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West Asia: अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने बहरीन-कुवैत पर किया अटैक; ट्रंप की धमकी, बोले- ये कभी नहीं सीखेंगे
Sun, 28 Jun 2026 02:46 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, आईएएनएस,
पीटीआई, आईएएनएस,
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 28 Jun 2026 02:46 PM IST
सार
पश्चिम एशिया संकट गहराता दिख रहा है। अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है और कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इससे अमेरिका बौखला गया है और राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल अमेरिका के ईरान पर हवाई हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान ने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
ईरान ने कुवैत-बहरीन को क्यों बनाया निशाना?
रविवार तड़के कुवैत पर हुआ हमला युद्धविराम समझौते के बाद पहला बड़ा हमला माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाली एक बहुराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने शनिवार को ओमान के पास जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के लिए मार्ग का विस्तार करने की घोषणा की है, जिससे ईरान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, शनिवार तड़के समुद्र में एक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया। जिस जहाज पर हमला हुआ, वह पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर किकू था, जो कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था। कतर, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। टैंकर दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था।
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ट्रंप ने दी धमकी
अमेरिका के हमले के बाद यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर भी हमला किया था। अमेरिका के विमानों ने सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों और तटीय रडार साइट्स पर फिर से हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!' उन्होंने आगे कहा, 'एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि यदि युद्धविराम समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो ईरान बातचीत का रास्ता अपनाए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। ईरान पहले ही कह चुका है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को उसके निर्देशों का पालन करना होगा और भविष्य में ट्रांजिट शुल्क भी देना पड़ सकता है। हालांकि हाल के दिनों में कई जहाज फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जहाज ईरान द्वारा नियंत्रित समुद्री मार्ग के बजाय ओमान तट के पास बनाए गए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कर रहा था। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान के पास युद्धविराम समझौते का सम्मान करने का अवसर था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और किकू पर हमला कर दिया।
बहरीन ने ईरानी ड्रोन हमले की निंदा की
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि ईरान के कई ड्रोन देश को निशाना बनाकर भेजे गए। मंत्रालय ने इसे नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। हालांकि किसी नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई। कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। कुवैत में अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है।
बहरीन ईरान का मुखर आलोचक रहा है और वहीं अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा भी तैनात है। हाल ही में बहरीन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी सहयोग परिषद के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की थी, जिसमें ईरान के हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला रखने की मांग की गई थी।
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ईरान ने कुवैत-बहरीन को क्यों बनाया निशाना?
रविवार तड़के कुवैत पर हुआ हमला युद्धविराम समझौते के बाद पहला बड़ा हमला माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाली एक बहुराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने शनिवार को ओमान के पास जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के लिए मार्ग का विस्तार करने की घोषणा की है, जिससे ईरान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
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अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, शनिवार तड़के समुद्र में एक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया। जिस जहाज पर हमला हुआ, वह पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर किकू था, जो कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था। कतर, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। टैंकर दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था।
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ट्रंप ने दी धमकी
अमेरिका के हमले के बाद यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर भी हमला किया था। अमेरिका के विमानों ने सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों और तटीय रडार साइट्स पर फिर से हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!' उन्होंने आगे कहा, 'एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि यदि युद्धविराम समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो ईरान बातचीत का रास्ता अपनाए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। ईरान पहले ही कह चुका है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को उसके निर्देशों का पालन करना होगा और भविष्य में ट्रांजिट शुल्क भी देना पड़ सकता है। हालांकि हाल के दिनों में कई जहाज फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जहाज ईरान द्वारा नियंत्रित समुद्री मार्ग के बजाय ओमान तट के पास बनाए गए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कर रहा था। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान के पास युद्धविराम समझौते का सम्मान करने का अवसर था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और किकू पर हमला कर दिया।
बहरीन ने ईरानी ड्रोन हमले की निंदा की
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि ईरान के कई ड्रोन देश को निशाना बनाकर भेजे गए। मंत्रालय ने इसे नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। हालांकि किसी नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई। कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। कुवैत में अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है।
बहरीन ईरान का मुखर आलोचक रहा है और वहीं अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा भी तैनात है। हाल ही में बहरीन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी सहयोग परिषद के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की थी, जिसमें ईरान के हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला रखने की मांग की गई थी।