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West Asia Conflict: ईरान को अमेरिका की चेतावनी- हार नहीं मानी तो होगा और भीषण हमला, युद्धविराम पर तनातनी

Thu, 26 Mar 2026 12:01 AM IST
Shivam Garg वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shivam Garg Updated Thu, 26 Mar 2026 12:01 AM IST
सार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। व्हाइट हाउस ने कहा कि वार्ता जारी है, लेकिन ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि हार स्वीकार नहीं करने पर और कड़ा हमला किया जाएगा।

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US-Iran Tensions Escalate: White House Warns of Stronger Action as Ceasefire Talks Continue
कैरोलिन लेविट, प्रेस सचिव, व्हाइट हाउस - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहरा होता जा रहा है। जहां एक ओर युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और सैन्य दबाव तेज हो गया है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि वार्ता अभी डेड एंड पर नहीं पहुंची है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान अपनी सैन्य हार को स्वीकार नहीं करता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले से भी अधिक कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
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पाकिस्तान में संभावित बैठक पर बयान
लेविट ने कहा कि पाकिस्तान में ईरान से वार्ता को लेकर कई अटकलें हैं, लेकिन व्हाइट हाउस द्वारा आधिकारिक घोषणा के बिना किसी को भी इसे मान्य नहीं समझना चाहिए। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप धमकी नहीं देते, बल्कि कार्रवाई करते हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि पिछली गलत गणना ने उनकी वरिष्ठ नेतृत्व टीम, नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ तीन दिनों तक उपजाऊ बातचीत की, जिसके कारण कुछ हमलों को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया। ईरान के लिए यह एक और अवसर है कि वे अपने परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से छोड़ें और अमेरिका व उसके सहयोगियों को खतरा न बनें।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर फोकस
अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी सैन्य रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से तेल टैंकरों के गुजरने का निर्णय केवल राष्ट्रपति ट्रंप ही कर सकते हैं। फिलहाल इस बारे में कोई निश्चित समयसीमा नहीं है, लेकिन प्रशासन इस पर तेजी से काम कर रहा है। 

लेविट ने यह भी कहा कि ट्रंप ने यह दिखाया है कि वे मुक्त दुनिया के नेता और सबसे शक्तिशाली सेना के प्रमुख हैं। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों में यह साबित किया कि अमेरिका के सहयोगी उनके नेतृत्व में फैसलों का समर्थन करते हैं, जो अमेरिका और वैश्विक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता तय
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच लंबे समय से प्रस्तावित बैठक अब 14 और 15 मई को बीजिंग में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष का निष्कर्ष चर्चा का पूर्व शर्त नहीं था। केवल बैठक की तारीख को पुनर्निर्धारित किया गया।

साथ ही, आगे चलकर राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन की मेजबानी वॉशिंगटन डीसी में भी करेंगे। इस पारस्परिक दौरे की तारीखों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी। यह पहल दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर
प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने बताया कि अमेरिकी सेना द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अब तक बड़ी सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि तीन हफ्तों के भीतर 9,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है। उनके अनुसार, इस अभियान के बाद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में लगभग 90% की कमी आई है। साथ ही, अमेरिका ने ईरान की नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचाया है और 140 से अधिक नौसैनिक जहाजों को नष्ट किया गया है। 

ईरान की नौसेना के 140 से अधिक जहाज, जिनमें लगभग 50 माइन लेयर शामिल हैं, नष्ट किए गए। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी तीन-सप्ताह के अभियान में सबसे बड़ी नौसेना ध्वंस कार्रवाई है। अमेरिका ईरान की रक्षा औद्योगिक क्षमता को भी व्यवस्थित नष्ट कर रहा है, ताकि भविष्य में क्षेत्रीय खतरे को रोका जा सके। लेविट ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऊर्जा के मुक्त प्रवाह और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर पूरी तरह से केंद्रित है।
 
लेविट ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के प्रमुख सदस्य हैं और उन्होंने पूरे प्रशासनिक कार्यकाल में महत्वपूर्ण वार्ता में हिस्सा लिया है, जिनमें इस्राइल और गाजा के बीच युद्धविराम और बंधकों की रिहाई शामिल है।


घरेलू मुद्दों पर भी हमला
प्रेस सचिव ने इस दौरान अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सैंक्चुअरी सिटी नीतियों को लेकर डेमोक्रेटिक राज्यों की आलोचना करते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों को सुरक्षा देना अमेरिकी नागरिकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया आखिर कितने और अमेरिकियों की जान जाएगी, तब जाकर यह नीतियां खत्म होंगी?

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