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तालिबान का बढ़ता खतरा : अफगानिस्तान में बढ़ सकती है अमेरिकी सेना की मौजूदगी

एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 09 Apr 2021 01:13 AM IST

सार

  • पूर्व नौसेना एडमिरल ने सैनिकों की जल्द वापसी को नासमझी बताते हुए कहा कि इस बार वह कहावत चरितार्थ होती दिख रही है कि कई बार फैसला नहीं लेना भी एक बड़ा फैसला होता है।
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अमेरिकी सेना
अमेरिकी सेना - फोटो : social media

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विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना वापस बुलाने के लिए एक मई की समय-सीमा नजदीक आ रही है लेकिन ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन इसके लिए तैयार नहीं हैं।
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इस संबंध में 2009 से 2013 तक नाटो के शीर्ष कमांडर रहे पूर्व नौसेना एडमिरल जेम्स स्टेविडिस ने कहा कि कई बार कोई फैसला न लेना भी फैसला बन जाता है, जो एक मई की समय-सीमा के मामले में सच लगता है।


बता दें कि बाइडन के किसी भी फैसले पर न पहुंचने से अफगानिस्तान में बाकी के 2,500 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर रोक लग सकती है और अमेरिका तालिबान के बढ़ते खतरे से जूझ रही अफगान सेना को समर्थन जारी रख सकता है।

पूर्व नौसेना एडमिरल ने सैनिकों की जल्द वापसी को नासमझी बताते हुए कहा कि इस बार वह कहावत चरितार्थ होती दिख रही है कि कई बार फैसला नहीं लेना भी एक बड़ा फैसला होता है।

अब ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को छह महीने का विस्तार मिल सकता है और तालिबान को अपने वादे पूरे करने के लिए राजी करने की कोशिश की जा सकती है। यह कोशिश अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने की अहम शर्त है। बाइडन पहले ही कह चुके हैं कि एक मई की समय-सीमा को पूरा करना मुश्किल होने जा रहा है।

गोलीबारी की घटनाओं पर लगाम कसने की तैयारी
राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद से अपने पहले बंदूक नियंत्रण उपायों को लेकर कई कार्यकारी कदमों की घोषणा करने वाले हैं। इनका मकसद व्हाइट हाउस द्वारा बंदूक हिंसा को सार्वजनिक स्वास्थ्य महामारी के रूप में घोषित करना होगा।

बाइडन प्रशासन शराब, तंबाकू, आग्नेयास्त्र और विस्फोटक ब्यूरो के निदेशक के तौर पर डेविड चिपमैन को नामित कर सकते हैं। चिपमैन पूर्व संघीय एजेंट और बंदूक नियंत्रण समूह गिफ्फोर्ड में सलाहकार रह चुके हैं। यदि चिपमैन के नाम की पुष्टि होती है तो वह 2015 के बाद से एजेंसी के पहले स्थायी निदेशक होंगे।

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