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आतंक पर लगाम लगाने में नाकाम पाक, अब भी पल रहे लश्कर-जैश जैसे संगठन: अमेरिका

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Updated Sat, 02 Nov 2019 12:57 PM IST
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हाफिज सईद (फाइल फोटो)
हाफिज सईद (फाइल फोटो)
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 भारत पर हमलों के गुनहगार लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने में पाकिस्तान की इमरान खान सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। ये संगठन अब भी पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे हैं और दूसरे देशों में हमलों को अंजाम देने के लिए आतंकियों की भर्ती कर रहे हैं। एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में पाक सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा गया है कि ये आतंकी संगठन पाकिस्तान की जमीन पर न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि वे आतंकियों की भर्ती कर रहे हैं और फंड जुटा रहे हैं।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय की आतंकवाद पर सालाना रिपोर्ट, 2018 के मुताबिक, इमरान सरकार आतंकवाद के वित्त पोषण पर रोक नहीं लगा सकी है। पाक में अब भी कई ऐसे संगठन हैं जो विदेशी धरती पर हमले की साजिश रचते रहते हैं। लश्कर के कुछ लोगों को पाक के आम चुनावों में उतरने का मौका भी दिया गया था। पाक सरकार और फौज ने आतंकियों के ठिकानों पर असंगत रूप से कार्रवाई की। उसकी कार्रवाई महज दिखावा है।

पाक अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच वार्ता का हिमायती होने की बात करता है, मगर अपने देश में हक्कानी नेटवर्क जैसे खतरनाक आतंकी संगठन को पनपने दे रहा है। यह संगठन अमेरिका और अफगानिस्तान सरकार के लिए खतरा हैं। आतंक के वित्त पोषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित लश्कर और उससे जुडे़ संगठनों को धन मुहैया कराए जाने पर रोक लगाने की बात कही थी, मगर पाक में बदस्तूर इन संगठनों को पैसे मुहैया कराए गए। 

पाक को झटका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं होगी कश्मीर पर चर्चा
संयुक्त राष्ट्र। कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की नापाक कोशिश करने वाले पाकिस्तान को फिर झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने साफ किया है कि नवंबर में कश्मीर मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी। ब्रिटेन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद(यूएनएससी) की मौजूदा अध्यक्ष केरन पीयर्स ने कहा, फिलहाल दुनिया में कई और तरह के मसले चल रहे हैं। कश्मीर पर पहले भी चर्चा हो चुकी है। पीयर्स ने कहा, इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है और किसी सदस्य ने ऐसी मीटिंग की मांग भी नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शीर्ष 15 देशों में नवंबर के लिए ब्रिटेन को अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।

 
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