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US Funding Row: अमेरिका छोड़कर अब इस देश में रहेंगे नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी, जानें क्या है वजह
Sun, 12 Oct 2025 10:07 AM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 12 Oct 2025 10:07 AM IST
सार
इस साल का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार सोमवार को घोषित किया जाएगा। इस बीच अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो का स्विट्जरलैंड जाना अकादमिक जगत में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वे स्विट्जरलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख में नया केंद्र खोलेंगे। अमेरिका में रिसर्च पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी, एस्थर डुफ्लो
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिका में रिसर्च फंडिंग और विश्वविद्यालयों की आजादी पर हो रहे हमलों के बीच दो मशहूर अर्थशास्त्री, अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो, ने अमेरिका छोड़ने का फैसला किया है। दोनों अब स्विट्जरलैंड के यूनिर्वसिटी ऑफ ज्यूरिख में काम करेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी वैज्ञानिकों के दूसरे देशों में जाने को लेकर 'ब्रेन ड्रेन' की आशंका जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें - Pakistan: इमरान खान की पार्टी में पड़ी फूट, अपने ही सीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की थी तैयारी
जुलाई से नई भूमिका शुरू होगी
अब तक दोनों अर्थशास्त्री मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में पढ़ा रहे थे। विश्वविद्यालय ने बताया कि जुलाई 2026 से अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो उसकी अर्थशास्त्र संकाय में शामिल होंगे। दोनों को लेमन फाउंडेशन द्वारा फंड की गई 'एंडाउड प्रोफेसरशिप दी जाएगी।
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नया 'लेमन सेंटर' भी बनेगा
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो यूजेडएच में एक नया शोध केंद्र बनाएंगे, जिसका नाम लेमन विकास, शिक्षा और सार्वजनिक नीति केंद्र होगा। इसका मकसद विकास, शिक्षा और नीतियों से जुड़ा ऐसा शोध करना होगा, जिसका सीधा असर दुनिया भर की सरकारी नीतियों पर पड़े। यह केंद्र शोधकर्ताओं और शिक्षा नीति बनाने वाले संस्थानों को आपस में जोड़ने का भी काम करेगा।
अमेरिका से क्यों जा रहे हैं दोनों अर्थशास्त्री?
विश्वविद्यालय के बयान में उनके जाने की वजह साफ नहीं बताई गई। लेकिन हाल में अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा रिसर्च फंडिंग में कटौती और विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता पर हमले के चलते कई वैज्ञानिक और प्रोफेसर नाराज हैं। कई देशों ने इस माहौल का फायदा उठाकर अमेरिकी वैज्ञानिकों को अपने यहां आकर्षित करने की कोशिश शुरू कर दी है। खुद एस्थर डुफ्लो ने मार्च में फ्रांसीसी अखबार 'ले मोंडे' में एक संपादकीय पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अमेरिकी विज्ञान पर हो रहे बेहद खतरनाक हमलों' की आलोचना की गई थी।
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'काम को और आगे बढ़ाने का मौका'
डुफ्लो ने कहा, 'लेमन सेंटर की मदद से हम अपने उस काम को और मजबूत बना पाएंगे जो अकादमिक रिसर्च, छात्रों का मार्गदर्शन और असली नीतिगत बदलावों के बीच पुल बनाता है।' दोनों एमआईटी में पार्ट-टाइम भूमिकाएं भी जारी रखेंगे।
नोबेल विजेता हैं दोनों पति-पत्नी
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो को 2019 में आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार 2019 मिला था। उन्हें यह पुरस्कार माइकल क्रेमर के साथ 'गरीबी घटाने के लिए किए गए प्रयोगात्मक शोध' के लिए मिला था।
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जुलाई से नई भूमिका शुरू होगी
अब तक दोनों अर्थशास्त्री मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में पढ़ा रहे थे। विश्वविद्यालय ने बताया कि जुलाई 2026 से अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो उसकी अर्थशास्त्र संकाय में शामिल होंगे। दोनों को लेमन फाउंडेशन द्वारा फंड की गई 'एंडाउड प्रोफेसरशिप दी जाएगी।
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नया 'लेमन सेंटर' भी बनेगा
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो यूजेडएच में एक नया शोध केंद्र बनाएंगे, जिसका नाम लेमन विकास, शिक्षा और सार्वजनिक नीति केंद्र होगा। इसका मकसद विकास, शिक्षा और नीतियों से जुड़ा ऐसा शोध करना होगा, जिसका सीधा असर दुनिया भर की सरकारी नीतियों पर पड़े। यह केंद्र शोधकर्ताओं और शिक्षा नीति बनाने वाले संस्थानों को आपस में जोड़ने का भी काम करेगा।
अमेरिका से क्यों जा रहे हैं दोनों अर्थशास्त्री?
विश्वविद्यालय के बयान में उनके जाने की वजह साफ नहीं बताई गई। लेकिन हाल में अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा रिसर्च फंडिंग में कटौती और विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता पर हमले के चलते कई वैज्ञानिक और प्रोफेसर नाराज हैं। कई देशों ने इस माहौल का फायदा उठाकर अमेरिकी वैज्ञानिकों को अपने यहां आकर्षित करने की कोशिश शुरू कर दी है। खुद एस्थर डुफ्लो ने मार्च में फ्रांसीसी अखबार 'ले मोंडे' में एक संपादकीय पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें अमेरिकी विज्ञान पर हो रहे बेहद खतरनाक हमलों' की आलोचना की गई थी।
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'काम को और आगे बढ़ाने का मौका'
डुफ्लो ने कहा, 'लेमन सेंटर की मदद से हम अपने उस काम को और मजबूत बना पाएंगे जो अकादमिक रिसर्च, छात्रों का मार्गदर्शन और असली नीतिगत बदलावों के बीच पुल बनाता है।' दोनों एमआईटी में पार्ट-टाइम भूमिकाएं भी जारी रखेंगे।
नोबेल विजेता हैं दोनों पति-पत्नी
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो को 2019 में आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार 2019 मिला था। उन्हें यह पुरस्कार माइकल क्रेमर के साथ 'गरीबी घटाने के लिए किए गए प्रयोगात्मक शोध' के लिए मिला था।