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Iran-Israel Conflict: अमेरिका-इस्राइल छोड़िए, इस पत्रकार से डरा ईरान; तेहरान में उसके परिवार को बनाया बंधक
Sun, 22 Jun 2025 04:29 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 22 Jun 2025 04:29 PM IST
सार
Iran-Israel Conflict: ईरान-इस्राइल युद्ध कवरेज को लेकर ईरान ने लंदन स्थित फारसी चैनल ईरान इंटरनेशनल की एक पत्रकार के माता-पिता और भाई को अगवा कर लिया। पत्रकार से इस्तीफा दिलाने के लिए उसके पिता को धमकी भरा कॉल करवाया गया। चैनल ने इसे बंधक बनाकर दबाव बनाने की शर्मनाक रणनीति बताया।
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अयातुल्ला अली खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता
- फोटो : ANI
विस्तार
ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर दुनियाभर में चर्चाएं हैं, लेकिन इस बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लंदन स्थित फारसी न्यूज चैनल ईरान इंटरनेशनल की एक पत्रकार की रिपोर्टिंग से ईरान इतना बौखला गया कि उसने तेहरान में मौजूद उसके पूरे परिवार को अगवा कर लिया। चैनल का आरोप है कि ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने पत्रकार को चुप कराने के लिए उसके मां-पिता और छोटे भाई को बंधक बना लिया है।
ईरान इंटरनेशनल ने बताया कि शनिवार को ईरान की पैरामिलिट्री यूनिट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पत्रकार के माता-पिता और भाई को किसी अनजान स्थान पर ले जाया। अगवा करने के बाद पत्रकार को उसके पिता ने फोन किया और कहा मैंने तुमसे हजार बार कहा है इस्तीफा दे दो। अब और क्या अंजाम चाहती हो? फोन पर सुरक्षाबलों की आवाजें भी साफ सुनाई दे रही थीं, जो पत्रकार के पिता को लाइन से क्या बोलना है, ये निर्देश दे रहे थे।
पत्रकारिता पर हमला, लोकतंत्र पर प्रहार
चैनल ने इस कार्रवाई को घृणित और शर्मनाक बताया और कहा कि ये सीधा पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। ईरान इंटरनेशनल ने कहा कि ये एक तरह से बंधक बनाकर दबाव बनाने की रणनीति है, जिससे पत्रकार को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा सके। यह ईरानी शासन की आलोचना करने वाली स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने की कोशिश का हिस्सा है।
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ईरान की पुरानी रणनीति
यह कोई पहली बार नहीं है जब ईरान ने विदेशी पत्रकारों पर इस तरह का दबाव बनाया हो। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के मुताबिक, ईरान दुनिया के उन देशों में है जहां सबसे ज्यादा पत्रकार जेल में हैं। सरकार न सिर्फ देश के अंदर, बल्कि विदेशों में रहने वाले पत्रकारों को भी परेशान करती है, खासकर अगर उनके परिवार ईरान में रहते हैं।
ईरान इंटरनेशनल और बीबीसी पर्शिया जैसे फारसी भाषा के चैनल ईरानी सरकार की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं, क्योंकि ये चैनल स्थानीय भाषा में खबरें प्रसारित करते हैं और आम ईरानियों तक सच पहुंचाते हैं। चैनल का दावा है कि 2024 में उसके एक पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ था, और चैनल के कई कर्मचारियों को निशाना बनाने की साजिश का भी खुलासा हुआ था।
ईरान सरकार ने ईरान इंटरनेशनल को पहले ही ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया है। चैनल की रिपोर्टिंग, खासकर ईरान-इस्राइल युद्ध और शासन की आलोचना से जुड़ी खबरों को लेकर तेहरान लंबे समय से नाराज है। इंटरनेट पर पाबंदी के बीच ईरान के लोग इन्हीं चैनलों के जरिए बाहर की सच्चाई जान रहे हैं, जो ईरानी हुकूमत को मंजूर नहीं।
ये मामला न सिर्फ एक पत्रकार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि कैसे एक तानाशाही सरकार सच्चाई से डरकर स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करती है। ईरान इंटरनेशनल ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा, लेकिन ये मामला अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है।
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ईरान इंटरनेशनल ने बताया कि शनिवार को ईरान की पैरामिलिट्री यूनिट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पत्रकार के माता-पिता और भाई को किसी अनजान स्थान पर ले जाया। अगवा करने के बाद पत्रकार को उसके पिता ने फोन किया और कहा मैंने तुमसे हजार बार कहा है इस्तीफा दे दो। अब और क्या अंजाम चाहती हो? फोन पर सुरक्षाबलों की आवाजें भी साफ सुनाई दे रही थीं, जो पत्रकार के पिता को लाइन से क्या बोलना है, ये निर्देश दे रहे थे।
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पत्रकारिता पर हमला, लोकतंत्र पर प्रहार
चैनल ने इस कार्रवाई को घृणित और शर्मनाक बताया और कहा कि ये सीधा पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। ईरान इंटरनेशनल ने कहा कि ये एक तरह से बंधक बनाकर दबाव बनाने की रणनीति है, जिससे पत्रकार को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा सके। यह ईरानी शासन की आलोचना करने वाली स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने की कोशिश का हिस्सा है।
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ईरान की पुरानी रणनीति
यह कोई पहली बार नहीं है जब ईरान ने विदेशी पत्रकारों पर इस तरह का दबाव बनाया हो। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के मुताबिक, ईरान दुनिया के उन देशों में है जहां सबसे ज्यादा पत्रकार जेल में हैं। सरकार न सिर्फ देश के अंदर, बल्कि विदेशों में रहने वाले पत्रकारों को भी परेशान करती है, खासकर अगर उनके परिवार ईरान में रहते हैं।
ये भी पढ़ें: Iran: अमेरिका के हमले में ईरान के फोर्डो परमाणु केंद्र को हुआ भारी नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला
ईरान इंटरनेशनल पर लगातार हमलेईरान इंटरनेशनल और बीबीसी पर्शिया जैसे फारसी भाषा के चैनल ईरानी सरकार की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं, क्योंकि ये चैनल स्थानीय भाषा में खबरें प्रसारित करते हैं और आम ईरानियों तक सच पहुंचाते हैं। चैनल का दावा है कि 2024 में उसके एक पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ था, और चैनल के कई कर्मचारियों को निशाना बनाने की साजिश का भी खुलासा हुआ था।
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सरकार ने बताया था आतंकवादी संगठनईरान सरकार ने ईरान इंटरनेशनल को पहले ही ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया है। चैनल की रिपोर्टिंग, खासकर ईरान-इस्राइल युद्ध और शासन की आलोचना से जुड़ी खबरों को लेकर तेहरान लंबे समय से नाराज है। इंटरनेट पर पाबंदी के बीच ईरान के लोग इन्हीं चैनलों के जरिए बाहर की सच्चाई जान रहे हैं, जो ईरानी हुकूमत को मंजूर नहीं।
ये मामला न सिर्फ एक पत्रकार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि कैसे एक तानाशाही सरकार सच्चाई से डरकर स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करती है। ईरान इंटरनेशनल ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा, लेकिन ये मामला अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है।
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