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अमेरिका का फरमान: ईरानी विमानों की लैंडिंग और रीफ्यूलिंग पर सख्त पाबंदी, मदद करने वाले देशों पर भी गिरेगी गाज
Fri, 29 May 2026 02:24 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 29 May 2026 02:24 AM IST
सार
अमेरिका ने ईरान की सरकारी एयरलाइंस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाते हुए उसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, रीफ्यूलिंग और टिकट बिक्री पर रोक लगा दी है। हालांकि, मक्का-मदीना के तीर्थयात्रियों और मानवीय मदद को इससे अलग रखा गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार, इस भारी दबाव के कारण ही ईरान पहली बार अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के विषय पर बातचीत के लिए तैयार हुआ है।
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स्कॉट बेसेंट, अमेरिकी वित्त मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि सरकारी ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में कानून तोड़ने वाला घोषित कर दिया गया है। नए प्रतिबंधों के तहत अब ईरानी विमानों को न तो विदेशी जमीं पर उतरने की अनुमति मिलेगी, न ही उन्हें ईंधन दिया जाएगा। इसके साथ ही टिकटों की बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अमेरिका का मकसद इस आर्थिक घेराबंदी के जरिए ईरान को घुटनों पर लाना है।
पवित्र यात्रा और मानवीय मदद को मिली छूट
इस कड़े फैसले के बीच अमेरिका ने आम नागरिकों के लिए कुछ नरमी भी दिखाई है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के कहा कि यह पाबंदी धार्मिक और मानवीय आधार पर लागू नहीं होगी। मक्का और मदीना की पवित्र यात्रा यानी हज पर जाने वाले ईरानी जायरीनों को उड़ान भरने की अनुमति रहेगी। इसके अलावा जरूरी दवाओं और मानवीय सहायता से जुड़ी उड़ानों को भी इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि, व्यावसायिक और सरकारी उड़ानों पर यह नियम बेहद सख्ती से लागू होगा।
यह भी पढ़ें: होर्मुज में टोल टैक्स पर आर-पार: अमेरिका ने दी ओमान को बर्बाद करने की धमकी, जानें क्या है पूरा मामला
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मददगार देशों को भुगतना होगा अंजाम
अमेरिका ने ईरान की मदद करने वाले तीसरे देशों को भी खुली चेतावनी दी है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि जो भी देश या एजेंसी इन ईरानी विमानों को लैंडिंग की जगह देगा, ईंधन की आपूर्ति करेगा या टिकट बेचेगा, अमेरिका उस पर भी कड़े प्रतिबंध लगा देगा।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को मजबूर हुआ ईरान
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उनके इस आर्थिक दबाव का बड़ा असर दिखने लगा है। ट्रंप सरकार ने वह कर दिखाया है जो पहले कोई और सरकार नहीं कर सकी। वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा कि इतिहास में पहली बार ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की शर्तों पर बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। इससे पहले ईरान इस मुद्दे पर बात करने को भी तैयार नहीं था। अमेरिकी रणनीतिक और आर्थिक दबाव का यह सीधा और सकारात्मक परिणाम है।
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पवित्र यात्रा और मानवीय मदद को मिली छूट
इस कड़े फैसले के बीच अमेरिका ने आम नागरिकों के लिए कुछ नरमी भी दिखाई है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के कहा कि यह पाबंदी धार्मिक और मानवीय आधार पर लागू नहीं होगी। मक्का और मदीना की पवित्र यात्रा यानी हज पर जाने वाले ईरानी जायरीनों को उड़ान भरने की अनुमति रहेगी। इसके अलावा जरूरी दवाओं और मानवीय सहायता से जुड़ी उड़ानों को भी इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि, व्यावसायिक और सरकारी उड़ानों पर यह नियम बेहद सख्ती से लागू होगा।
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मददगार देशों को भुगतना होगा अंजाम
अमेरिका ने ईरान की मदद करने वाले तीसरे देशों को भी खुली चेतावनी दी है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि जो भी देश या एजेंसी इन ईरानी विमानों को लैंडिंग की जगह देगा, ईंधन की आपूर्ति करेगा या टिकट बेचेगा, अमेरिका उस पर भी कड़े प्रतिबंध लगा देगा।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को मजबूर हुआ ईरान
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उनके इस आर्थिक दबाव का बड़ा असर दिखने लगा है। ट्रंप सरकार ने वह कर दिखाया है जो पहले कोई और सरकार नहीं कर सकी। वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा कि इतिहास में पहली बार ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की शर्तों पर बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। इससे पहले ईरान इस मुद्दे पर बात करने को भी तैयार नहीं था। अमेरिकी रणनीतिक और आर्थिक दबाव का यह सीधा और सकारात्मक परिणाम है।