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अमेरिका का पलटवार: ईरान के तीन तेल टैंकरों पर किया हमला; विमानन क्षेत्र की 36 संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाया

Wed, 09 Sep 2026 02:38 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 09 Sep 2026 02:38 AM IST
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west asia conflict us strikes multiple iranian tankers, aviation sector with sanctions
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के बाद की गई। एसोसिएटेड प्रेस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। 
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ईरान की विमानन क्षेत्र की 36 संस्थाओं पर प्रतिबंध
अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के विमानन क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाए। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दो दर्जन से ज्यादा यात्री और निजी एयरलाइनों को निशाना बनाया। विदेशी कार्गो सेवा देने वाली कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई। अमेरिका का मकसद ईरान को उसके बचे हुए कारोबारी साझेदारों से अलग करना है।
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अमेरिका ने प्रतिबंध क्यों लगाए?
ये कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' अभियान का हिस्सा है। इसका मकसद ईरान सरकार की आर्थिक मदद के अहम रास्तों को बंद करना है। अमेरिका ने कहा कि ईरान का विमानन क्षेत्र हथियार, लोगों और अवैध सामान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
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स्कॉट बेसेंट ने क्या चेतावनी दी?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी कि ईरान की बाकी एयरलाइन के साथ कारोबार करने वालों को भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता है। अमेरिका ने इस सप्ताह 36 संस्थाओं पर कार्रवाई की है। इनसे कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और सरकारों पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं। इन संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां भी जब्त की जा सकती हैं।

ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की पुरानी प्रतिबंध नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का अमेरिका पर भी बुरा असर पड़ा है। इससे दुनिया में अमेरिका की छवि को नुकसान हुआ है। उन्होंने पूछा कि प्रतिबंध और युद्ध से अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाने के बाद अमेरिका का नया तरीका फिर से प्रतिबंध लगाना है?

माही एयर पर भी कार्रवाई क्यों?
अमेरिका ने कहा कि तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कजाखस्तान और मलयेशिया की कुछ निजी कंपनियों ने ईरान की माही एयर को सामान और लॉजिस्टिक्स की सेवाएं दी हैं। माही एयर तेहरान से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के कई शहरों के लिए उड़ानें चलाती है। अमेरिका ने 2019 में माही एयर पर आतंकवाद विरोधी प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका का आरोप था कि एयरलाइन ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की मदद करती है।

माही एयर पर पहली बार कब कार्रवाई हुई थी?
अमेरिका ने माही एयर को पहली बार 2011 में निशाना बनाया था। उस समय ओबामा प्रशासन था। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि माही एयर का इस्तेमाल लेबनान और यमन में ईरान समर्थित संगठनों तक हथियार पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

ईरान पर अमेरिका का दबाव क्यों बढ़ा?
ताजा प्रतिबंध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर आर्थिक और सैन्य रणनीति का हिस्सा हैं। ट्रंप प्रशासन छह महीने से ज्यादा समय से चल रहे ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।

ये पढ़ें: श्रीलंका: 'संकट में साथ खड़ा रहेगा भारत', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के संबंधों पर क्या-क्या कहा?

पिछले हफ्ते अमेरिका ने क्या किया था?
अमेरिका ने पिछले हफ्ते तुर्किये के एक बैंक गोल्डन ग्लोबल यतिरिम बैंकासी पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका का आरोप था कि इस बैंक को ईरान के तेल से होने वाली कमाई को चीन से तुर्किये पहुंचाने में मदद के लिए बनाया गया था। वहां इस पैसे को नकद और सोने में बदला जा सकता था। अमेरिका ने कहा कि बैंक ने जानबूझकर ईरान की वित्तीय संस्थाओं को बैंकिंग सेवाएं दीं। इनमें वे संस्थाएं भी शामिल थीं, जिन पर 2022 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे।

यूएई में भी कार्रवाई हुई?
अमेरिका ने पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात में एक मिस्र के बैंक के कामकाज पर भी रोक लगाई थी। हालांकि, इस मामले में अमेरिका ने सीधे प्रतिबंध नहीं लगाए। प्रशासन ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने और दुनिया की वित्तीय व्यवस्था को नुकसान से बचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

ईरान ने क्या दावा किया?
ईरान ने कहा है कि उसकी नौसेना ने अमेरिका का एक सैन्य अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ लिया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, ड्रोन को मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश के पास पकड़ा गया। ईरान ने इसे अपने कब्जे में आया अमेरिकी उपकरण बताया।


अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि एंडुरिल डाइव-एलडी ड्रोन एक दिन से ज्यादा समय पहले खराब हो गया था। यह ड्रोन इलाके के समुद्री क्षेत्र का सर्वे कर रहा था। अमेरिकी सेना के पास अब यह ड्रोन नहीं है।

ड्रोन में क्या खास था?
हॉकिन्स ने कहा कि यह पुराना और खराब मॉडल था। इसमें कोई संवेदनशील जानकारी इकट्ठा नहीं की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रोन में कोई गोपनीय सोनार या रडार उपकरण नहीं था। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध सामान्य तकनीक वाले रूप में था। इसलिए अमेरिका को इसकी चिंता नहीं है।
 
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