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अमेरिका: डॉक्टरों की कमी के बीच ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, आव्रजन आवेदनों पर लगी रोक हटाई
Fri, 08 May 2026 12:14 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मोंटगोमरी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मोंटगोमरी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 08 May 2026 12:14 PM IST
सार
अमेरिका ने डॉक्टरों के आव्रजन आवेदनों पर लगी रोक आंशिक रूप से हटाई है, जिससे कुछ मामलों की दोबारा समीक्षा शुरू हो सकेगी, लेकिन इन आवेदनों को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर अब भी अनिश्चितता है। विस्तार से पढ़िए रिपोर्ट-
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अमेरिका की आव्रजन नीति में ढील
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
अमेरिका ने डॉक्टरों के लिए आव्रजन (इमिग्रेशन) आवेदनों पर लगाई गई रोक हटा दी है। हालांकि, अन्य आवेदक अभी भी इंतजार में हैं। लीबिया के डॉक्टर फैसल अलघौला को ग्रीन कार्ड का नवीनीकरण करने की जरूरत है, ताकि वह देश के दक्षिण पश्चिम राज्य इंडियाना में करीब एक हजार मरीजों का इलाज जारी रख पाएं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से लगी इस रोक के कारण उनका आवेदन अटका हुआ था। अगर अलघौला का आवेदन खारिज हो जाता है, तो उनका मौजूदा वीजा सितंबर में खत्म हो जाएगा।
हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने डॉक्टरों के वीजा और ग्रीन कार्ड मामलों की समीक्षा फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, जिससे अलघौला का मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि मंजूरी की कोई गारंटी नहीं है। डॉक्टर, संगठन और आव्रजन वकील महीनों से इस कदम की मांग कर रहे थे, क्योंकि देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने बताया कि बड़ी तादाद में विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टटर कम सुविधाओं वाले इलाकों में काम करते हैं।
अलघौला के लिए डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी चिंता है, जो फेफड़ों के विशेषज्ञ (पल्मोनोलॉजिस्ट) और आईसीयू डॉक्टर हैं और इंडियाना, इलिनॉय और केंटकी के कुछ ग्रामीण इलाकों में मरीजों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा, यहां पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों और श्वसन प्रणाली के विशेषज्ञ डॉक्टर) को मिलने के लिए चार से पांच महीने तक इंतजार करना पड़ता है।
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फिर भी आवेदकों और आव्रजन वकीलों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि इस छूट से कितना बड़ा बदलाव आएगा। इसका मतलब केवल इतना है कि डॉक्टरों के मामलों की फिर से जांच होगी। लेकिन यह गारंटी नहीं है कि उनके ग्रीन कार्ड या वीजा को मंजूरी मिल जाएगी। यह भी साफ नहीं है कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा समय पर इन आवेदनों को पूरा कर पाएगी या नहीं, ताकि अलघौला जैसे मामलों की समय-सीमा पूरी हो सके।
अलघौला ने कहा कि उन्हें इसको लेकर कोई भरोसा नहीं है कि प्रशासन उनका आवेदन मंजूर करेगा। उन्होंने कहा कि पहले भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग अपने दस्तावेजों के नवीनीकरण के लिए अपॉइंटमेंट पर गए और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा, मुझे अभी भी अपने इंटरव्यू में जाने से डर लग रहा है। उन्होंने बताया कि वह 2016 से अमेरिका में रह रहे हैं।
39 देशों पर अब भी सख्त रोक जारी
इस बीच, यह रोक अभी भी 39 देशों के हजारों लोगों पर लागू है, जिनमें ईरान, अफगानिस्तान और वेनेजुएला के शोधकर्ता और उद्यमी शामिल हैं। इस वजह से कई लोग न तो कानूनी रूप से काम कर पा रहे हैं, न स्वास्थ्य बीमा या ड्राइविंग लाइसेंस ले पा रहे हैं और अगर वे अमेरिका छोड़ते हैं तो वापस लौटने की अनुमति भी नहीं मिलती।
ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का असर
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल तय किया कि वह उन देशों के लोगों के ग्रीन कार्ड और वीजा आवेदनों की समीक्षा बंद करेगा, जिन्हें 'उच्च जोखिम' वाला माना गया था। इस साल उसने 75 से अधिक देशों के नागरिकों के वीजा आवेदनों की जांच भी रोक दी, क्योंकि आशंका थी कि वे सरकारी सहायता का लाभ ले सकते हैं। ये कदम अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान के बीच उठाए गए।
