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पांच तकनीकों पर फोकस: महाशक्ति बने रहने के लिए किसी को खुद से आगे नहीं निकलने देना चाहता अमेरिका

Sat, 23 Oct 2021 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 23 Oct 2021 07:57 PM IST
सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में इस दस्तावेज में कहा गया है कि चीन के पास अगले एक दशक में अमेरिका को पीछे छोड़ देने की ताकत और महत्वाकांक्षा है। उससे चीन की साइबर हमले करने और ‘दुष्प्रचार अभियान चलाने’ की क्षमता में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी...

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US wants to be super power in artificial intelligence, quantum computing, biotechnology, semiconductors, and autonomous systems
अमेरिकी सेना - फोटो : Social Media

विस्तार

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने तकनीक के पांच खास क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे उन्नत तकनीकों में अमेरिका की बढ़त बनाए रखने के इंतजाम करें। जिन पांच तकनीकों की पहचान इन अधिकारियों ने की है, उनके बारे में माना जाता है कि आने वाले दशकों में दुनिया पर किसका वर्चस्व होगा, वह इनमें हासिल की गई दक्षता से ही तय होगा।

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‘कानूनी और गैर-कानूनी तरीकों’ का इस्तेमाल कर रहे हैं चीन और रूस

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के मुताबिक ये पांच तकनीक हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायो-टेक्नोलॉजी, सेमी कंडक्टर्स, और ऑटोनोमस सिस्टम्स। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के लिए इन क्षेत्रों में बढ़त बनाए रखने की पहल करना इसलिए जरूरी हो गया है, क्योंकि चीन और रूस ने इनमें महारत हासिल करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। खुफिया अधिकारियों ने इन क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद एक दस्तावेज दैयार किया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अमेरिका से इन तकनीकों में आगे निकलने के लिए चीन और रूस ‘कानूनी और गैर-कानूनी तरीकों’ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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दस्तावेज में कहा गया है कि इन तकनीक क्षेत्रों में सफलता से ही यह निश्चित होगा कि क्या ‘अमेरिका दुनिया की महाशक्ति बना रहेगा या उसके रणनीतिक प्रतिस्पर्धी उस पर ग्रहण लगा देंगे।’ वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के नेशनल काउंटर-इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर ने अमेरिकी कंपनियों और अनुसंधानकर्ताओं को आगाह करने की एक मुहिम शुरू की है। उसमें उन्हें बताया जा रहा है कि रूस और चीन की सरकारें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए संबंध बना रही हैं, प्रतिभाओं की भर्ती कर रही हैं, और साथ ही जासूसी भी कर रही हैं। उससे इन क्षेत्रों में अमेरिका के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

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अगले एक दशक में अमेरिका को पछाड़ देगा चीन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में इस दस्तावेज में कहा गया है कि चीन के पास अगले एक दशक में अमेरिका को पीछे छोड़ देने की ताकत और महत्वाकांक्षा है। उससे चीन की साइबर हमले करने और ‘दुष्प्रचार अभियान चलाने’ की क्षमता में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी। क्वांटम कंप्यूटिंग के बारे में कहा गया है कि दुनिया के कई देश इसके विकास पर अमेरिका की तुलना में ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इस कारण वे अमेरिकी प्रतिभाओं को भी नौकरी पर रखने की बेहतर स्थिति में पहुंच गए हैं। दस्तावेज में कहा गया है कि क्वांटम कंप्यूटिंग पर जिसका भी वर्चस्व होगा, वह दूसरे देशों के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी संचार को प्रभावित करने की स्थिति में होगा। बायोटेक के बारे में कहा गया है कि हाल के दशकों में इस क्षेत्र में दुनिया में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जिनोमिक्स के क्षेत्र में सफलता हासिल करने वाले देश निगरानी और सामाजिक दमन में अधिक सक्षम हो सकते हैं।



सेमीकंडक्टर्स के बारे में कहा गया है कि इसके सप्लाई चेन के मौजूदा स्वरूप से ऐसी रुकावटें खड़ी होती हैं, जिसका लाभ दूसरे देश उठा सकते हैं। फिलहाल, सेमीकंडक्टर्स के मामले में अमेरिका पूरी तरह ताइवान की एक कंपनी पर निर्भर है। ऑटोनोमस सिस्टम्स के बारे में बताया गया है कि सैनिक और असैनिक दोनों मकसदों के लिए इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे अधिक गंभीर साइबर हमलों का खतरा पैदा हो रहा है।

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