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Sri Lanka Crisis: 2022 में भारत बना श्रीलंका का सबसे बड़ा ऋणदाता, अब तक दी 377 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद
Thu, 15 Sep 2022 06:25 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 15 Sep 2022 06:25 PM IST
सार
2017 से 2021 के बीच चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता रहा है। साल 2021 में,चीन ने 947 मिलियन अमेरीकी डॉलर दिए थे। इसमें से 809 मिलियन अमरीकी डॉलर चीन विकास बैंक से उधार दिए गए थे। वहीं, इस समयावधि में एडीबी श्रीलंका के लिए सबसे बड़ा बहुपक्षीय ऋणदाता रहा है।
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भारत-श्रीलंका
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आर्थिक संकटों का सामना कर रहे श्रीलंका को भारत ने इस साल सबसे ज्यादा मदद दी है। इसमें भारत द्वारा द्वीप राष्ट्र को दिया गया 377 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण भी शामिल है। वहीं, वेराइट रिसर्च थिंक-टैंक ने एक बड़ा दावा किया है। वेराइट रिसर्च थिंक-टैंक ने कहा है कि भारत इस साल श्रीलंका के लिए सबसे बड़े ऋणदाता के रूप में सामने आया है।
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वहीं, इस समय भारत, एशियाई विकास बैंक के 360 मिलियन अमरीकी डॉलर का ऋणी है। ये जनवरी से अप्रैल 2022 तक कुल भुगतान का 76 प्रतिशत हिस्सा है। कोलंबो के एक स्वतंत्र वेराइट रिसर्च थिंक-टैंक ने बताया कि 2022 के पहले चार महीनों में श्रीलंका को कुल 968 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण मिला है, इसमें भारत का योगदान 377 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस योगदान के साथ श्रीलंका के लिए भारत सबसे बड़े द्विपक्षीय ऋणदाता के रूप में ऊभर कर सामने आया है। एशियाई विकास बैंक (ADB) इस अवधि में 35.96 करोड़ डॉलर के साथ दूसरा सबसे बड़ा ऋणदाता था। इसके बाद विश्व बैंक है जिसने श्रीलंका को 6.73 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। गौरतलब है कि वैराइट रिसर्च एशिया में सरकारों और निजी क्षेत्र के लिए रणनीतिक विश्लेषण और सलाह देने काम करता है।
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वैराइट रिसर्च थिंक टैंक ने बताया कि 2017 से 2021 के बीच चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता रहा है। साल 2021 में,चीन ने 947 मिलियन अमेरीकी डॉलर दिए थे। इसमें से 809 मिलियन अमरीकी डॉलर चीन विकास बैंक से उधार दिए गए थे। वहीं, इस समयावधि में एडीबी श्रीलंका के लिए सबसे बड़ा बहुपक्षीय ऋणदाता रहा है।
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श्रीलंका इस समय सबसे बड़े आर्थिक संकटों का सामना कर रहा है। इस साल की शुरुआत में श्रीलंका को ईंधन और आवश्यक सामान खरीदने के लिए भारत ने अपनी क्रेडिट लाइन के जरिए मदद की थी। वहीं भारतीय उच्चायोग ने कोलंबों में बताया कि इस साल श्रीलंका को भारत की कुल ऋण सहायता, जिसमें मुद्रा का अदला-बदली भी शामिल है, लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। गौरतलब है कि श्रीलंका पर करीबन 51 बिलियन अमरीकी डॉलर का विदेशी ऋण बकाया है। इसमें से 28 बिलियन अमेरिकी डालर का 2027 तक भुगतान किया जाना चाहिए।
विक्रमसिंघे ने दिया बड़ा बयान
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि उनका देश हिंद महासागर में किसी भी बड़ी शक्ति प्रतिद्वंद्विता में शामिल नहीं होगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका देश हंबनटोटा को लेकर दो गुटों के बीच पिस रहा है। दरअसल, कुछ सप्ताह पहले चीन के एक पोत के श्रीलंका के हंबनटोटा आने को लेकर भारत और चीन के बीच टकराव के हालात बन गए थे।