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भारत-चीन संबंध: वांग यी बोले- हमें साझेदार होना चाहिए; पीएम मोदी के बयान का हवाला देकर सीमा विवाद पर क्या कहा?
Mon, 14 Sep 2026 09:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, बीजिंग
पीटीआई, बीजिंग
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:53 PM IST
सार
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को चीन ने भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विदेश मंत्री वांग यी के अनुसार, दोनों नेताओं ने रणनीतिक और दीर्घकालिक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की तथा इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
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पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर वांग यी का बड़ा बयान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात में सबसे अहम सहमति इस बात पर बनी कि भारत और चीन को साझेदार होना चाहिए।
वांग ने 12-13 सितंबर को शी जिनपिंग की नई दिल्ली यात्रा और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों से जुड़े रणनीतिक, दीर्घकालिक और दिशा तय करने वाले मुद्दों पर खुलकर और गहराई से विचारों का आदान-प्रदान किया।
दोनों नेताओं की मुलाकात पर चीन ने क्या कहा?
चीनी विदेश मंत्री ने रविवार को सरकारी मीडिया से कहा, 'दोनों नेताओं के बीच बनी सबसे महत्वपूर्ण सहमति यह थी कि चीन और भारत को साझेदार होना चाहिए।' वांग के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठा सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, एक-दूसरे को सफल होने में मदद कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
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दोनों देशों के नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। दोनों देश ब्रिक्स की घूर्णन अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन भी करेंगे। वांग ने कहा कि मोदी-शी की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
क्या भारत के साथ चीन सुधार रहा संबंध?
चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे मुश्किल दौर से बाहर आए हैं। संबंधों ने 'फिर से शुरुआत' से 'नई ऊंचाई' की ओर बढ़ना शुरू किया है। दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। व्यापार का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा है और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क भी अधिक सक्रिय हुआ है।
वांग ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में सुधार और विकास का स्वागत दोनों देशों की 2.8 अरब से अधिक आबादी ही नहीं कर रही, बल्कि यह ग्लोबल साउथ में सहयोग मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने राजनीतिक आपसी विश्वास को और मजबूत करने, मतभेदों और विरोधाभासों को उचित तरीके से संभालने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई है।
क्या भारत और चीन के बीच बढ़ेगा सहयोग?
वांग ने कहा कि भारत और चीन के विकास के रास्ते एक-दूसरे के लिए साझा अवसर हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग का असर द्विपक्षीय संबंधों से कहीं आगे तक जाता है और ग्लोबल साउथ तथा पूरी दुनिया के लिए इसका गहरा महत्व है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने और सुधारने में काफी मेहनत लगी है और इस प्रगति को संजोकर रखना चाहिए।
वांग ने उम्मीद जताई कि भारत दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति को अमल में लाने के लिए चीन के साथ काम करेगा। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बने रहना चाहिए और बिना रुकावट या पीछे हटे द्विपक्षीय संबंधों को लगातार आगे बढ़ाना चाहिए।
सीमा विवाद को लेकर भारत के रुख पर क्या बोले वांग यी?
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा विवाद को दोनों देशों के व्यापक संबंधों के संदर्भ में सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। संवाद और सहयोग को प्रमुख दिशा बनाए रखना चाहिए। दोनों देशों को अपने-अपने विकास और राष्ट्रीय पुनरुत्थान की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति एवं साझा समृद्धि में योगदान के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए।
पीएम मोदी से मुलाकात में शी ने कहा था कि चीन और भारत को आपसी सम्मान और समझ की राजनीतिक समझदारी का इस्तेमाल करते हुए उन बाधाओं को दूर करना चाहिए, जो दोनों देशों के संबंधों में रुकावट डालती हैं। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और सीमा मुद्दे पर समानांतर रूप से आगे बढ़ने की बात कही थी, ताकि दोनों प्रक्रियाएं एक-दूसरे को मजबूत करें और सीमा क्षेत्रों में शांति बनी रहे।
पीएम मोदी के किस बयान का दिया हवाला?
वांग के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इसका सकारात्मक जवाब दिया और कहा कि भारत ने हमेशा चीन के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखा है। चीनी विदेश मंत्री के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि भारत चीन के लिए 'प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार' बनने के लिए तैयार है और दोनों देश एक-दूसरे के विकास को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में देखते हैं।
वांग ने पीएम मोदी के हवाले से कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से स्वतंत्र हैं और भारत अपनी जमीन पर किसी भी ताकत को चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर चीन के साथ उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने, रणनीतिक संवाद को गहरा करने और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना है।
वांग यी के बयान पर चीनी विदेश मंत्रालय ने दी क्या प्रतिक्रिया?
