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भारत-न्यूजीलैंड नौसैनिक संबंध: क्या 2027 में पहली बार होगा संयुक्त अभ्यास, क्या बढ़ेगा समुद्री सहयोग?
Tue, 15 Sep 2026 02:25 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेलिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:25 AM IST
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नौसेना प्रमुख का न्यूजीलैंड दौरा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/नौसेना प्रवक्ता/एक्स
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने न्यूजीलैंड दौरे के दौरान अपने समकक्ष से अहम बातचीत की। इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना था। दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर और सैन्य स्तर पर संबंध भी बेहतर किए जाएंगे।
दोनों नौसेना प्रमुखों में क्या बात हुई?
एडमिरल स्वामीनाथन और न्यूजीलैंड की रॉयल नेवी के प्रमुख रियर एडमिरल गैरीन गोल्डिंग ने बातचीत की। इस दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। समुद्र में संयुक्त गतिविधियां बढ़ाने की बात भी हुई। समुद्री जानकारी को एक-दूसरे के साथ ज्यादा साझा करने पर भी जोर दिया गया।
2027 में क्या होगा?
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौते के आधार पर साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों नौसेना प्रमुखों ने 2027 में पहली बार होने वाले द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास को लेकर भी बात की। समुद्री जानकारी के बेहतर आदान-प्रदान के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
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दौरा कब शुरू हुआ?
एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने 9 सितंबर को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा शुरू किया था। उन्होंने सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग को मजबूत करना था। इसके बाद वह न्यूजीलैंड पहुंचे। यहां भारत और रॉयल न्यूजीलैंड नेवी के बीच समुद्री सहयोग और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
न्यूजीलैंड में कैसे हुआ स्वागत?
ऑकलैंड के डेवोनपोर्ट नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना प्रमुख का पारंपरिक माओरी तरीके से स्वागत किया गया। यह स्वागत एचएमएनजेडएस फिलोमेल के ते ताउआ मोआना मारे में हुआ। माओरी समुदाय के इस पारंपरिक स्वागत को 'पोव्हिरी' कहा जाता है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह सम्मान और स्वागत का खास तरीका है। यह रॉयल न्यूजीलैंड नेवी की पहचान का भी अहम हिस्सा है।
इसके बाद क्या हुआ?
पारंपरिक स्वागत के बाद रॉयल न्यूजीलैंड नेवी ने एडमिरल स्वामीनाथन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह कार्यक्रम एचएमएनजेडएस फिलोमेल में हुआ। इसे न्यूजीलैंड की नौसेना का 'घर' भी कहा जाता है।
इस समारोह में दोनों देशों की नौसेनाओं के पुराने संबंधों की झलक भी दिखी। एचएमएनजेडएस एचिलीज का 6 इंच का पुराना तोप टावर इसका खास उदाहरण है। यह युद्धपोत बाद में भारतीय नौसेना में आईएनएस दिल्ली के नाम से शामिल हुआ था। यह दोनों नौसेनाओं के पुराने रिश्ते की एक अहम कड़ी है।
ये भी पढ़ें: क्या रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकेगा यूक्रेन?: जेलेंस्की ने शर्त रखी; क्या पुतिन देंगे सुरक्षा की गारंटी?
दौरे से क्या मजबूत होगा?
भारतीय नौसेना ने कहा कि यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूत करता है। दोनों नौसेनाएं समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही सैन्य स्तर पर आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर है।
यह सहयोग भारत सरकार के 'महासागर' दृष्टिकोण के तहत भी है। इसका मतलब अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को मिलकर आगे बढ़ाना है। भारत क्षेत्र में समुद्री साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
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दोनों नौसेना प्रमुखों में क्या बात हुई?
एडमिरल स्वामीनाथन और न्यूजीलैंड की रॉयल नेवी के प्रमुख रियर एडमिरल गैरीन गोल्डिंग ने बातचीत की। इस दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। समुद्र में संयुक्त गतिविधियां बढ़ाने की बात भी हुई। समुद्री जानकारी को एक-दूसरे के साथ ज्यादा साझा करने पर भी जोर दिया गया।
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2027 में क्या होगा?
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौते के आधार पर साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों नौसेना प्रमुखों ने 2027 में पहली बार होने वाले द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास को लेकर भी बात की। समुद्री जानकारी के बेहतर आदान-प्रदान के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
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दौरा कब शुरू हुआ?
एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने 9 सितंबर को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा शुरू किया था। उन्होंने सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग को मजबूत करना था। इसके बाद वह न्यूजीलैंड पहुंचे। यहां भारत और रॉयल न्यूजीलैंड नेवी के बीच समुद्री सहयोग और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
न्यूजीलैंड में कैसे हुआ स्वागत?
ऑकलैंड के डेवोनपोर्ट नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना प्रमुख का पारंपरिक माओरी तरीके से स्वागत किया गया। यह स्वागत एचएमएनजेडएस फिलोमेल के ते ताउआ मोआना मारे में हुआ। माओरी समुदाय के इस पारंपरिक स्वागत को 'पोव्हिरी' कहा जाता है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह सम्मान और स्वागत का खास तरीका है। यह रॉयल न्यूजीलैंड नेवी की पहचान का भी अहम हिस्सा है।
इसके बाद क्या हुआ?
पारंपरिक स्वागत के बाद रॉयल न्यूजीलैंड नेवी ने एडमिरल स्वामीनाथन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह कार्यक्रम एचएमएनजेडएस फिलोमेल में हुआ। इसे न्यूजीलैंड की नौसेना का 'घर' भी कहा जाता है।
इस समारोह में दोनों देशों की नौसेनाओं के पुराने संबंधों की झलक भी दिखी। एचएमएनजेडएस एचिलीज का 6 इंच का पुराना तोप टावर इसका खास उदाहरण है। यह युद्धपोत बाद में भारतीय नौसेना में आईएनएस दिल्ली के नाम से शामिल हुआ था। यह दोनों नौसेनाओं के पुराने रिश्ते की एक अहम कड़ी है।
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दौरे से क्या मजबूत होगा?
भारतीय नौसेना ने कहा कि यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूत करता है। दोनों नौसेनाएं समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही सैन्य स्तर पर आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर है।
यह सहयोग भारत सरकार के 'महासागर' दृष्टिकोण के तहत भी है। इसका मतलब अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को मिलकर आगे बढ़ाना है। भारत क्षेत्र में समुद्री साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।