी है कि रूस ने बातचीत और कूटनीतिक रास्ते की बजाय आक्रामक कार्रवाई को चुना।
संयुक्त राष्ट्र में चीन ने लगाया कूटनीति का तड़का
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक बुलाई गई। इसमें चीन के राजदूत ने यूक्रेन को लेकर रूस की कार्रवाई और पूरी समस्या को जटिल स्थिति बताया, लेकिन आलोचना में कुछ नहीं कहा। अलबत्ता एक अपील जरूर की कि इस जटिल स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को मिलजुलकर सूझ-बूझ के साथ आगे बढऩा चाहिए। ताकि ईंधन या तेल का कोई बड़ा संकट खड़ा न हो। दूसरी तरफ सीरिया ने भी रूस की कार्रवाई को खुला समर्थन दे दिया है। भारत जैसे देशों ने अभी तक तटस्थता की नीति को अपनाए रखा है।
दूसरी तरफ यूक्रेन संकट को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने अमेरिका के समकक्ष एंटनी ब्लिंकन से बात की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज से फोन पर बात की है। यह भी दिलचस्प रहा कि अमेरिका समेत तमाम देशों के राजनयिकों ने कार्रवाई की आशंका तथा सुरक्षा की दृष्टि से यूक्रेन की राजधानी कीव को छोड़कर पोलैंड में शरण ले रखी है। तुर्की के राष्ट्रपति ने भी रूस की मान्यता को अनुचित बताया है।
जर्मनी ने स्थगित की नार्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइप लाइन योजना
रूस से जर्मनी को प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए नार्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइप लाइन बिछाने की परियोजना का काम अंतिम चरण में है। इसका प्रमाणन आदि होना है। अमेरिका पहले से ही रूस को चेता रहा था कि यूक्रेन पर कार्रवाई के बाद उसकी यह परियोजना को वह रोक देगा, लेकिन रूस ने ऐसी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया। रूस द्वारा यूक्रेन के दो शहरों को मान्यता देने के बाद जर्मनी ने नार्ड स्ट्रीम-2 गैस परियोजना को फिलहाल स्थगित कर दिया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि प्राकृतिक गैस के लिए जर्मनी या यूरोप की रूस पर निर्भरता एक तरह की मजबूरी है। इसे जर्मनी और यूरोपीय देश लंबे समय तक नहीं टाल सकते। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कॉल्ज और इमैनुएल मैक्रों इस मामले में काफी संवेदनशील हैं। यहां उनका रुख पोलैंड और ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों से कुछ मामले में अलग रहता है।
अब क्या यूक्रेन को नाटो में शामिल करने का होगा निर्णय?
यह एक बड़ा सवाल है? इसका जवाब अभी तक साफ तौर पर नहीं आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को इसी जवाब का इंतजार है। वह अमेरिका और यूरोपीय देशों से रूस के तुष्टीकरण से बाहर आकर यूक्रेन को खुला समर्थन देने की इच्छा रखते हैं। इसके सामानांतर रूस ने 1.75 लाख सैन्य बल, अत्याधुनिक हथियार, मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली, अग्रिम पंक्ति के फाइटर जेट, परमाणु पनडुब्बी, युद्धपोत, विध्वंसक, विमानवाहक पोत की तैनाती के जरिए किसी भी चुनौती के तैयार होने का संकेत दे दिया है। रूस का रूख पूरी तरह से आक्रामक, सैन्य कार्रवाई वाला है। जिसकी गंभीरता को अमेरिका और यूरोपीय देश भांपने लगे हैं। यह एक स्पष्ट संदेश है कि रूस अपने आस-पड़ोस में नाटो संगठन की पैठ को बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिका के थिंक टैक, सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और सामरिक रणनीतिकार भी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अगले कदम को भांपने में लगे हैं।