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ईरान युद्ध का दायरा बढ़ा: नागरिक ठिकाने बने निशाना; ट्रंप और नेतन्याहू का युद्ध पर क्या रुख; जानें पूरा अपडेट
Mon, 09 Mar 2026 03:39 AM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 09 Mar 2026 03:39 AM IST
सार
ईरान और इस्राइल के बीच जारी युद्ध अब नागरिक ढांचे तक पहुंच गया है। बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान के हमले में उसके पानी के संयंत्र को नुकसान हुआ है। वहीं सऊदी अरब में एक हमले में एक भारतीय और एक बांग्लादेशी नागरिक की मौत हो गई। वहीं, लेबनान में करीब पांच लाख लोग विस्थापित किए गए। ट्रंप और नेतन्याहू युद्ध पर क्या कह रहे? आइए, इस पूरे मामले में अब तक के सभी अपडेट जानते हैं।
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ईरान संकट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ईरान और इस्राइल के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। लड़ाई का दायरा सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर नागरिक ढांचे तक पहुंच गया है। खाड़ी देशों ने आरोप लगाया है कि हमलों में पानी के संयंत्र, तेल भंडारण और रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए हैं। इस बीच सऊदी अरब में युद्ध से जुड़ी पहली मौतों की पुष्टि होने से पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान के हमले में उसके एक डिसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा है। यह संयंत्र समुद्री पानी को साफ कर पीने लायक बनाता है और खाड़ी क्षेत्र में लाखों लोगों की पानी की जरूरत पूरी करता है। दूसरी तरफ इस्राइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडारण डिपो में आग लग गई, जिससे पर्यावरण को लेकर भी गंभीर चेतावनियां जारी की गई हैं।
सऊदी में भारतीय समेत दो की मौत
सऊदी अरब ने बताया कि एक सैन्य प्रोजेक्टाइल रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे दो लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक भारतीय और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 12 अन्य बांग्लादेशी नागरिक घायल हुए हैं। खाड़ी देशों में इस युद्ध के दौरान मरने वालों में बड़ी संख्या विदेशी कामगारों की बताई जा रही है।
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ये भी पढ़ें- Osman Hadi: बंगाल में पकड़े गए दो बांग्लादेशी नागिरक, बांग्लादेश के युवा नेता उस्मान हादी की हत्या में थे शामिल
ट्रंप और नेतन्याहू का युद्ध पर क्या रुख है?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा। दोनों नेताओं ने कहा है कि ईरान को कमजोर करने के लिए समन्वित कार्रवाई जारी रखी जाएगी। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद ईरान में कौन सत्ता में आएगा, इसमें भी अमेरिका की भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मंजूरी के बिना नया नेतृत्व ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।
युद्ध में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार युद्ध में अब तक भारी जनहानि हुई है। ईरान में कम से कम 1230 लोगों की मौत हो चुकी है। लेबनान में 397 लोगों की जान गई है, जबकि इस्राइल में कम से कम 11 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी सेना ने भी बताया कि सऊदी अरब में ईरानी हमले में घायल एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इस तरह अब तक सात अमेरिकी सैनिक भी इस युद्ध में मारे जा चुके हैं।
ये भी पढ़ें- US: पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल बाजार में स्थिरता लाने के लिए अमेरिका सख्त, ट्रंप प्रशासन का बयान आया सामने
ईरान के राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अगर ईरान पर दबाव बढ़ाया गया तो जवाब और कड़ा होगा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकी के सामने झुकेगा नहीं। उन्होंने पड़ोसी देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियानों में हिस्सा न लें।
नागरिक ढांचे पर हमलों से क्यों बढ़ी चिंता?
डिसैलिनेशन प्लांट और तेल भंडारण जैसी सुविधाएं खाड़ी देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन संयंत्रों से लाखों लोगों को पीने का पानी और ऊर्जा मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन पर हमले जारी रहे तो पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा हो सकता है। रेगिस्तानी देशों में पानी के ऐसे संयंत्र जीवन के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
तेल उद्योग और वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ा?
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर क़ालिबाफ ने कहा कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि संघर्ष लंबा चला तो तेल उत्पादन और बिक्री प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे के कारण कुछ देशों ने तेल उत्पादन भी कम कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है।
ये भी पढ़ें- क्या फंस गए ट्रंप और नेतन्याहू?: अपने विरोधियों को ऐसे झटका देगा ईरान, जानें किस रणनीति पर काम कर रहा
लेबनान में लोगों की स्थिति कैसी है?
