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US Tariff: 'ट्रंप का टैरिफ गैरकानूनी', अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से सुनाया बड़ा फैसला

Fri, 20 Feb 2026 11:29 PM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 20 Feb 2026 11:29 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ फैसला आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।

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US Supreme Court deals major blow to Donald Trump says tariffs are illegal President has no authority
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर मिली बड़ी हार माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप की ओर से आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत एकतरफा रूप से लगाए गए टैरिफ पर केंद्रित है, जिसमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक टैरिफ भी शामिल हैं।
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अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामानों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
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बहुमत से ट्रंप के टैरिफ को दिया झटका
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खत्म कर दिया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार, व्यवसायों, उपभोक्ताओं, मुद्रास्फीति के रुझानों और देश भर के घरेलू वित्त पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉन जी रॉबर्ट्स जूनियर ने बहुमत का फैसला लिखा और जस्टिस सोनिया सोतोमेयर, जस्टिस नील एम. गोरसच, जस्टिस एलेना कागन, जस्टिस एमी कोनी बैरेट और जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने उनका समर्थन किया। जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने असहमति का मत दाखिल किया और जस्टिस ब्रेट एम. कावानाघ और जस्टिस सैमुअल ए. एलिटो जूनियर ने उनका समर्थन किया।

जजों के बहुमत ने पाया कि संविधान स्पष्ट रूप से सिर्फ कांग्रेस को कर लगाने का अधिकार देता है, जिसमें शुल्क भी शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में कहा, संविधान निर्माताओं ने कर लगाने की शक्ति का कोई भी हिस्सा कार्यपालिका को नहीं सौंपा। और यह तथ्य कि किसी भी राष्ट्रपति को आईईईपीए में ऐसी शक्ति नहीं मिली है, इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह मौजूद ही नहीं है।

हालांकि असहमति के फैसले में जस्टिस कावानाघ ने कहा, यहां जिन टैरिफ पर सवाल उठ रहे हैं, वे समझदारी भरी नीति हो भी सकते हैं और नहीं भी। लेकिन लिखित रूप से, इतिहास में और पूर्व उदाहरणों के आधार पर, वे स्पष्ट रूप से वैध हैं।

जब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉन जी रॉबर्ट्स जूनियर ने पीठ का बहुमत का फैसला पढ़ा, तो ट्रंप प्रशासन का पक्ष रखने वाले सॉलिसिटर जनरल डी जॉन सॉयर लगभग भावहीन होकर उन्हें देखते रहे। न्यायाधीशों के सामने मेज पर बैठे सॉयर के हाथ जुड़े हुए थे, और रॉबर्ट्स जैसे-जैसे फैसला पढ़ रहे थे उनकी उंगलियां हल्की-हल्की फड़फड़ा रही थीं। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने अदालत से टैरिफ रद्द किए जाने के बाद अन्य कानूनी उपाय अपनाने की बात कही है।

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टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, कांग्रेस को
अमेरिकी संविधान के अनुसार, कर और शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को हासिल है। हालांकि ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ही, अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति कानून (आईईईपीए) लागू करने हुए लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क लगा दिया। आईईईपीए सिर्फ राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति को वाणिज्य को विनियमित करने का अधिकार देता है। ट्रंप ने अन्य कानूनों के तहत भी कुछ अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं, जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। अक्तूबर से मध्य दिसंबर तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ये शुल्क ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों से प्राप्त राजस्व का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।

134 अरब अमेरिकी डॉलर का वसूला टैरिफ
इस फैसले के वित्तीय परिणाम काफी व्यापक हैं। विवादित टैरिफ खरबों डॉलर के व्यापार को प्रभावित करते हैं और अमेरिकी सरकार ने विवादित प्राधिकरण के तहत 14 दिसंबर तक लगभग 134 अरब अमेरिकी डॉलर का शुल्क एकत्र किया था।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक टैक्स फाउंडेशन के अनुमानों के अनुसार ट्रंप के व्यापार युद्ध के कारण 2025 में प्रत्येक अमेरिकी परिवार को लगभग 1,100 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। यह फैसला अमेरिका और भारत द्वारा पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है।

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