पश्चिम एशिया तनाव: ब्रिटेन में आतंकी हमले की आशंका, अमेरिकी नागरिकों के लिए अलर्ट जारी, ईरान का रूख क्या?
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन के संघर्षविराम,होरमुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे स्वीकार नहीं किया है। ईरान ने युद्ध के लिए तैयार रहने के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है। इसी बीच ब्रिटेन के RAF Fairford के पास संदिग्ध आतंकी साजिश में पांच गिरफ्तारियों के बाद अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
विस्तार
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी नए हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है, भले ही स्थिति ‘डूम्सडे वॉर’ यानी बेहद विनाशकारी युद्ध तक क्यों न पहुंच जाए। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के संघर्षविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव में होरमुज जलडमरूमध्य खोलने और इसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की पेशकश की थी। इसी बीच ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफर्ड एयरबेस के पास आतंकी हमले की तैयारी के शक में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने ब्रिटेन में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
‘डूम्सडे वॉर’ के लिए तैयार है ईरान'
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में कहा कि ईरान किसी भी नए अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि उनका देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्थिति का सामना करेगा। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की चिंता नहीं है और उसका ध्यान अपने राष्ट्रीय हितों पर है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि ईरान कूटनीति का रास्ता बंद नहीं करना चाहता और शांति के लिए मिलने वाले किसी भी अवसर को गंवाना नहीं चाहिए।
ईरान ने अमेरिका को दिया था 7 दिन का सीजफायर प्लान
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन की योजना रखी थी। इसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक बातचीत शुरू करने की पेशकश की गई थी। अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा था कि यह प्रस्ताव जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी संघर्षविराम संबंधी समझौते के ज्ञापन यानी MoU से मिलता-जुलता है। ईरान ने यह संकेत भी दिया था कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले किसी समझौते पर पहुंचना संभव हो सकता है।
ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ऐसा समझौता चाहता है जिसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोल दिया जाए।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की मांगों को लेकर कई आपत्तियां जताई हैं। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान की ओर से रखे गए प्रस्ताव में जमी हुई संपत्तियों तक अरबों डॉलर की पहुंच और प्रतिबंधों में राहत जैसी मांगें शामिल थीं।
ईरान की मांग क्या है?
अब्बास अराघची के मुताबिक, ईरान चाहता है कि उसकी जमी हुई संपत्तियां और धन वापस किए जाएं। इसके अलावा तेहरान अपने तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने में सक्षम होना चाहता है। अराघची ने कहा कि अगर इन शर्तों पर बातचीत होती है तो ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए तैयार है। उनके अनुसार ये मांगें जून में तैयार किए गए अस्थायी संघर्षविराम संबंधी MoU में शामिल शर्तों के अनुरूप हैं।
अमेरिका ने क्यों जताया ईरान पर अविश्वास?
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ईरान के पिछले कदमों का हवाला देते हुए कहा कि पहले हुई समझ के बावजूद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए। वॉल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का मुख्य फोकस लंबे समय के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रसार के खतरे को रोकना है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप सभी विकल्प खुले रखेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इस समुद्री मार्ग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी तरह का टकराव वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन सकता है। ईरान ने बातचीत के हिस्से के तौर पर इस समुद्री मार्ग को खोलने की पेशकश की है, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बने रहने की स्थिति सामने आ रही है।
ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफर्ड के पास पांच गिरफ्तार
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ब्रिटेन में भी सुरक्षा को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आरएएफ फेयरफर्ड एयरबेस के पास आतंकवादी हमले की तैयारी के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी दूतावास ने ब्रिटेन में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए सतर्क रहने की अपील की है। दूतावास के मुताबिक, ब्रिटिश अधिकारियों ने कुछ स्थानीय निवासियों को एहतियात के तौर पर इलाके से बाहर निकाला है।
ब्रिटेन में आतंकवाद का खतरा ‘गंभीर’
अमेरिकी दूतावास ने कहा कि ब्रिटेन में अधिकारियों ने आतंकवाद के खतरे का स्तर ‘गंभीर’ रखा हुआ है। दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों को अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। नागरिकों को अपनी निजी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने, परिवार और दोस्तों को अपनी स्थिति की जानकारी देने और स्थानीय मीडिया से अपडेट लेते रहने को कहा गया है। अमेरिका ने नागरिकों को स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम यानी STEP में पंजीकरण कराने की भी सलाह दी है।
ट्रंप ने ब्रिटेन-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई की तारीफ की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरएएफ फेयरफर्ड के पास हुई गिरफ्तारियों के मामले में ब्रिटेन और अमेरिका की संयुक्त सुरक्षा कार्रवाई की तारीफ की। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि संदिग्धों पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी और वे बंदरगाहों को बड़ा नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी के बाद कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया।
आरएएफ फेयरफर्ड क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?
आरएएफ फेयरफर्ड ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है और अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए भी इसकी अहम भूमिका रही है। यह यूएस ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के लिए एक महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेटिंग साइट के तौर पर काम करता है और यहां 501st कॉम्बैट सपोर्ट विंग मौजूद है। यह बेस अतीत में अमेरिकी B-1 बमवर्षकों जैसे भारी सैन्य विमानों की तैनाती का केंद्र रहा है। इन विमानों का इस्तेमाल मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया गया है।
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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
फिलहाल एक तरफ ईरान अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की पेशकश और ट्रंप प्रशासन की असहमति के बीच कूटनीतिक स्थिति पर दुनिया की नजर है। इसी दौरान ब्रिटेन में RAF Fairford के पास हुई गिरफ्तारियों ने सुरक्षा संबंधी चिंता को और बढ़ा दिया है। ब्रिटिश अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।