वांग की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य की दिशा तय कर दी है। उन्होंने कहा, 'चीन दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण साझा सहमतियों को लागू करने के लिए भारत के साथ काम करेगा।'
गुओ ने कहा कि चीन सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करेगा, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाएगा और बहुपक्षीय मंचों पर और करीबी सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के संबंधों में सुधार और विकास के लिए लगातार प्रयास करेगा और एक-दूसरे के विकास तथा पुनरुत्थान के लिए मजबूत समर्थन देगा, ताकि क्षेत्र और उससे आगे शांति एवं समृद्धि में योगदान किया जा सके।
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वांग ने 12-13 सितंबर को शी जिनपिंग की नई दिल्ली यात्रा और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों से जुड़े रणनीतिक, दीर्घकालिक और दिशा तय करने वाले मुद्दों पर खुलकर और गहराई से विचारों का आदान-प्रदान किया।
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दोनों नेताओं की मुलाकात पर चीन ने क्या कहा?
चीनी विदेश मंत्री ने रविवार को सरकारी मीडिया से कहा, 'दोनों नेताओं के बीच बनी सबसे महत्वपूर्ण सहमति यह थी कि चीन और भारत को साझेदार होना चाहिए।' वांग के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठा सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, एक-दूसरे को सफल होने में मदद कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
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दोनों देशों के नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। दोनों देश ब्रिक्स की घूर्णन अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन भी करेंगे। वांग ने कहा कि मोदी-शी की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
क्या भारत के साथ चीन सुधार रहा संबंध?
चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे मुश्किल दौर से बाहर आए हैं। संबंधों ने 'फिर से शुरुआत' से 'नई ऊंचाई' की ओर बढ़ना शुरू किया है। दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। व्यापार का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा है और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क भी अधिक सक्रिय हुआ है।
वांग ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में सुधार और विकास का स्वागत दोनों देशों की 2.8 अरब से अधिक आबादी ही नहीं कर रही, बल्कि यह ग्लोबल साउथ में सहयोग मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने राजनीतिक आपसी विश्वास को और मजबूत करने, मतभेदों और विरोधाभासों को उचित तरीके से संभालने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई है।
क्या भारत और चीन के बीच बढ़ेगा सहयोग?
वांग ने कहा कि भारत और चीन के विकास के रास्ते एक-दूसरे के लिए साझा अवसर हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग का असर द्विपक्षीय संबंधों से कहीं आगे तक जाता है और ग्लोबल साउथ तथा पूरी दुनिया के लिए इसका गहरा महत्व है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने और सुधारने में काफी मेहनत लगी है और इस प्रगति को संजोकर रखना चाहिए।
वांग ने उम्मीद जताई कि भारत दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति को अमल में लाने के लिए चीन के साथ काम करेगा। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बने रहना चाहिए और बिना रुकावट या पीछे हटे द्विपक्षीय संबंधों को लगातार आगे बढ़ाना चाहिए।
सीमा विवाद को लेकर भारत के रुख पर क्या बोले वांग यी?
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा विवाद को दोनों देशों के व्यापक संबंधों के संदर्भ में सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। संवाद और सहयोग को प्रमुख दिशा बनाए रखना चाहिए। दोनों देशों को अपने-अपने विकास और राष्ट्रीय पुनरुत्थान की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति एवं साझा समृद्धि में योगदान के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए।
पीएम मोदी से मुलाकात में शी ने कहा था कि चीन और भारत को आपसी सम्मान और समझ की राजनीतिक समझदारी का इस्तेमाल करते हुए उन बाधाओं को दूर करना चाहिए, जो दोनों देशों के संबंधों में रुकावट डालती हैं। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और सीमा मुद्दे पर समानांतर रूप से आगे बढ़ने की बात कही थी, ताकि दोनों प्रक्रियाएं एक-दूसरे को मजबूत करें और सीमा क्षेत्रों में शांति बनी रहे।
पीएम मोदी के किस बयान का दिया हवाला?
वांग के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इसका सकारात्मक जवाब दिया और कहा कि भारत ने हमेशा चीन के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखा है। चीनी विदेश मंत्री के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि भारत चीन के लिए 'प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार' बनने के लिए तैयार है और दोनों देश एक-दूसरे के विकास को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में देखते हैं।
वांग ने पीएम मोदी के हवाले से कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से स्वतंत्र हैं और भारत अपनी जमीन पर किसी भी ताकत को चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर चीन के साथ उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने, रणनीतिक संवाद को गहरा करने और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना है।
वांग यी के बयान पर चीनी विदेश मंत्रालय ने दी क्या प्रतिक्रिया?
वांग की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य की दिशा तय कर दी है। उन्होंने कहा, 'चीन दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण साझा सहमतियों को लागू करने के लिए भारत के साथ काम करेगा।'
गुओ ने कहा कि चीन सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करेगा, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाएगा और बहुपक्षीय मंचों पर और करीबी सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के संबंधों में सुधार और विकास के लिए लगातार प्रयास करेगा और एक-दूसरे के विकास तथा पुनरुत्थान के लिए मजबूत समर्थन देगा, ताकि क्षेत्र और उससे आगे शांति एवं समृद्धि में योगदान किया जा सके।