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ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें: ईरान युद्ध पर 47 अरब डॉलर खर्च, हर छह हफ्ते में 3.5 अरब बढ़ा बोझ; कब तक खिंचेगी जंग?

Thu, 29 Oct 2026 12:59 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 29 Oct 2026 12:59 AM IST
सार

ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च बढ़कर 47.1 अरब डॉलर हो गया है। हथियारों की भरपाई पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई है, जबकि सैनिकों के हताहत होने और सैन्य ठिकानों को नुकसान की चिंता भी बनी हुई है। क्या युद्ध का बढ़ता आर्थिक बोझ ट्रंप के लिए चुनावी चुनौती बनेगा? जानिए...

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US Iran War Cost Hits $47.1 Billion for US Taxpayers as Military Spending Rises Effect Midterm Election
ईरान युद्ध बना अमेरिका के लिए संकट - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

ईरान के साथ युद्ध का आर्थिक बोझ अमेरिकी करदाताओं पर लगातार बढ़ रहा है। पेंटागन के नए अनुमान के मुताबिक, युद्ध पर अमेरिका का खर्च बढ़कर 47.1 अरब डॉलर (करीब 47 अरब डॉलर से अधिक) हो गया है। सितंबर की शुरुआत में यह आंकड़ा लगभग 43.6 अरब डॉलर था। यानी करीब छह हफ्तों में खर्च में 3.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।

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एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 16 अक्तूबर तक के खर्च का यह अनुमान कांग्रेस को दिया है। अमेरिका और इस्राइल ने फरवरी के आखिर में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। युद्ध का बढ़ता खर्च और ऊर्जा की कीमतों पर इसका असर अब अमेरिकी राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है।

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हथियारों की भरपाई पर 29 अरब डॉलर खर्च

युद्ध के कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा हथियारों और गोला-बारूद की भरपाई का है। इस मद में करीब 29 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इनमें पैट्रियट और थाड जैसी रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें शामिल हैं। एक पैट्रियट इंटरसेप्टर की कीमत ही लाखों डॉलर होती है।

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पेंटागन के अनुमान के अनुसार, सैन्य अभियानों पर करीब 11.9 अरब डॉलर और उपकरणों के नुकसान से जुड़े खर्च पर छह अरब डॉलर खर्च हुए हैं। वायुसेना का खर्च 7.6 अरब डॉलर, जबकि थलसेना का खर्च दो अरब डॉलर से अधिक बताया गया है। नौसेना का खर्च 1.45 अरब डॉलर आंका गया है, जो सितंबर की शुरुआत में 2.2 अरब डॉलर बताया गया था। 

ट्रंप के सामने युद्ध जारी रखने की चुनौती

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले सैन्य अभियान कुछ हफ्तों तक चलने की बात कही थी, लेकिन अब युद्ध का खर्च बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा हमले की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। इस बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में एक और विमानवाहक पोत और हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी की है।

युद्ध की बढ़ती लागत और ऊर्जा की कीमतों पर असर अगले सप्ताह होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। इन चुनावों से तय होगा कि ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।

युद्ध खत्म करने की मांग तेज

एपी-एनओआरसी के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, ज्यादातर मतदाता चाहते हैं कि कांग्रेस युद्ध खत्म करने को प्राथमिकता दे। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता भी युद्ध रोकने के लिए कानून लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस में उनके प्रयास सफल नहीं हुए हैं।

सीनेट में अल्पमत के नेता चक शूमर ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को बिना योजना, अधिकार और युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति के इस संघर्ष में झोंक दिया गया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट युद्ध समाप्त करने और इससे पैदा हो रहे आर्थिक बोझ को रोकने की कोशिश जारी रखेंगे।

ट्रंप प्रशासन ने जहां 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड सैन्य बजट का प्रस्ताव रखा है, वहीं ईरान युद्ध और अन्य प्राथमिकताओं के लिए 95 अरब डॉलर के अतिरिक्त पैकेज को भी मंजूरी दिलाने की कोशिश की जा रही है।

युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत और घायल होने का आंकड़ा

पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष में 21 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हुई है और 865 घायल हुए हैं। हालांकि, मृतकों की कुल संख्या में कुछ ऐसी घटनाएं भी शामिल हैं, जिनका युद्ध से सीधा संबंध नहीं था। ईरानी हमलों, लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने और ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने के दौरान 18 सैन्यकर्मियों की मौत हुई है।

युद्ध के खर्च के इस अनुमान में मध्य पूर्व स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की लागत शामिल नहीं है। पेंटागन के महानिरीक्षक की पिछले महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों की सैकड़ों इमारतों और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा है।

अमेरिकी प्रशासन के सामने अब युद्ध की लागत, सैनिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की चुनौती है। ट्रंप ईरान के साथ समझौते और आगे सैन्य कार्रवाई, दोनों विकल्पों की बात कर चुके हैं। ऐसे में संघर्ष लंबा खिंचने पर अमेरिकी खजाने पर बोझ और बढ़ सकता है।

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