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ट्रंप-जेलेंस्की की बहस: रूसी मीडिया ने बताया रिएलिटी शो जैसा तमाशा, यूक्रेन-यूरोप ने कहा- अमेरिका ने पाला बदला

Sat, 01 Mar 2025 04:41 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 01 Mar 2025 04:41 PM IST
सार

यह जानना अहम है कि आखिर वैश्विक मीडिया के मुताबिक इस बहस के राजनीतिक मायने क्या हैं? जेलेंस्की के ट्रंप का सामना करने के फैसले का यूक्रेन के भविष्य पर क्या असर होगा? इसके अलावा रूसी मीडिया ने ट्रंप-जेलेंस्की की बहस पर क्या कहा है? यूरोप की मीडिया ने मुद्दे पर क्या राय दी है? आइये जानते हैं...

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US-Ukraine President Donald Trump Volodymyr Zelenskyy spat in White House Wold Media Reaction analysis news
ट्रंप-जेलेंस्की विवाद पर मीडिया - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस में शुक्रवार को हुई गर्मागरम बहस को पूरी दुनिया ने देखा। ओवल ऑफिस में करीब 15 मिनट तक तेज आवाज में हुई बातचीत को लेकर अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से लेकर वैश्विक मीडिया तक में चर्चा जारी हैं। साथ ही इस बहस के बाद आगे यूक्रेन का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर भी राजनीतिक पंडितों की तरफ से संभावनाएं देखी जा रही हैं। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वैश्विक मीडिया के मुताबिक इस बहस के राजनीतिक मायने क्या हैं? जेलेंस्की के ट्रंप का सामना करने के फैसले का यूक्रेन के भविष्य पर क्या असर होगा? इसके अलावा रूसी मीडिया ने ट्रंप-जेलेंस्की की बहस पर क्या कहा है? यूरोप की मीडिया ने मुद्दे पर क्या राय दी है? आइये जानते हैं...
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मीडिया में क्या रही ट्रंप-जेलेंस्की की बहस को लेकर प्रतिक्रिया?

1. अमेरिकी मीडिया

(i). न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई बहस कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के रिश्ते में जबरदस्त गिरावट है। ट्रंप का आक्रामक रवैया और जेलेंस्की के लिए कठोर शब्दों ने दोनों देशों के बीच युद्ध के तीन साल के रिश्तों को खराब किया। दोनों नेताओं के बीच बातचीत दुनिया के सामने एक 'चिल्लाने के मुकाबले' (शाउटिंग मैच) की तरह ज्यादा लगी। यह ट्रंप के उस नजरिए की परिचायक है, जिसके तहत वह रूस से अच्छे रिश्ते बनाने और पांरपरिक रिश्तों को जहां-तहां छोड़ देने के लिए यूक्रेन की बलि देने को भी तैयार दिखते हैं। 

(ii). सीएनएन
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कभी करीब से युद्ध नहीं देखा। इसके बावजूद वह युद्ध से नफरत करते हैं। उन्हें लगता है कि जेलेंस्की, जो कि तीन साल तक युद्ध का दंश झेल रहे हैं, उन्हें शांति पर किसी से भाषण चाहिए। लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही। पैसे वाली अज्ञानता ने शोर मचाकर थके हुए अनुभव को भाषण दिया। 

सीएनएन ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों के पास विशेषाधिकार हैं, उन्हें गलत जानकारी फैलाने की सहूलियत है। ओवल ऑफिस में दोनों नेताओं के बीच एक खाई साफ दिखी। एक तरफ एक देश है, जहां युद्ध में गए लोग, दोस्त, परिवारवाले शायद कभी अपने घर न लौट पाएं। दूसरी तरफ एक देश है, जो इस बात पर चिढ़ा है कि उसकी भेजी गई मदद को लेकर ढंग से शुक्रिया नहीं कहा गया। 

