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Explainer: अमेरिका-ईरान के बीच फिर कैसे बिगड़े हालात, अब कौन जिम्मेदार, संकट से निपटने की भारत की क्या तैयारी?
Thu, 09 Jul 2026 06:25 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 09 Jul 2026 06:25 AM IST
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अमेरिका-ईरान के बीच फिर भड़का संघर्ष।
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अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू होती दिख रही है। यह घटनाक्रम इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए जो समझौता हुआ था, वह अब खत्म हो चुका है। ट्रंप का यह बयान ईरान की तरफ से होर्मुज में तीन तेल-गैस के टैंकरों को निशाना बनाए जाने और इसके जवाब में अमेरिकी वायुसेना की तरफ से ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर हमले के बाद आया। ट्रंप ने इसके साथ ही एलान किया कि अमेरिकी सेना आज रात (बुधवार) को फिर से ईरान पर हमले करेगी।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस जंग पर 17 जून को ही रोक लगाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हो चुका था, वह एक महीना पूरा होने से पहले एक बार फिर क्यों भड़क उठी है? ईरान की किस हरकत पर भड़कते हुए ट्रंप ने समझौते का अंत करने की बात कही है? इसके बाद से होर्मुज और पश्चिम एशिया में क्या ताजा घटनाक्रम रहा है? भारत के लिए होर्मुज में एक बार फिर संघर्ष भड़कने के क्या मायने हैं? फिलहाल देश की तरफ से इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- पश्चिम एशिया में फिर क्यों भड़क उठी जंग?
पश्चिम एशिया में 17 जून के संघर्ष विराम से जुड़े समझौते के बाद फिर से युद्ध भड़कने की आशंका है। इसकी शुरुआत तब हुई, जब ईरान ने मंगलवार शाम को (भारतीय समयानुसार) होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ टैंकरों को निशाना बनाया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर रातोंरात कई हमले किए। चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान की तरफ से जहाजों-टैंकरों पर यह हमले ऐसे समय में किए गए, जब उसके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम जारी है और 9 जुलाई (गुरुवार) को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।मंगलवार शाम: वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमले
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंगलवार को ईरान ने ओमान के समुद्री क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया। इनमें कतर का एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर 'अल-रकियात' और सऊदी अरब का कच्चे तेल का टैंकर 'वेद्यान' शामिल था। ईरान का दावा था कि इन जहाजों ने उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और ईरानी अधिकारियों द्वारा स्वीकृत मार्ग के बजाय ओमान तट के करीब वाले ओमानी मार्ग का इस्तेमाल किया। ईरान अक्सर दुनिया के कुल कच्चे तेल के बड़े हिस्से के व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल अपने दबाव के रूप में करता है।
होर्मुज में जहाजों के गुजरने के लिए बने तीन रास्ते।
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अमर उजाला
मंगलवार रात: अमेरिका की जवाबी सैन्य कार्रवाई और कड़े प्रतिबंध
अमेरिका ने जहाजों पर हुए इन ईरानी हमलों को 17 जून के संघर्ष विराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन माना। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तटवर्ती इलाकों में 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की, जिनमें ईरानी वायु रक्षा प्रणालियां, रडार और रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की 60 से अधिक नौकाएं शामिल थीं। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में ईरानी सशस्त्र बलों के आठ सदस्य मारे गए। हमलों का निशाना दक्षिण-पश्चिमी बंदरगाह शहर बंदर माहशहर, बुशेहर प्रांत, सिरिक और खार्ग द्वीप जैसे इलाके बने। बंदर माहशहर में दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करते समय ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना का एक सदस्य भी मारा गया।
इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को दी गई वह छूट भी रद्द कर दी, जिसके तहत ईरान अपना तेल पूरी दुनिया को बेच सकता था, और ईरानी तेल बिक्री पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए।
अमेरिका ने जहाजों पर हुए इन ईरानी हमलों को 17 जून के संघर्ष विराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन माना। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तटवर्ती इलाकों में 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की, जिनमें ईरानी वायु रक्षा प्रणालियां, रडार और रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की 60 से अधिक नौकाएं शामिल थीं। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में ईरानी सशस्त्र बलों के आठ सदस्य मारे गए। हमलों का निशाना दक्षिण-पश्चिमी बंदरगाह शहर बंदर माहशहर, बुशेहर प्रांत, सिरिक और खार्ग द्वीप जैसे इलाके बने। बंदर माहशहर में दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करते समय ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना का एक सदस्य भी मारा गया।
इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को दी गई वह छूट भी रद्द कर दी, जिसके तहत ईरान अपना तेल पूरी दुनिया को बेच सकता था, और ईरानी तेल बिक्री पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए।
बुधवार सुबह: ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार
अमेरिकी हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया। ईरान के आईआरजीसी ने इसे अपने ऊपर हमला मानते हुए, जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत में स्थित 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। इनमें बहरीन का ईसा एयर बेस व सलमान पोर्ट, और कुवैत का अली अल सलेम एयर बेस शामिल थे। ईरान ने उल्टा अमेरिका पर ही युद्ध विराम की संधि तोड़ने का आरोप लगाया।
बुधवार दोपहर: समझौते की शर्तों पर असहमति और अन्य क्षेत्रीय विवाद
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि जब तक धमकियां और हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी अंतिम समझौते पर बातचीत नहीं हो सकती। उन्होंने समझौते के पैराग्राफ 13 का हवाला दिया, जिसमें सभी तरह की लड़ाई रोकने की शर्त थी, जिसमें लेबनान का संघर्ष भी शामिल है (जहां हाल ही में इस्राइल ने कई हमले किए हैं)।
ये भी पढ़ें: US-ईरान टकराव में आया नया मोड़?: ट्रंप बोले- मुझे मारने की साजिश रच सकता है तेहरान, मैं उनका नंबर एक निशाना
अमेरिकी हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया। ईरान के आईआरजीसी ने इसे अपने ऊपर हमला मानते हुए, जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत में स्थित 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। इनमें बहरीन का ईसा एयर बेस व सलमान पोर्ट, और कुवैत का अली अल सलेम एयर बेस शामिल थे। ईरान ने उल्टा अमेरिका पर ही युद्ध विराम की संधि तोड़ने का आरोप लगाया।
बुधवार दोपहर: समझौते की शर्तों पर असहमति और अन्य क्षेत्रीय विवाद
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि जब तक धमकियां और हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी अंतिम समझौते पर बातचीत नहीं हो सकती। उन्होंने समझौते के पैराग्राफ 13 का हवाला दिया, जिसमें सभी तरह की लड़ाई रोकने की शर्त थी, जिसमें लेबनान का संघर्ष भी शामिल है (जहां हाल ही में इस्राइल ने कई हमले किए हैं)।
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ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
- फोटो :
अमर उजाला ग्राफिक्स
बुधवार शाम: ट्रंप बोले- खत्म हो चुका है संघर्ष विराम
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चल रहा था और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के फिर से शुरू होने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इन हमलों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने संयम बरतने के बजाय जहाजों पर रॉकेट दागना चुना, इसलिए यह संघर्ष विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। ट्रंप ने ईरानी नेताओं को बीमार और नीच करार देते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चल रहा था और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के फिर से शुरू होने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इन हमलों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने संयम बरतने के बजाय जहाजों पर रॉकेट दागना चुना, इसलिए यह संघर्ष विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। ट्रंप ने ईरानी नेताओं को बीमार और नीच करार देते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।
होर्मुज-पश्चिम एशिया में क्या ताजा घटनाक्रम रहा है?
- कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने भी दोनों पक्षों से शांति की अपील की और जहाजों को होर्मुज के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी।
- आईएमओ के मुताबिक, मौजूदा समय में होर्मुज में करीब 6,000 नाविक फंसे हैं, जो भारी अनिश्चितता और तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
- होर्मुज से कम से कम चार तेल और गैस के टैंकर यू-टर्न ले चुके हैं। तीन टैंकर खाली थे और एलएनजी लोडिंग के लिए कतर जा रहे थे।
- भारत के झंडे वाला टैंकर लीला वाडिनार, जो कुवैत से 20 लाख बैरल तेल लेकर आ रहा था, वह ओमान की खाड़ी से यू-टर्न लेकर लौट गया।
- कुछ तेल टैंकर होर्मुज पार करने में सफल भी हुए हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात से तेल लेकर जा रहा एक बड़ा टैंकर शामिल है।
दुनिया में क्या हुआ इस संघर्ष के अचानक शुरू होने का असर?
