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US: पूर्व राष्ट्रपतियों के बाल चांद पर भेजने की कवायद को बड़ा झटका, मून मिशन पेरेग्रीन-1 में आई तकनीकी खामी
Mon, 08 Jan 2024 11:21 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 08 Jan 2024 11:21 PM IST
सार
अंतरिक्ष से जुड़ी अमेरिकी महत्वाकांक्षा को बड़ा झटका लग सकता है। पेरेग्रीन मिशन-1 में इस्तेमाल हो रहे लैंडर में तकनीकी गड़बड़ी की रिपोर्ट सामने आई है। लैंडर की मदद से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉन एफ कैनेडी का डीएनए चांद की सतह पर भेजा जा रहा था।
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अंतरिक्ष में भेजा गया प्राइवेट मून लैंडर- पेरेग्रीन-वन (वीडियो स्क्रीनशॉट)
- फोटो : social media
विस्तार
विज्ञान और तकनीक से लैस पीढ़ी अंतरिक्ष को एक्सप्लोर करने की महत्वाकांक्षा भी रखती है। इसी कड़ी में अमेरिका से निजी मून लैंडर चांद की तरफ लॉन्च किया गया। हालांकि, पेरेग्रीन- वन नाम के इस मिशन को बड़ा झटका लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका से चांद की सतह पर भेजा गया निजी मून लैंडर- पेरेग्रीन-1 में तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 52 साल के बाद अमेरिका ने पहली बार चांद की सतह चूमने का प्रयास किया है। इससे पहले 1972 में अमेरिकी यान- अपोलो-17 मिशन चांद की सतह पर उतारा गया था।
खबर के मुताबिक अंतरिक्ष जगत में काम करने वाली अमेरिकी कंपनी एस्ट्रोबोटिक पेरेग्रीन-1 का प्रक्षेपण कंट्रोल कर रही है। तकनीकी गड़बड़ी की खबरों पर कंपनी ने कहा, योजना के अनुसार यान अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा, लेकिन वल्कन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग होने के बाद कुछ खामियां सामने आईं। रॉकेट यूनाइटेड लांस एलायंस ने बनाया है। पेरेग्रीन लैंडर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- NASA की तरफ से टेलीमेट्री रिसीव करने लगा, जो योजना का हिस्सा नहीं। लैंडर और नासा के डीप स्पेस नेटवर्क के संपर्क पर और विवरण जुटाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक समस्या के समाधान का प्रयास कर रहे हैं।
कंपनी का कहना है कि पेरेग्रीन का प्रणोदन प्रणाली सफलतापूर्वक एक्टिव हुआ, लेकिन, इसके बाद यह सेफ मोड में चला गया। एस्ट्रोबोटिक की टीम को सिग्नल मिलना बंद हो गया। कंपनी के मुताबिक इस लैंडर पर वैज्ञानिक उपकरणों के साथ-साथ स्टार ट्रेक के कई कलाकारों के अवशेष रखे गए हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति कैनेडी का डीएनए भी चांद की सतह पर भेजा गया है।
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अमेरिका ने 1972 के बाद चांद पर लैंड करने वाला मिशन पूरा नहीं किया है। पांच दशक से भी अधिक पहले अमेरिका ने दो लोगों को चांद की सतह पर उतारा था। अब अगले कुछ साल में आर्टेमिस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर भेजने की योजना बन रही है। इससे पहले प्राइवेट मून लैंडर- पेरेग्रीन-वन भेजा गया है। हालांकि, इसमें नासा नहीं, निजी कंपनी-- एस्ट्रोबोटिक की भूमिका है।
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खबर के मुताबिक अंतरिक्ष जगत में काम करने वाली अमेरिकी कंपनी एस्ट्रोबोटिक पेरेग्रीन-1 का प्रक्षेपण कंट्रोल कर रही है। तकनीकी गड़बड़ी की खबरों पर कंपनी ने कहा, योजना के अनुसार यान अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा, लेकिन वल्कन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग होने के बाद कुछ खामियां सामने आईं। रॉकेट यूनाइटेड लांस एलायंस ने बनाया है। पेरेग्रीन लैंडर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- NASA की तरफ से टेलीमेट्री रिसीव करने लगा, जो योजना का हिस्सा नहीं। लैंडर और नासा के डीप स्पेस नेटवर्क के संपर्क पर और विवरण जुटाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक समस्या के समाधान का प्रयास कर रहे हैं।
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कंपनी का कहना है कि पेरेग्रीन का प्रणोदन प्रणाली सफलतापूर्वक एक्टिव हुआ, लेकिन, इसके बाद यह सेफ मोड में चला गया। एस्ट्रोबोटिक की टीम को सिग्नल मिलना बंद हो गया। कंपनी के मुताबिक इस लैंडर पर वैज्ञानिक उपकरणों के साथ-साथ स्टार ट्रेक के कई कलाकारों के अवशेष रखे गए हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति कैनेडी का डीएनए भी चांद की सतह पर भेजा गया है।
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अमेरिका ने 1972 के बाद चांद पर लैंड करने वाला मिशन पूरा नहीं किया है। पांच दशक से भी अधिक पहले अमेरिका ने दो लोगों को चांद की सतह पर उतारा था। अब अगले कुछ साल में आर्टेमिस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर भेजने की योजना बन रही है। इससे पहले प्राइवेट मून लैंडर- पेरेग्रीन-वन भेजा गया है। हालांकि, इसमें नासा नहीं, निजी कंपनी-- एस्ट्रोबोटिक की भूमिका है।