(iii) द अटलांटिक
अमेरिकी मीडिया ग्रुप द अटलांटिक ने लिखा, "ट्रंप और जेलेंस्की के बीच वाकयुद्ध से फैली नकारात्मकता के बीच एक सकारात्मक चीज भी हुई। पूरी दुनिया ने देख लिया है कि डोनाल्ड ट्रंप की झूठी दोस्ती के पीछे क्या है। यूक्रेन के लिए यह और बुरा होता, अगर जेलेंस्की पर बंद दरवाजों के पीछे दबाव बनाया जाता।"

अटलांटिक के पत्रकार डेविड फ्रम ने कहा, "ओवल ऑफिस में जो कुछ हुआ उससे ट्रंप प्रशासन के वो सारे दावे हवा हो गए, जिसमें कहा जाता है कि वे अमेरिकी हितों के लिए काम कर रहे हैं। कैमरों में निजी तौर पर नफरत कैद हो गई, जिसका अमेरिकी हितों की रक्षा से कोई लेना देना नहीं है।"

2. रूसी मीडिया

(i) रशिया टुडे
रूस की वेबसाइट रशिया टुडे ने पुतिन और जेलेंस्की के बीच बहस पर अपनी वेबसाइट में एक पूरा विश्लेषण छापा। इसमें ग्लोबल अफेयर्स के एडिटर-इन-चीफ फ्योडोर लुक्यानोव ने लिखा कि वोलोदिमीर जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से अमेरिकी राजनीति में हुए बदलाव को ठीक ढंग से नहीं आंका। वह इस बात को नहीं समझ पाए कि तीन साल तक युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों में किसी ने भी यूक्रेन के प्रतिनिधि के खिलाफ बयान नहीं दिया, बल्कि खुद जेलेंस्की और उनके साथियों को कुछ भी बोलने की आजादी थी। यह सब सिर्फ इसलिए किया गया, क्योंकि पश्चिम उन्हें पीड़ित मानता था और इसीलिए उन्हें अधिकार थे। लेकिन इसी चीज ने उन पर भद्दा मजाक किया। 

बहस के दौरान ट्रंप ने एक बात साफ कर दी कि वह सिर्फ मध्यस्थ हैं, न कि किसी के पक्ष में। उन्होंने कहा कि वह युद्ध खत्म करना चाहते हैं। यह पारंपरिक कूटनीति है, जो कि युद्ध खत्म करने के लिए जरूरी है। यह अमेरिका की नीति में भी मौलिक बदलाव है। जेलेंस्की के समर्थक इस नीति का विरोध करते हैं और जीत की उम्मीद करते हैं, जो कि हासिल नहीं की जा सकती। 

वहीं, एचएसई यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार अनस्तासिया लिखशेवा ने कहा कि दुनिया ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय से ऐसा कुछ नहीं देखा, सिवाय रिएलिटी टीवी शो के। यह बिल्कुल पुराने टीवी शो- द अप्रेंटिस की याद दिलाता है।

(ii). स्पूतनिक, TASS, RIA नोवोस्ती और अन्य टीवी चैनल
स्पूतनिक, तास और रिया नोवोस्ती ने अपने एक्स हैंडल पर ट्रंप-जेलेंस्की की बैठक पर जबरदस्त तंज कसे। इस दौरान इन चैनलों ने जेलेंस्की पर कई मीम्स भी साझा किए। इन एजेंसियों ने जेलेंस्की को निशाने पर लेते हुए रूसी अधिकारियों के बयानों पर बात की। 

वहीं, रूसी टीवी चैनलों ने ट्रंप की तरफ से जेलेंस्की को खरी-खरी सुनाने की कई क्लिप्स पोस्ट कीं। चैनलों ने दावा किया कि ट्रंप युद्ध रोकने की अपनी कोशिशों के बावजूद यूक्रेन का साथ न मिलने से तंग आ गए।

