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ट्रंप ने लगाया 50% टैरिफ: कार्नी ने किया जवाबी कार्रवाई का एलान, क्या बढ़ेगी अमेरिका से व्यापारिक तल्खी?
Sun, 23 Aug 2026 09:51 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, टोरंटो।
पीटीआई, टोरंटो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 23 Aug 2026 09:51 PM IST
सार
ट्रंप के नए 50 फीसदी शुल्क ने अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। कार्नी ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है और अब आठ सितंबर से जवाबी कार्रवाई की तैयारी है।
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अमेरिका-कनाडा में ट्रेट वॉर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चला आ रहा व्यापारिक तनाव अब एक खुली आर्थिक जंग में बदल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर (तकरीबन 1.7 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के सामानों पर भारी-भरकम 50 फीसदी शुल्क लागू कर दिया है।
यह सख्त कदम अमेरिका में हफ्तों से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के शुक्रवार देर रात पूरी तरह टूटने के बाद उठाया गया। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत को रोकते हुए अपने वार्ताकारों को ओटावा वापस बुला लिया। कार्नी ने कहा कि अमेरिका शुल्क में आंशिक राहत के बदले ऐसी अंतिम-क्षण शर्तें थोप रहा था, जो कनाडा के आर्थिक हितों और उसकी संप्रभुता के खिलाफ थीं।
क्या कनाडा भी अमेरिका को देगा जवाब?
अमेरिकी टैरिफ के लागू होते ही प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संसद भवन से सख्त लहजे में जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कनाडा आगामी आठ सितंबर से अमेरिकी वस्तुओं पर 'डॉलर के मुकाबले डॉलर' के हिसाब से बराबर मूल्य की टैरिफ कार्रवाई शुरू करेगा।
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कार्नी ने कहा, 'हम पर हमला हुआ है और जब हमला होता है तो आप संघर्ष की स्थिति में होते हैं। हम अमेरिकी दबाव के आगे झुकेंगे नहीं और इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।' कनाडा का यह पलटवार अमेरिकी स्टील, डेयरी, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उपकरण और विनिर्माण क्षेत्रों को निशाना बनाएगा।
मामले से जुड़ी पांच सबसे खास बातें
आखिर अमेरिका की ऐसी कौन सी शर्त थी?
प्रधानमंत्री कार्नी के अनुसार, वार्ता के अंतिम क्षणों में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कई कठोर शर्तें जोड़ दीं। अमेरिका चाहता था कि कनाडा ओंटारियो में बनने वाले भारी ट्रकों पर शुल्क राहत का दावा न करे और अन्य तीसरे देशों (जैसे चीन या यूरोपीय संघ) के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते करने की अपनी स्वायत्तता को सीमित करे। इसके अलावा, कनाडाई सांस्कृतिक-भाषाई संरक्षण (फ्रेंच भाषा नीतियां) को कमजोर करने का दबाव भी बनाया गया।
कार्नी ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा, 'अमेरिका बहुत अधिक मांग रहा था और बहुत कम दे रहा था।' ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी ओटावा के फैसले का समर्थन किया और कहा कि ऐसी शर्तें मानना कनाडा को आर्थिक रूप से अमेरिका का '51वां राज्य' बना देने जैसा होता।
यह भी पढ़ें: US ही नहीं ईरान भी समझौते के लिए बेचैन: पेजेशकियन बोले- जंग से निकलने का बेहतर रास्ता, क्या बनेगी बात?
कार्नी की पुरानी चेतावनी अब परीक्षा बन गई
जनवरी में दावोस में भाषण देते हुए मार्क कार्नी ने चेतावनी दी थी कि दुनिया की बड़ी ताकतें आर्थिक एकीकरण और आपूर्ति शृंखला को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं। उन्होंने मध्यम-आकार की अर्थव्यवस्थाओं को ऐसे दबावों के खिलाफ आत्मनिर्भर होने की सलाह दी थी। रविवार को ट्रंप ने फिर आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी बाजार के सभी फायदे चाहता है, लेकिन अमेरिका के प्रति निष्ठावान नहीं होना चाहता। उन्होंने कनाडा पर अमेरिकी किसानों और डेयरी उत्पादों पर अकारण भारी टैरिफ लगाने का आरोप भी दोहराया।
कनाडा और अमेरिका के बीच सालाना 880 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है। दोनों देशों का उद्योग एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। कार्नी ने स्वीकार किया है कि पुराना अमेरिका-कनाडा संबंध अब इतिहास बन चुका है। आठ सितंबर से शुरू होने वाली इस टैरिफ जंग से दोनों देशों में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
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यह सख्त कदम अमेरिका में हफ्तों से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के शुक्रवार देर रात पूरी तरह टूटने के बाद उठाया गया। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत को रोकते हुए अपने वार्ताकारों को ओटावा वापस बुला लिया। कार्नी ने कहा कि अमेरिका शुल्क में आंशिक राहत के बदले ऐसी अंतिम-क्षण शर्तें थोप रहा था, जो कनाडा के आर्थिक हितों और उसकी संप्रभुता के खिलाफ थीं।
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क्या कनाडा भी अमेरिका को देगा जवाब?
