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क्या भारतीय सैनिकों की शहादत चीन की सोची समझी साजिश का नतीजा?
Mon, 29 Jun 2020 06:15 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 29 Jun 2020 06:15 PM IST
सार
- चीन ने सीमा पर बुलाए मार्शल आर्ट के धुरंधर और पर्वतारोहियों के दस्ते
- चीन के डिफेंस अखबार का दावा, ल्हासा में 15 जून को ऐसे जवानों का जमावड़ा दिखा
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PLA martial art
- फोटो : File Photo
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विस्तार
पूर्वी लद्दाख सीमा पर 20 भारतीय जवानों की शहादत को लेकर भले ही पूरा देश विचलित हो गया हो, लेकिन ये सवाल बार बार उठते रहे हैं कि आखिर बगैर किसी हथियार या गोली बारूद के हमारे इतने सैनिकों की जान कैसे चली गई?
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क्या चीन ने इसके लिए पहले से कोई खास तैयारी कर रखी थी? दरअसल चीन के ही अखबार ये दावा कर रहे हैं कि तिब्बत की सुरक्षा के लिए वहां के तमाम मंजे हुए पर्वतारोही, मार्शल आर्ट्स के प्रशिक्षित जवान और मिलिशिया डिविजन की पांच टुकड़ियां 15 जून को ही ल्हासा में मौजूद थीं।
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चीन के आधिकारिक सैन्य अखबार चाइना नेशनल डिफेंस न्यूज़ की खबर के मुताबिक इन पांच मिलिशिया टुकड़ियों में माउंट एवरेस्ट ओलंपिक टॉर्च रिले टीम के पूर्व सदस्य और पर्वतारोही के अलावा मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स क्लब के लड़ाके शामिल थे।
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चीन के आधिकारिक टेलीविजन चैनल सीसीटीवी ने भी तिब्बत की राजधानी में ऐसे सैकड़ों जवानों के वीडियो जारी किए हैं, जो ल्हासा की सुरक्षा के नाम पर अपने अभ्यास में जुटे हुए हैं।
हालांकि अखबार ने या दावा नहीं किया है कि ये लड़ाके और मिलिशिया की टुकड़ियां पूर्वी लद्दाख से लगी भारतीय सीमा पर गई थीं। वैसे भी ल्हासा की दूरी यहां से तकरीबन 1300 किलोमीटर है।
लेकिन ये संदेह जताया जा रहा है कि चीन ने अपनी सीमा पर ऐसे प्रशिक्षित जवानों की टुकड़ियां बुला रखी थीं, जिससे भारतीय सैनिकों पर जानलेवा हमला बोला जा सके।
चाइना नेशनल डिफेंस न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत के एक कमांडर वांग हाइजियांग ने बताया कि एनबो फाइट क्लब नए जवानों की भर्ती करके अपनी ताकत और दायरा बढ़ा रहा है और चीनी सेना को अपनी हर मदद के लिए तैयार रहता है।
दूसरी तरफ चीनी मीडिया में इस तरह की खबरें पिछले कुछ समय से लगातार आ रही हैं कि तिब्बत से लगे सीमाई इलाकों और दुर्गम इलाकों में चीन तेजी से अपने सैन्य अभ्यास करने में लगा हुआ है।
खासकर तिब्बत की सुरक्षा के नाम पर इस पूरे इलाके में उसने जबरदस्त सैन्य जमावड़ा कर रखा है और लगातार अपने मॉक ड्रिल्स को अंजाम देता रहता है।
इसमें सेना के साथ साथ मार्शल आर्ट्स के धुरंधर जवान और दुर्गम पहाड़ों पर हर परिस्थिति में अपने करतब दिखा सकने वाले उत्साही जवानों की फौज भी शामिल है, जो खुद को देशभक्ति के नाम पर हमेशा आगे रखती है।
इसलिए ये संदेह जताया जा रहा है कि 15 जून की रात पूर्वी लद्दाख और गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के पीछे क्या इन जवानों का हाथ तो नहीं है?