3. यूरोपीय मीडिया

(i) द गार्डियन
ट्रंप-मस्क के बीच तीखी बहस पर द गार्डियन ने चिंता जताई। इसके एक लेख में कहा गया कि ट्रंप ने शुक्रवार को सबसे बड़ी कूटनीतिक आपदा का नेतृत्व किया। बैठक में आवाजें ऊंची हुईं और प्रोटोकॉल्स की धज्जियां उड़ा दी गईं। एक डरे हुए यूरोप ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने वैश्विक ढांचे को ढहते देखा

इससे पहले कभी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने दुश्मनों तक को इस तरह धमकाया या खरी-खरी नहीं सुनाई थीं। जाहिर तौर पर एक रिएलिटी टीवी स्टार और रेसलिंग के फैन से अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने समर्थकों का दायरा बढ़ाने के लिए इसे टीवी पर ही जारी रहने दिया। उस समर्थकों के दायरे में अब क्रेमलिन भी शामिल हो गया है। 

(iii) ले मोंडे, फ्रांस
ट्रंप-जेलेंस्की के बीच उठे विवाद पर फ्रांस के अखबार ले मोंडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अखबार ने कहा कि ट्रंप ने यूक्रेन और यूरोप के अपने सहयोगी देशों को अमेरिकी नीति में अचानक से लिए यू-टर्न से सतर्क कर दिया है। ले मोंडे ने व्हाइट हाउस में हुए घटनाक्रम को 'ड्रामा' करार देते हुए कहा कि इसके ठीक बाद यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेन के प्रति समर्थन जताया। 

(iv). रॉयटर्स
जेलेंस्की ने ओवल ऑफिस में होने वाली बैठक में ट्रंप को मनाने की उम्मीद की थी, ताकि वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पक्ष न लें। लेकिन इसकी जगह ट्रंप और जेडी वैंस ने जेलेंस्की को घेर लिया। इससे दोनों देशों के रिश्तों में एक नई गिरावट देखी गई है। 

रॉयटर्स ने बताया कि यूक्रेनी सेना इस मौके पर अपने नेता जेलेंस्की के साथ खड़ी है। इसी तरह यूक्रेन की जनता भी अपने नेतृत्व के साथ ही है, लेकिन वह अमेरिका की तरफ सैन्य मदद जारी न रहने की बात से चिंतिंत हैं। 

 

3. यूक्रेनी मीडिया

(i) कीव इंडिपेंडेंट

वोलोदिमीर जेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बहस पर यूक्रेनी वेबसाइट कीव इंडिपेंडेंट ने कहा कि इसे स्पष्ट तौर पर कहना होगा कि अमेरिकी नेतृत्व ने पाला बदल लिया है। लेकिन अमेरिका के लोगों ने नहीं। और उन्हें अब बोलना होगा। पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी नेतृत्व ने यूक्रेन के खिलाफ खासतौर पर आक्रामकता दर्शाई है और अपनी नीति और बयानों को रूस के पक्ष में किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति वैंस  की तरफ से जेलेंस्की को नीचा दिखाने की कोशिश इसका उदाहरण है। जब जेलेंस्की व्हाइट हाउस से निकले तब ट्रंप ने यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल को भी  निकल जाने को कहा।  

4. अंतरराष्ट्रीय मीडिया 

(i) अल-जजीरा
अल-जजीरा ने कहा कि ट्रंप ने बातचीत के दौरान पुतिन के खिलाफ आक्रामकता के लिए जेलेंस्की पर आरोप लगाए। इतना ही नहीं उन्होंने खुद को मध्यस्थ और शांति लाने वाला भी करार दिया। ट्रंप ने डेमोक्रेट पार्टी के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पर बातचीत के दौरान ही पुतिन को अपने सहयोगी के तौर पर दर्शाने की कोशिश की। बैठक के बाद अब जेलेंस्की लंदन जा रहे हैं, हालांकि अमेरिका-यूक्रेन का गठबंधन अब अधर में है। 


 
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