अमेरिकी टैरिफ के लागू होते ही प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संसद भवन से सख्त लहजे में जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कनाडा आगामी आठ सितंबर से अमेरिकी वस्तुओं पर 'डॉलर के मुकाबले डॉलर' के हिसाब से बराबर मूल्य की टैरिफ कार्रवाई शुरू करेगा।
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कार्नी ने कहा, 'हम पर हमला हुआ है और जब हमला होता है तो आप संघर्ष की स्थिति में होते हैं। हम अमेरिकी दबाव के आगे झुकेंगे नहीं और इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।' कनाडा का यह पलटवार अमेरिकी स्टील, डेयरी, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उपकरण और विनिर्माण क्षेत्रों को निशाना बनाएगा।
मामले से जुड़ी पांच सबसे खास बातें
- अमेरिका ने कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 50% का भारी सीमा शुल्क लागू किया।
- वाशिंगटन में कई दिनों से चल रही अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता शुक्रवार देर रात बेनतीजा खत्म हो गई।
- कनाडा आठ सितंबर से अमेरिकी सामानों पर समान अनुपात (डॉलर-फॉर-डॉलर) में पलटवार करेगा।
- मार्क कार्नी ने अमेरिकी शर्तों को कनाडा की संप्रभुता और सांस्कृतिक पहचान पर हमला बताया।
- ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को अलग-थलग करने के लिए उसके स्वतंत्र वैश्विक व्यापार समझौतों पर रोक लगाने की शर्त रखी थी।
आखिर अमेरिका की ऐसी कौन सी शर्त थी?
प्रधानमंत्री कार्नी के अनुसार, वार्ता के अंतिम क्षणों में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कई कठोर शर्तें जोड़ दीं। अमेरिका चाहता था कि कनाडा ओंटारियो में बनने वाले भारी ट्रकों पर शुल्क राहत का दावा न करे और अन्य तीसरे देशों (जैसे चीन या यूरोपीय संघ) के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते करने की अपनी स्वायत्तता को सीमित करे। इसके अलावा, कनाडाई सांस्कृतिक-भाषाई संरक्षण (फ्रेंच भाषा नीतियां) को कमजोर करने का दबाव भी बनाया गया।
कार्नी ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा, 'अमेरिका बहुत अधिक मांग रहा था और बहुत कम दे रहा था।' ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी ओटावा के फैसले का समर्थन किया और कहा कि ऐसी शर्तें मानना कनाडा को आर्थिक रूप से अमेरिका का '51वां राज्य' बना देने जैसा होता।
यह भी पढ़ें: US ही नहीं ईरान भी समझौते के लिए बेचैन: पेजेशकियन बोले- जंग से निकलने का बेहतर रास्ता, क्या बनेगी बात?
कार्नी की पुरानी चेतावनी अब परीक्षा बन गई
जनवरी में दावोस में भाषण देते हुए मार्क कार्नी ने चेतावनी दी थी कि दुनिया की बड़ी ताकतें आर्थिक एकीकरण और आपूर्ति शृंखला को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं। उन्होंने मध्यम-आकार की अर्थव्यवस्थाओं को ऐसे दबावों के खिलाफ आत्मनिर्भर होने की सलाह दी थी। रविवार को ट्रंप ने फिर आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी बाजार के सभी फायदे चाहता है, लेकिन अमेरिका के प्रति निष्ठावान नहीं होना चाहता। उन्होंने कनाडा पर अमेरिकी किसानों और डेयरी उत्पादों पर अकारण भारी टैरिफ लगाने का आरोप भी दोहराया।
कनाडा और अमेरिका के बीच सालाना 880 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है। दोनों देशों का उद्योग एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। कार्नी ने स्वीकार किया है कि पुराना अमेरिका-कनाडा संबंध अब इतिहास बन चुका है। आठ सितंबर से शुरू होने वाली इस टैरिफ जंग से दोनों देशों में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।