अमेरिका और ईरान के बीच अचानक संघर्ष शुरू होने और युद्धविराम के टूटने का वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और सुरक्षा पर तत्काल और गहरा असर पड़ा है। अगर यह जंग आगे बढ़ती है तो इसका पूरी दुनिया पर एक बार फिर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।1. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा व्यापार मार्ग हैं। जैसे ही जहाजों पर हमले और समझौते के टूटने की खबर आई कच्चे तेल की कीमतों में अचानक छह फीसदी से ज्यादा की तेजी आ गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है और शिपिंग को भारी नुकसान पहुंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं।2. वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार
युद्ध भड़कने की आशंका से दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। भारत के शेयर बाजार पर इसका काफी बुरा असर दिखा। खासकर अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद सेंसेक्स 500-600 अंक तक नीचे चला गया। हालांकि, सबसे बुरा असर तब हुआ, जब ट्रंप की तरफ से संघर्ष विराम को खत्म घोषित कर दिया गया। इसके महज 30 मिनट के अंदर भारत का सेंसेक्स 1,000 अंक क्रैश हो गया। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,677 अंक (2.15%) और निफ्टी 516 अंक गिरकर बंद हुआ।
3. दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव
अमेरिका: अगर युद्ध जारी रहा और कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई तो अमेरिका में महंगाई फिर से बढ़ सकती है। इससे निपटने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रखना पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा।
यूरोप: खाड़ी क्षेत्र से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की शिपमेंट पर अगर असर पड़ता है तो पश्चिमी यूरोप में ऊर्जा की कमी पैदा हो सकती है और उन्हें फिर अन्य महंगे विकल्पों पर निर्भर होना पड़ेगा।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया: ये प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाएं खाड़ी के तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इस संकट से इन देशों का औद्योगिक उत्पादन बाधित हो सकता है, जिससे उनकी निर्माण लागत बढ़ेगी।
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होर्मुज जलडमरूमध्य
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Amar Ujala Digital
4. खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे पर खतरा
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों को जो राहत मिली थी, अब संघर्ष शुरू होने के बाद उस पर सीधा खतरा पैदा हो गया है। ईरान समर्थित गुटों की तरफ से इनके रणनीतिक ठिकानों, खासकर डिसैलिनेशन प्लांट (समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र) और लॉजिस्टिक्स हब पर हमले का खतरा है, जिससे वहां पीने के पानी और खाद्य आपूर्ति का गंभीर संकट आ सकता है।
अमेरिका-ईरान के ताजा संघर्ष में अब आगे क्या हो सकता है?
अमेरिका की बुनियादी ढांचे और खर्ग द्वीप पर कब्जे की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि भविष्य के हमलों में ईरान के अंदर तक घुसकर वार किए जाएंगे। ट्रंप ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग पर कब्जा करने की धमकी देते हुए कहा है कि ईरान उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। इसके अलावा, ट्रंप ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के अहम नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे बिजली संयंत्रों, पुलों और पानी साफ करने वाले संयंत्रों को नष्ट कर देगा।
ट्रंप ने इशारा किया है कि जल्द ही ईरान पर एक और बड़ा हमला हो सकता है और वह खर्ग द्वीप को दोबारा निशाना बना सकते हैं। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लगाने की चेतावनी दी है।
ईरान की चेतावनी- हमारी उंगली ट्रिगर पर
ईरान की चेतावनी- हमारी उंगली ट्रिगर पर
- खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले की धमकी के जवाब में ईरानी संसदीय समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सीधे चुनौती देते हुए कहा, "आइए, हम आपका इंतजार कर रहे हैं और हम वादा करते हैं कि एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं लौटेगा।"
- ईरान के पूर्व विदेश मंत्री अली अकबर वेलायती ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि क्षेत्र छोटे देशों के राजनीतिक जुए की जगह नहीं है और ईरान इस क्षेत्र को साफ करने के लिए ट्रिगर पर उंगली रखे हुए तैयार खड़ा है।
- ईरान ने अमेरिकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि धमकाने और जबरन वसूली का युग खत्म हो गया है...हम झुकने वाले नहीं हैं।
अमेरिका-ईरान की जुबानी जंग।
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अमर उजाला
फिर युद्ध होने के अब भारत के लिए क्या मायने, तैयारी कैसी?
अगर यह संघर्ष व्यापक रूप ले लेता है और होर्मुज का मार्ग बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का ऊर्जा आयात बिल एक बार फिर बढ़ेगा, हालांकि, इसकी रफ्तार कम रह सकती है। इसके चलते चालू खाता घाटा ज्यादा होगा और भारतीय रुपये की कीमत गिरेगी। हालांकि, अगर दोनों देशों के बीच टकराव सीमित रहता है, तो तेल की कीमतें 75 से 80 डॉलर के आसपास स्थिर रह सकती हैं। ऐसे में मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों, जैसे अच्छे जीएसटी कलेक्शन के बल पर भारत की आर्थिक वृद्धि दर स्थिर रह सकती है।संकट से निपटने के लिए भारत की क्या तैयारी?
- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापार के लिए मुख्य रूप से अब भी खाड़ी देशों पर निर्भर है, हालांकि बीते कुछ महीनों में भारत ने अमेरिका और रूस से तेल-गैस की खरीद को तेजी से बढ़ाया है और एलपीजी की जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भरता को कम करने में अहम सफलता हासिल की है।
- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार खाड़ी में फंसे कच्चे तेल और एलपीजी से लदे कम से कम नौ भारतीय टैंकरों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के साथ उच्च स्तरीय बातचीत कर रही है।
- इन जहाजों पर सवार 198 भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए ईरान से संपर्क किया गया है। भारत अपने नाविकों की सुरक्षा को लेकर खास तौर पर चिंतित है, क्योंकि जून में हुए अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं।
- भारत ने पहले ही इस तरह के संकटों की तैयारी करते हुए अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता हासिल की है और मौजूदा समय में भारत 40 से अधिक देशों से तेल खरीद रहा है। यह कूटनीतिक रणनीति आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के लिए एक बड़े 'बफर' का काम करेगी।