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US: डोनाल्ड ट्रंप के दावे को खारिज करने की अपील, विपक्षी वकील ने कहा- अमेरिकी संविधान ने नहीं दी है इजाजत
Sun, 31 Dec 2023 03:30 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sun, 31 Dec 2023 03:30 AM IST
सार
विशेष वकील जैक स्मिथ ने अदालत में तर्क दिया कि अमेरिकी संविधान और अमेरिका का कानून पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए की गई कार्रवाई के लिए आपराधिक आरोपों से पूर्ण छूट देने का समर्थन नहीं करता। राष्ट्रपतियों को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
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डोनाल्ड ट्रंप(फाइल)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
अमेरिका में इन दिनों राजनीतिक खींचतान जारी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस बीच अमेरिका के अभियोजकों ने संघीय अदालत से अपील की है कि वह ट्रंप के दावे को खारिज कर दें। ट्रंप ने अमेरिकी कानूनों का हवाला देते हुए दावा किया था कि 2020 के चुनावों में अपनी हार को पलटने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
विशेष वकील जैक स्मिथ ने अदालत में तर्क दिया कि अमेरिकी संविधान और अमेरिका का कानून पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए की गई कार्रवाई के लिए आपराधिक आरोपों से पूर्ण छूट देने का समर्थन नहीं करता। राष्ट्रपतियों को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता। वहीं, ट्रंप के वकीलों ने 23 दिसंबर को दायर याचिका में कहा है कि आधिकारिक जिम्मेदारियों से संबंधित आचरण के लिए आरोप लगाना राष्ट्रपति पद को कमजोर बनाता है। नौ जनवरी को तीन न्यायाधीशों की एक बेंच मामले की सुनवाई करेगी।
जानिए क्या है पूरा मामला
बता दें कि अमेरिका में साल 2020 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हार हुई थी। ट्रंप ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था। इसके बाद ट्रंप समर्थकों ने कैपिटल हिल का घेराव कर वहां तोड़-फोड़ की थी। इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी समेत पांच लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच में ट्रंप को भीड़ को भड़काने का दोषी पाया गया है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की सिफारिश की गई थी।
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विशेष वकील जैक स्मिथ ने अदालत में तर्क दिया कि अमेरिकी संविधान और अमेरिका का कानून पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए की गई कार्रवाई के लिए आपराधिक आरोपों से पूर्ण छूट देने का समर्थन नहीं करता। राष्ट्रपतियों को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता। वहीं, ट्रंप के वकीलों ने 23 दिसंबर को दायर याचिका में कहा है कि आधिकारिक जिम्मेदारियों से संबंधित आचरण के लिए आरोप लगाना राष्ट्रपति पद को कमजोर बनाता है। नौ जनवरी को तीन न्यायाधीशों की एक बेंच मामले की सुनवाई करेगी।
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जानिए क्या है पूरा मामला
बता दें कि अमेरिका में साल 2020 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हार हुई थी। ट्रंप ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था। इसके बाद ट्रंप समर्थकों ने कैपिटल हिल का घेराव कर वहां तोड़-फोड़ की थी। इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी समेत पांच लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच में ट्रंप को भीड़ को भड़काने का दोषी पाया गया है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की सिफारिश की गई थी।
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