लेबनान सरकार के अनुसार लड़ाई के कारण पांच लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। कई परिवार स्कूलों, अस्थायी शिविरों और खुले स्थानों में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग कारों में रात गुजार रहे हैं। सरकार ने हजारों लोगों को आश्रय देने के लिए एक बड़े स्टेडियम को अस्थायी शिविर बनाने की योजना बनाई है।
क्षेत्र में तनाव क्यों लगातार बढ़ रहा है?
इस्राइल ने हाल के दिनों में लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसके जवाब में हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इस्राइल की ओर रॉकेट दागे हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और फैला तो इसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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रिपोर्ट के अनुसार बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान के हमले में उसके एक डिसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा है। यह संयंत्र समुद्री पानी को साफ कर पीने लायक बनाता है और खाड़ी क्षेत्र में लाखों लोगों की पानी की जरूरत पूरी करता है। दूसरी तरफ इस्राइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडारण डिपो में आग लग गई, जिससे पर्यावरण को लेकर भी गंभीर चेतावनियां जारी की गई हैं।
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सऊदी में भारतीय समेत दो की मौत
सऊदी अरब ने बताया कि एक सैन्य प्रोजेक्टाइल रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे दो लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक भारतीय और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 12 अन्य बांग्लादेशी नागरिक घायल हुए हैं। खाड़ी देशों में इस युद्ध के दौरान मरने वालों में बड़ी संख्या विदेशी कामगारों की बताई जा रही है।
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ट्रंप और नेतन्याहू का युद्ध पर क्या रुख है?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा। दोनों नेताओं ने कहा है कि ईरान को कमजोर करने के लिए समन्वित कार्रवाई जारी रखी जाएगी। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद ईरान में कौन सत्ता में आएगा, इसमें भी अमेरिका की भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मंजूरी के बिना नया नेतृत्व ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।
युद्ध में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार युद्ध में अब तक भारी जनहानि हुई है। ईरान में कम से कम 1230 लोगों की मौत हो चुकी है। लेबनान में 397 लोगों की जान गई है, जबकि इस्राइल में कम से कम 11 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी सेना ने भी बताया कि सऊदी अरब में ईरानी हमले में घायल एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इस तरह अब तक सात अमेरिकी सैनिक भी इस युद्ध में मारे जा चुके हैं।
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ईरान के राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अगर ईरान पर दबाव बढ़ाया गया तो जवाब और कड़ा होगा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकी के सामने झुकेगा नहीं। उन्होंने पड़ोसी देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियानों में हिस्सा न लें।
नागरिक ढांचे पर हमलों से क्यों बढ़ी चिंता?
डिसैलिनेशन प्लांट और तेल भंडारण जैसी सुविधाएं खाड़ी देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन संयंत्रों से लाखों लोगों को पीने का पानी और ऊर्जा मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन पर हमले जारी रहे तो पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा हो सकता है। रेगिस्तानी देशों में पानी के ऐसे संयंत्र जीवन के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
तेल उद्योग और वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ा?
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर क़ालिबाफ ने कहा कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि संघर्ष लंबा चला तो तेल उत्पादन और बिक्री प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे के कारण कुछ देशों ने तेल उत्पादन भी कम कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है।
ये भी पढ़ें- क्या फंस गए ट्रंप और नेतन्याहू?: अपने विरोधियों को ऐसे झटका देगा ईरान, जानें किस रणनीति पर काम कर रहा
लेबनान में लोगों की स्थिति कैसी है?
लेबनान सरकार के अनुसार लड़ाई के कारण पांच लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। कई परिवार स्कूलों, अस्थायी शिविरों और खुले स्थानों में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग कारों में रात गुजार रहे हैं। सरकार ने हजारों लोगों को आश्रय देने के लिए एक बड़े स्टेडियम को अस्थायी शिविर बनाने की योजना बनाई है।
क्षेत्र में तनाव क्यों लगातार बढ़ रहा है?
इस्राइल ने हाल के दिनों में लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसके जवाब में हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इस्राइल की ओर रॉकेट दागे हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और फैला तो इसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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