हिंसा की घटना के बाद सख्ती बढ़ी
यह रोक उस घटना के बाद लगी, जिसमें एक अफगान नागरिक ने नेशनल गार्ड के दो जवानों को गोली मार दी थी। प्रशासन ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि ठीक से जांच, स्क्रीनिंग और तेज निर्णय न होने का क्या असर हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग आव्रजन अधिकारियों की निगरानी करता है। विभाग ने इस रोक या डॉक्टरों को दी गई छूट पर सवालों का जवाब नहीं दिया। हालांकि, उसने ईमेल में कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आवेदकों की ठीक से जांच हो, क्योंकि पिछले सरकार ऐसा करने में विफल रही थी।
कई डॉक्टर और प्रवासी अब भी परेशान
मेम्फिस, टेनेसी के आव्रजन वकील ग्रेग सिस्किंड ने कहा, इस समय बहुत सारी पाबंदियां और रोक लगाई जा रही हैं। इसका मकसद उन लोगों का जीवन मुश्किल बनाना है जो कानूनी रूप से यहां हैं, ताकि वे दूसरे देशों का रुख करें। यह स्पष्ट नहीं है कि इस रोक से कितने डॉक्टर प्रभावित हुए हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस के एक प्रवक्ता ने बताया कि कई डॉक्टरों ने संगठन से मदद के लिए संपर्क किया है। कुछ डॉक्टरों के आवेदन पहले ही खारिज किए जा चुके हैं।
ये भी पढ़ें: 'प्रवासन पर भारत का दृष्टिकोण समग्र और व्यावहारिक', संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोले विदेश राज्य मंत्री
ईरानी डॉक्टर का मामला अदालत में अटका
छूट मिलने से पहले कई प्रवासियों ने सरकार के खिलाफ संघीय अदालतों में मुकदमे दायर किए थे, ताकि उनके मामलों पर फैसला आ जाए। इनमें ईरान की डॉक्टर जहरा शोकरी वर्नियाब भी थीं, जो तीन साल पहले अमेरिका आई थीं, ताकि रेडियोलॉजी में शोध कर सकें। वह रेजिडेंसी प्रोग्राम में शामिल होने के लिए ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रही थीं, लेकिन उनका आवेदन रोक के कारण अटक गया। उन्होंने अदालत में मुकदमा दायर कर अपने आवेदन पर जवाब मांगा, जिसके बाद एक संघीय न्यायाधीश ने आव्रजन अधिकारियों को उनका मामला देखने का आदेश दिया।
इसके बाद अधिकारियों ने उनका मामला देखा, लेकिन उसे खारिज कर दिया। 33 वर्षीय डॉक्टर का कहना है कि उन्हें लगता है यह उनके मुकदमे के जवाब में किया गया। उन्होंने कहा, मैं पूरी तरह से उलझन में हूं। अदालत में दिए गए दस्तावेजों में अमेरिकी सरकार के वकीलों ने लिखा कि उनके आवेदन में यह विसंगति थी कि वह व्यावहारिक डॉक्टर बनना चाहती हैं या शोधकर्ता। उन्होंने कहा कि वह दोनों करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यह छूट अब उन पर लागू नहीं होती, क्योंकि उनके मामले का फैसला हो चुका है, लेकिन वह अदालत से राहत मांग रही हैं।
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हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने डॉक्टरों के वीजा और ग्रीन कार्ड मामलों की समीक्षा फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, जिससे अलघौला का मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि मंजूरी की कोई गारंटी नहीं है। डॉक्टर, संगठन और आव्रजन वकील महीनों से इस कदम की मांग कर रहे थे, क्योंकि देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने बताया कि बड़ी तादाद में विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टटर कम सुविधाओं वाले इलाकों में काम करते हैं।
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अलघौला के लिए डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी चिंता है, जो फेफड़ों के विशेषज्ञ (पल्मोनोलॉजिस्ट) और आईसीयू डॉक्टर हैं और इंडियाना, इलिनॉय और केंटकी के कुछ ग्रामीण इलाकों में मरीजों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा, यहां पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों और श्वसन प्रणाली के विशेषज्ञ डॉक्टर) को मिलने के लिए चार से पांच महीने तक इंतजार करना पड़ता है।
