बढ़े कोरोना संक्रमण के मामले: अमेरिका में वैक्सीन विरोधियों पर टूट रहा है आम लोगों का गुस्सा
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि महामारी टीका ना लगवाने लोगों की वजह से लौट कर आई है। उन्होंने कहा- ‘टीका ना लगवा कर आप खुद को जितना बुद्धिमान दिखाना चाहते हैं, आप असल में उसके कहीं करीब भी नहीं हैं।’
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अमेरिका में कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी और जगह-जगह नए सिरे से प्रतिबंध लागू होने के बीच अमेरिका में वैक्सीन समर्थकों और विरोधियों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। टीका समर्थकों ने वैक्सीन विरोधियों पर पूरे देश के लोगों की सेहत को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक बीते महीने देश में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में 400 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसके साथ ही अस्पताल पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। देश की रोग नियंत्रण और निवारक एजेंसी- सीडीसी ने पिछले हफ्ते देश में सबके लिए मास्क पहनना फिर से अनिवार्य कर दिया। सीडीसी ने कहा कि वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए भी बेहतर यही है कि वे इनडोर जगहों पर भी मास्क पहन कर रहें।
इस बार संक्रमण कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के कारण फैल रहा है। इस कारण लागू किए गए प्रतिबंधों का असर अमेरिका के अलाबामा राज्य की 80 आबादी पर पड़ा है। इस राज्य के गवर्नर ने इस हालत के लिए सीधे तौर पर वैक्सीन विरोधियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने एक बयान में कहा- ‘ये समय है, जब हम टीका न लगवाने वाले लोगों को संक्रमण के मामलों में इजाफे के लिए सीधे दोषी ठहराना शुरू करें।’ वर्जीनिया राज्य के गवर्नर राल्फ नार्थम ने भी वैक्सीन विरोधियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें याद दिलाया है कि टीका लगवाना ही महामारी खत्म करने का एकमात्र उपाय है।
टीवी चैनल सीएनएन की एक खबर में बताया गया है कि नए बने हालात के बीच देश की आबादी के एक बड़े हिस्से का सब्र टूट रहा है। उनमें उन लोगों के लिए साफ गुस्सा देखने को मिल रहा है, जो टीका लगवाने से इनकार कर रहे हैं। दूसरी तरफ एक वह तबका है, जो न सिर्फ वैक्सीन लगवाना बल्कि मास्क पहनाना अनिवार्य करने के भी खिलाफ है। पिछले दिनों देश में कई जगहों पर लॉकडाउन और वैक्सीन विरोधी प्रदर्शन हुए थे।
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि जिन राज्यों में टीकाकरण की दर कम है, वहां नए संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की औसत संख्या उन राज्यों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है, जहां टीकाकरण की दर ऊंची है। निम्न टीकाकरण वाले राज्यों में कोरोना संक्रमण के कारण हो रही मौतों की संख्या भी ज्यादा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि महामारी टीका ना लगवाने लोगों की वजह से लौट कर आई है। उन्होंने कहा- ‘टीका ना लगवा कर आप खुद को जितना बुद्धिमान दिखाना चाहते हैं, आप असल में उसके कहीं करीब भी नहीं हैं।’
अमेरिकी में आम लोगों से ऐसी बातचीत छपी है, जिसमें उन्होंने टीका विरोधियों पर अपने गुस्से का इजहार किया। इन लोगों ने कहा है कि अब उन्हें भी कुछ दूसरे लोगों के गैर-जिम्मेदाराना नजरिए की कीमत चुकानी पड़ रही है। कई विशेषज्ञों ने भी कहा है कि उन्हें उन लोगों के बारे में सोच कर गुस्सा आता है, जिनकी वजह से फिर से मास्क पहनना जरूरी हो गया है।
मनोवैज्ञानिकों की संस्था- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मुख्य विज्ञान अधिकारी मिच प्रिंस्टीन ने सीएनएन से कहा- ‘अगर किसी ने आंख पर पट्टी बांध रखी हो, तो उसे गिरने से बचाना मुश्किल है। आप जानते हैं कि असंतोष, चिंता, अनिश्चिय आदि के माहौल में गुस्सा पैदा होता है। (टीका के मामले में) विचारधारा संबंधी गंभीर खाई भी है। ये सारे पहलू हकीकत बन गए हैं। अब ये बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं।’