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अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप से ओपीटी कार्यक्रम खत्म करने की अपील की, कहा- हमारे युवाओं के रोजगार पर पड़ रहा असर
Wed, 15 Apr 2026 10:08 AM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 15 Apr 2026 10:08 AM IST
सार
सीनेटर स्कॉट ने राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन के उस कदम का स्वागत किया, जिसमें इस प्रोग्राम में बदलाव की तैयारी की बात कही गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे अमेरिकी नौकरियों और परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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अमेरिकी सीनेटर
- फोटो : IANS
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विस्तार
अमेरिका में विदेशी छात्रों से जुड़े एक अहम वर्क परमिट कार्यक्रम को लेकर सियासत तेज हो गई है। रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी)' प्रोग्राम को खत्म करने की अपील की। उनका दावा है कि यह योजना अमेरिकी युवाओं के रोजगार पर असर डाल रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है, खासकर चीन के संदर्भ में।
सीनेटर स्कॉट ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे पत्र में कहा कि यह कार्यक्रम तुरंत ध्यान देने वाला मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी छात्रों को मिलने वाले ये वर्क परमिट न सिर्फ अमेरिकी ग्रेजुएट्स के नौकरी के अवसर कम करते हैं, बल्कि इनका दुरुपयोग भी हो रहा है। स्कॉट ने खासतौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक 'स्वयं घोषित दुश्मन देश' है, जो इस व्यवस्था का फायदा उठा सकता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका में युवा ग्रेजुएट्स की नौकरी की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। पहले नए ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर आम लोगों से कम होती थी, लेकिन 2020 के बाद से यह स्थिति बदल गई है। खासकर एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) क्षेत्र में हालात और चिंताजनक बताए गए हैं। उनके मुताबिक, कंप्यूटर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर आम दर से लगभग दोगुनी है, जबकि कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स में यह 50 प्रतिशत ज्यादा है।
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सीनेटर रिक स्कॉट ने दावा किया कि ओपीटी प्रोग्राम इस समस्या को और बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, इस समय 5 लाख से ज्यादा छात्र वीजा धारकों के पास ओपीटी वर्क परमिट हैं, जो उन्हें पढ़ाई के बाद भी अमेरिका में काम करने और अमेरिकी युवाओं से प्रतिस्पर्धा करने के मौके देता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सीनेटर स्कॉट ने कहा कि यह सिस्टम जासूसी और तकनीकी जानकारी के ट्रांसफर के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 33,000 चीनी नागरिक एसटीईएम ओपीटी के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं, जिनमें से कई विश्वविद्यालयों और बड़ी टेक कंपनियों में काम करते हैं, जहां उन्हें संवेदनशील तकनीकी जानकारी तक पहुंच मिलती है।
इसके अलावा, सीनेटर स्कॉट ने कहा कि ओपीटी प्रोग्राम का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है और यह केवल नियमों के जरिए बनाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसटीईएम ओपीटी विस्तार, एच-1बी वीजा की सीमाओं को दरकिनार करने का एक तरीका है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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सीनेटर स्कॉट ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे पत्र में कहा कि यह कार्यक्रम तुरंत ध्यान देने वाला मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी छात्रों को मिलने वाले ये वर्क परमिट न सिर्फ अमेरिकी ग्रेजुएट्स के नौकरी के अवसर कम करते हैं, बल्कि इनका दुरुपयोग भी हो रहा है। स्कॉट ने खासतौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक 'स्वयं घोषित दुश्मन देश' है, जो इस व्यवस्था का फायदा उठा सकता है।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका में युवा ग्रेजुएट्स की नौकरी की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। पहले नए ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर आम लोगों से कम होती थी, लेकिन 2020 के बाद से यह स्थिति बदल गई है। खासकर एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) क्षेत्र में हालात और चिंताजनक बताए गए हैं। उनके मुताबिक, कंप्यूटर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर आम दर से लगभग दोगुनी है, जबकि कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स में यह 50 प्रतिशत ज्यादा है।
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सीनेटर रिक स्कॉट ने दावा किया कि ओपीटी प्रोग्राम इस समस्या को और बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, इस समय 5 लाख से ज्यादा छात्र वीजा धारकों के पास ओपीटी वर्क परमिट हैं, जो उन्हें पढ़ाई के बाद भी अमेरिका में काम करने और अमेरिकी युवाओं से प्रतिस्पर्धा करने के मौके देता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सीनेटर स्कॉट ने कहा कि यह सिस्टम जासूसी और तकनीकी जानकारी के ट्रांसफर के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 33,000 चीनी नागरिक एसटीईएम ओपीटी के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं, जिनमें से कई विश्वविद्यालयों और बड़ी टेक कंपनियों में काम करते हैं, जहां उन्हें संवेदनशील तकनीकी जानकारी तक पहुंच मिलती है।
इसके अलावा, सीनेटर स्कॉट ने कहा कि ओपीटी प्रोग्राम का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है और यह केवल नियमों के जरिए बनाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसटीईएम ओपीटी विस्तार, एच-1बी वीजा की सीमाओं को दरकिनार करने का एक तरीका है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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