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यूक्रेन में मीडिया के दमन का अमेरिका ने किया समर्थन, दोहरे मानदंड के लगे आरोप
Thu, 04 Feb 2021 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 04 Feb 2021 04:05 PM IST
सार
रूस में सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा है कि ये कदम वैसा ही जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अपने यहां फॉक्स न्यूज और न्यूजमैक्स को प्रतिबंधित कर दें, जो रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं...
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंसकी
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
यूक्रेन में विपक्षी टीवी चैनलों पर लगाई गई पाबंदी का समर्थन कर अमेरिका सवालों से घिर गया है। खास कर रूस में सोशल मीडिया पर इसे अमेरिका के दोहरे मानदंड के रूप में पेश किया है। रूसी सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा है कि इस रुख के साथ अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थक होने का अमेरिकी दावा संदिग्ध हो जाता है। गौरतलब है कि यूरोपियन यूनियन ने इन पाबंदियों की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इस कदम का असर अभिव्यक्ति की आजादी पर पड़ेगा।
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यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि ‘रूस के दुर्भावनापूर्ण असर को रोकने की कोशिशों का अमेरिका समर्थन करता है। जिन प्रसारणों को रोकने का फैसला हुआ है, वह कदम यूक्रेन के कानून के तहत है। यूक्रेन ने ये कदम अपनी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए उठाया है।’ अमेरिकी दूतावास ने कहा- संप्रभु देशों के खिलाफ दुष्प्रचार को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल को रोकने के लिए हमें मिल कर काम करना होगा।
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इसके पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की ने एक आदेश पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत आठ समाचार संस्थानों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई। इस कदम की सिफारिश देश की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद ने की थी। ये सभी समाचार संस्थान यूक्रेन में ही स्थित हैं। उनका स्वामित्व भी यूक्रेन के नागरिकों के हाथ में है। विश्लेषकों का कहना है कि ये संस्थान यूक्रेन के कानून और नियमों के तहत चलाए जा रहे थे। इसलिए ये दावा संदिग्ध है कि वे रूसी दुष्प्रचार का माध्यम थे।
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जिन मीडिया संस्थानों को बंद किया गया है, उनमें एक के मालिक निर्वाचित सांसद तारास कोजाक हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन संस्थानों का संबंध देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता विक्तर मेदवेदचुक से है। सरकार ने इस पार्टी पर भी झूठ का प्रचार करने का आरोप लगाया है। मेदवेदचुक ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि विपक्ष समर्थक मीडिया को बंद करना पूरी तरह गैर कानूनी है।
यह असहमति को हिंसा और जोर-जबरदस्ती से दबाने की कोशिश जैसा है। मेदवेदचुक ने कहा कि ये कदम उस समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति जेलेन्स्की की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। साथ ही राष्ट्रपति को कोविड-19 महामारी का वैक्सीन लाने में विफलता के कारण विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को ही एक विपक्षी सांसद ने एलान किया कि मीडिया के दमन के आरोप में वे संसद में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करेंगे।
यूरोपियन यूनियन ने बुधवार को यूक्रेन सरकार के इस कदम के बुनियादी मानव अधिकारों पर हो सकने वाले असर को लेकर दुनिया को आगाह किया। ईयू के विदेश राजनयिक सेवा प्रवक्ता पीटर स्टेनो ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता की कीमत पर दुष्प्रचार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। ऐसी कोशिश मूलभूत अधिकारों और स्वतंत्रताओं का पालन करते हुए और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
इस कदम पर एक हैरतअंगेज प्रतिक्रिया राष्ट्रपति के पिता अलेसांद्र जेलेन्स्की की तरफ आई। उन्होंने कहा कि वे वो चैनल ही देखते थे, जिसे उनके बेटे ने प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने बेटे के कदम को लेकर वे चिंतित हैं। उधर रूस में सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा है कि ये कदम वैसा ही जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अपने यहां फॉक्स न्यूज और न्यूजमैक्स को प्रतिबंधित कर दें, जो रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं। इसे वहां विपक्ष की आवाज दबाना ही कहा जाएगा। लेकिन यूक्रेन में बाइडन प्रशासन ने ऐसे ही एक कदम का समर्थन किया है।