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फिर भी आवेदकों और आव्रजन वकीलों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि इस छूट से कितना बड़ा बदलाव आएगा। इसका मतलब केवल इतना है कि डॉक्टरों के मामलों की फिर से जांच होगी। लेकिन यह गारंटी नहीं है कि उनके ग्रीन कार्ड या वीजा को मंजूरी मिल जाएगी। यह भी साफ नहीं है कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा समय पर इन आवेदनों को पूरा कर पाएगी या नहीं, ताकि अलघौला जैसे मामलों की समय-सीमा पूरी हो सके।
अलघौला ने कहा कि उन्हें इसको लेकर कोई भरोसा नहीं है कि प्रशासन उनका आवेदन मंजूर करेगा। उन्होंने कहा कि पहले भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग अपने दस्तावेजों के नवीनीकरण के लिए अपॉइंटमेंट पर गए और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा, मुझे अभी भी अपने इंटरव्यू में जाने से डर लग रहा है। उन्होंने बताया कि वह 2016 से अमेरिका में रह रहे हैं।
39 देशों पर अब भी सख्त रोक जारी
इस बीच, यह रोक अभी भी 39 देशों के हजारों लोगों पर लागू है, जिनमें ईरान, अफगानिस्तान और वेनेजुएला के शोधकर्ता और उद्यमी शामिल हैं। इस वजह से कई लोग न तो कानूनी रूप से काम कर पा रहे हैं, न स्वास्थ्य बीमा या ड्राइविंग लाइसेंस ले पा रहे हैं और अगर वे अमेरिका छोड़ते हैं तो वापस लौटने की अनुमति भी नहीं मिलती।
ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का असर
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल तय किया कि वह उन देशों के लोगों के ग्रीन कार्ड और वीजा आवेदनों की समीक्षा बंद करेगा, जिन्हें 'उच्च जोखिम' वाला माना गया था। इस साल उसने 75 से अधिक देशों के नागरिकों के वीजा आवेदनों की जांच भी रोक दी, क्योंकि आशंका थी कि वे सरकारी सहायता का लाभ ले सकते हैं। ये कदम अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान के बीच उठाए गए।
हिंसा की घटना के बाद सख्ती बढ़ी
यह रोक उस घटना के बाद लगी, जिसमें एक अफगान नागरिक ने नेशनल गार्ड के दो जवानों को गोली मार दी थी। प्रशासन ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि ठीक से जांच, स्क्रीनिंग और तेज निर्णय न होने का क्या असर हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग आव्रजन अधिकारियों की निगरानी करता है। विभाग ने इस रोक या डॉक्टरों को दी गई छूट पर सवालों का जवाब नहीं दिया। हालांकि, उसने ईमेल में कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आवेदकों की ठीक से जांच हो, क्योंकि पिछले सरकार ऐसा करने में विफल रही थी।
कई डॉक्टर और प्रवासी अब भी परेशान
मेम्फिस, टेनेसी के आव्रजन वकील ग्रेग सिस्किंड ने कहा, इस समय बहुत सारी पाबंदियां और रोक लगाई जा रही हैं। इसका मकसद उन लोगों का जीवन मुश्किल बनाना है जो कानूनी रूप से यहां हैं, ताकि वे दूसरे देशों का रुख करें। यह स्पष्ट नहीं है कि इस रोक से कितने डॉक्टर प्रभावित हुए हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस के एक प्रवक्ता ने बताया कि कई डॉक्टरों ने संगठन से मदद के लिए संपर्क किया है। कुछ डॉक्टरों के आवेदन पहले ही खारिज किए जा चुके हैं।
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ईरानी डॉक्टर का मामला अदालत में अटका
छूट मिलने से पहले कई प्रवासियों ने सरकार के खिलाफ संघीय अदालतों में मुकदमे दायर किए थे, ताकि उनके मामलों पर फैसला आ जाए। इनमें ईरान की डॉक्टर जहरा शोकरी वर्नियाब भी थीं, जो तीन साल पहले अमेरिका आई थीं, ताकि रेडियोलॉजी में शोध कर सकें। वह रेजिडेंसी प्रोग्राम में शामिल होने के लिए ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रही थीं, लेकिन उनका आवेदन रोक के कारण अटक गया। उन्होंने अदालत में मुकदमा दायर कर अपने आवेदन पर जवाब मांगा, जिसके बाद एक संघीय न्यायाधीश ने आव्रजन अधिकारियों को उनका मामला देखने का आदेश दिया।
इसके बाद अधिकारियों ने उनका मामला देखा, लेकिन उसे खारिज कर दिया। 33 वर्षीय डॉक्टर का कहना है कि उन्हें लगता है यह उनके मुकदमे के जवाब में किया गया। उन्होंने कहा, मैं पूरी तरह से उलझन में हूं। अदालत में दिए गए दस्तावेजों में अमेरिकी सरकार के वकीलों ने लिखा कि उनके आवेदन में यह विसंगति थी कि वह व्यावहारिक डॉक्टर बनना चाहती हैं या शोधकर्ता। उन्होंने कहा कि वह दोनों करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यह छूट अब उन पर लागू नहीं होती, क्योंकि उनके मामले का फैसला हो चुका है, लेकिन वह अदालत से राहत मांग रही हैं।
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