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US: ट्रंप बोले- ईरान के साथ नए समझौते से दुनिया में आएगी शांति, ओबामा-बाइडन की गलतियों को सुधारा जाएगा
Tue, 21 Apr 2026 12:25 AM IST
Nirmal Kant
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 21 Apr 2026 12:25 AM IST
सार
US: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संभावित नया समझौता पूर्व राष्ट्रपतियों बराक ओबामा-जो बाइडन के कार्यकाल में तेहरान के साथ किए गए सौदे से बेहतर होगा। उन्होंने पुराने समझौते को देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया और दावा किया कि इससे ईरान को परमाणु क्षमता बढ़ाने का मौका मिला। पढ़िए रिपोर्ट-
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो समझौता किया जा रहा है, वह (पूर्व राष्ट्रपति) बराक ओबामा और जो बाइडन की ओर से किए गए संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) से कहीं बेहतर होगा। यहां जेसीपीओए का मतलब ओबामा और बाइडन के कार्यकाल में ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते से है।
ईरान को नकद दिए गए अरबों डॉलर: ट्रंप
उन्होंने उस पुराने समझौते को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक और सबसे खराब समझौतों में से एक बताया। ट्रंप ने दावा किया कि उस समझौते से ईरान को परमाणु हथियार बनाने का रास्ता मिल सकता था, जिसे उनकी सरकार ने रोका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय ईरान को अरबों डॉलर नकद में दिए गए और यह पैसा अमेरिकी बैंकों से निकाला गया।
ये भी पढ़ें: इस्राइल-लेबनान के बीच वाशिंगटन में होगी दूसरे दौर की बातचीत, संघर्ष खत्म करने पर होगी चर्चा
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ट्रंप के अनुसार, अगर वह समझौता खत्म नहीं किया गया होता, तो पश्चिम एशिया और इस्राइल समेत कई क्षेत्रों में परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ सकता था। उन्होंने कहा कि अगर उनके नेतृत्व में कोई नया समझौता होता है, तो वह पूरी दुनिया में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और पिछली सरकारों की गलतियों को सुधारेगा।
अस्थायी युद्धविराम की समयसीमा पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति?
इससे पहले, ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ जारी दो सप्ताह का संघर्षविराम बुधवार शाम को समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बात की अत्यधिक संभावना नहीं है कि वह इस समय सीमा को आगे बढ़ाएंगे। ट्रंप ने ब्लूमबर्ग को फोन पर दिए इंटरव्यू में बताया कि यह संघर्ष विराम सात अप्रैल की शाम को शुरू हुआ था और इसकी मियाद अब खत्म होने वाली है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं और बिना किसी ठोस नतीजे के इस अस्थायी शांति को जारी रखने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी खराब समझौते के लिए जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा, मुझ पर किसी समझौते के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। हमारे पास दुनियाभर का समय है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को ईरान की शर्तों पर झुकने की कोई जरूरत नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समझौता न होने पर युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया कि अगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो वह निश्चित रूप से संघर्ष के फिर से शुरू कर सकते हैं। उनके इस रुख ने शांति वार्ता की मेज पर बैठे राजनयिकों की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
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ईरान को नकद दिए गए अरबों डॉलर: ट्रंप
उन्होंने उस पुराने समझौते को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक और सबसे खराब समझौतों में से एक बताया। ट्रंप ने दावा किया कि उस समझौते से ईरान को परमाणु हथियार बनाने का रास्ता मिल सकता था, जिसे उनकी सरकार ने रोका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय ईरान को अरबों डॉलर नकद में दिए गए और यह पैसा अमेरिकी बैंकों से निकाला गया।
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ट्रंप के अनुसार, अगर वह समझौता खत्म नहीं किया गया होता, तो पश्चिम एशिया और इस्राइल समेत कई क्षेत्रों में परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ सकता था। उन्होंने कहा कि अगर उनके नेतृत्व में कोई नया समझौता होता है, तो वह पूरी दुनिया में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और पिछली सरकारों की गलतियों को सुधारेगा।
अस्थायी युद्धविराम की समयसीमा पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति?
इससे पहले, ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ जारी दो सप्ताह का संघर्षविराम बुधवार शाम को समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बात की अत्यधिक संभावना नहीं है कि वह इस समय सीमा को आगे बढ़ाएंगे। ट्रंप ने ब्लूमबर्ग को फोन पर दिए इंटरव्यू में बताया कि यह संघर्ष विराम सात अप्रैल की शाम को शुरू हुआ था और इसकी मियाद अब खत्म होने वाली है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं और बिना किसी ठोस नतीजे के इस अस्थायी शांति को जारी रखने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी खराब समझौते के लिए जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा, मुझ पर किसी समझौते के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। हमारे पास दुनियाभर का समय है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को ईरान की शर्तों पर झुकने की कोई जरूरत नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समझौता न होने पर युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया कि अगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो वह निश्चित रूप से संघर्ष के फिर से शुरू कर सकते हैं। उनके इस रुख ने शांति वार्ता की मेज पर बैठे राजनयिकों की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
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