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ट्रंप की नई धमकी: कहा- ईरान बातचीत के कारण जिंदा; PAK में वार्ता से पहले 'दुनिया का सबसे ताकतवर रीसेट' भी लिखा
Fri, 10 Apr 2026 10:46 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, वाशिंगटन
एएनआई, वाशिंगटन
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 10 Apr 2026 10:46 PM IST
सार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता से पहले इसे 'दुनिया का सबसे शक्तिशाली रीसेट' करार दिया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी टीम इस्लामाबाद पहुंच रही है, जहां इस्राइल, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि एक ऐतिहासिक बैठक करेंगे।
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डोनाल्ड ट्रंप,अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में ईरान को चेतावनी दी है। जेडी वेंस के पाकिस्तान रवाना होने के बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर शांति वार्ता को 'दुनिया का सबसे शक्तिशाली रीसेट' बताया है।
इतना ही नहीं, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' यानी रास्ता शुल्क वसूलने के ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप बुरी तरह भड़क गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने इस तरह की कोई भी वसूली करने की कोशिश की, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।
'अगर आप आज जिदा हैं, तो सिर्फ बातचीत के लिए'
ट्रंप ने कहा कि ईरान की आज जो भी स्थिति है, वह अमेरिका के संयम की वजह से है। उन्होंने कहा कि आज जिंदा रहने का एकमात्र कारण यह है कि वे मेज पर बैठकर समझौता करें। दरअसल, ईरान ने हाल ही में एक 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है। इसमें एक शर्त यह भी शामिल है कि होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले जहाजों को फीस देनी होगी। ईरान चाहता है कि यह भुगतान उसकी अपनी मुद्रा 'रियाल' में किया जाए, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के असर को कम कर सके।
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दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' है। दुनिया का करीब 20% तेल यहीं से होकर गुजरता है। अगर ईरान यहां फीस वसूलना शुरू करता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि 8 अप्रैल 2026 को एक अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन शिपिंग कंपनियां अभी भी डरी हुई हैं।
विनाश के मुहाने से शांति की मेज तक
ट्रंप का यह 'रीसेट' केवल एक युद्धविराम नहीं है, बल्कि यह ईरान के साथ संबंधों को पूरी तरह से नए सिरे से शुरू करने की कोशिश है। ईरान के साथ सीजफायर होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका पहले ही अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
उन्होंने कहा था कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के आधार के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच पुराने विवादों के अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब इन दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी। ट्रंप ने कहा था कि अगर यह मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो शायद 'एक पूरी सभ्यता का नामोनिशान मिट जाता', लेकिन अब, पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति के चलते दोनों देश इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठने को तैयार हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान से बात या सख्त चेतावनी?: ट्रंप के संदेश के साथ पाकिस्तान रवाना हुए वेंस, कहा- चालबाजी मंजूर नहीं होगी
फिलहाल, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और एक उच्च स्तरीय दल पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। पाकिस्तान में पश्चिम एशिया में शांति को लेकर बैठक होने वाली है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या ईरान ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या खाड़ी में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता है। हालांकि, इस बीच जेडी वेंस ने चेतावनी भी दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आपूर्ति में कोई बाधा आई या ईरान ने कोई भी चालबाजी की, तो अमेरिका विनाशकारी बल का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएगा।
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इतना ही नहीं, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' यानी रास्ता शुल्क वसूलने के ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप बुरी तरह भड़क गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने इस तरह की कोई भी वसूली करने की कोशिश की, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।
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'अगर आप आज जिदा हैं, तो सिर्फ बातचीत के लिए'
ट्रंप ने कहा कि ईरान की आज जो भी स्थिति है, वह अमेरिका के संयम की वजह से है। उन्होंने कहा कि आज जिंदा रहने का एकमात्र कारण यह है कि वे मेज पर बैठकर समझौता करें। दरअसल, ईरान ने हाल ही में एक 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है। इसमें एक शर्त यह भी शामिल है कि होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले जहाजों को फीस देनी होगी। ईरान चाहता है कि यह भुगतान उसकी अपनी मुद्रा 'रियाल' में किया जाए, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के असर को कम कर सके।
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दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' है। दुनिया का करीब 20% तेल यहीं से होकर गुजरता है। अगर ईरान यहां फीस वसूलना शुरू करता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि 8 अप्रैल 2026 को एक अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन शिपिंग कंपनियां अभी भी डरी हुई हैं।
विनाश के मुहाने से शांति की मेज तक
ट्रंप का यह 'रीसेट' केवल एक युद्धविराम नहीं है, बल्कि यह ईरान के साथ संबंधों को पूरी तरह से नए सिरे से शुरू करने की कोशिश है। ईरान के साथ सीजफायर होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका पहले ही अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
उन्होंने कहा था कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के आधार के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच पुराने विवादों के अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब इन दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी। ट्रंप ने कहा था कि अगर यह मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो शायद 'एक पूरी सभ्यता का नामोनिशान मिट जाता', लेकिन अब, पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति के चलते दोनों देश इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठने को तैयार हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान से बात या सख्त चेतावनी?: ट्रंप के संदेश के साथ पाकिस्तान रवाना हुए वेंस, कहा- चालबाजी मंजूर नहीं होगी
फिलहाल, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और एक उच्च स्तरीय दल पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। पाकिस्तान में पश्चिम एशिया में शांति को लेकर बैठक होने वाली है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या ईरान ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या खाड़ी में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता है। हालांकि, इस बीच जेडी वेंस ने चेतावनी भी दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आपूर्ति में कोई बाधा आई या ईरान ने कोई भी चालबाजी की, तो अमेरिका विनाशकारी बल का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएगा।