{"_id":"6901b6864febbae5f90e1176","slug":"us-donald-trump-send-aircraft-carrier-to-south-america-venezuela-leave-west-asia-2025-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"US: क्या कुछ बड़ा करने वाले हैं ट्रंप? तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात युद्धपोत को दक्षिण अमेरिका भेजा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
US: क्या कुछ बड़ा करने वाले हैं ट्रंप? तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात युद्धपोत को दक्षिण अमेरिका भेजा
Wed, 29 Oct 2025 12:09 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:09 PM IST
सार
पश्चिम एशिया में विवाद को देखते हुए इलाके में अमेरिका के पांच युद्धपोत तैनात रहे हैं और इस साल और बीते साल भी दो युद्धपोत तैनात थे। अब यहां एक भी युद्धपोत का तैनात न होना चौंकाने वाला है।
विज्ञापन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : (Photo/ X@WhiteHouse)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश के सबसे आधुनिक युद्धपोत को दक्षिण अमेरिका के जलक्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया है। वेनेजुएला के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने यह आदेश दिया है। गौरतलब है कि जिस युद्धपोत को दक्षिण अमेरिका भेजा गया है, वह अभी तक पश्चिम एशिया के जलक्षेत्र में तैनात था और ऐसे समय में इस युद्धपोत को यहां से हटाया गया है, जब इस्राइल और हमास के बीच फिर से तनाव बढ़ रहा है। अब पश्चिम एशिया और यूरोप में अमेरिका का एक भी युद्धपोत तैनात नहीं है और यह बेहद असामान्य सी स्थिति है।
इस्राइल-हमास में तनाव के बीच भूमध्य सागर से हटाया गया युद्धपोत
संवेदनशील भूमध्य सागर इलाके में अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती न होना इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि जून में अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और साथ ही अमेरिका लाल सागर में भी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। ट्रंप ने दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र में युद्धपोत की तैनाती की वजह ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को बताया है। जबकि दक्षिण अमेरिकी जलक्षेत्र में अमेरिका के पहले से ही युद्धक जहाज, लड़ाकू विमान और सैनिक पहले से ही भारी संख्या में तैनात हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि शायद ट्रंप दक्षिण अमेरिका में कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे हैं।
ये भी पढ़ें- US-India: ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया शानदार दिखने वाला व्यक्ति-मजबूत आदमी; व्यापार समझौते पर भी दिए संकेत
विज्ञापन
सैन्य विशेषज्ञों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीति पर जताई हैरानी
युद्धपोत पर हजारों की संख्या में सैन्यकर्मी, दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं और इसे दुनिया में कहीं भी ले जा जा सकता है। युद्धपोत लंबे समय से अमेरिका की ताकत और इसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा रहे हैं। पश्चिम एशिया में विवाद को देखते हुए इलाके में अमेरिका के पांच युद्धपोत तैनात रहे हैं और इस साल और बीते साल भी दो युद्धपोत तैनात थे। अब यहां एक भी युद्धपोत का तैनात न होना चौंकाने वाला है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ सलाहकार और रिटायर्ड मरीन कर्नल मार्क कैंसियन ने युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की दक्षिण अमेरिका में तैनाती और भूमध्य सागर में एक भी युद्धपोत के तैनात न रहने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 11 युद्धपोतों में से अभी तीन ही विभिन्न जगहों पर तैनात हैं। दक्षिण चीन सागर में तैनात रहा अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस निमित्ज भी वापस पश्चिमी तट पर आ रहा है।
विज्ञापन
इस्राइल-हमास में तनाव के बीच भूमध्य सागर से हटाया गया युद्धपोत
संवेदनशील भूमध्य सागर इलाके में अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती न होना इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि जून में अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और साथ ही अमेरिका लाल सागर में भी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। ट्रंप ने दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र में युद्धपोत की तैनाती की वजह ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को बताया है। जबकि दक्षिण अमेरिकी जलक्षेत्र में अमेरिका के पहले से ही युद्धक जहाज, लड़ाकू विमान और सैनिक पहले से ही भारी संख्या में तैनात हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि शायद ट्रंप दक्षिण अमेरिका में कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे हैं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- US-India: ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया शानदार दिखने वाला व्यक्ति-मजबूत आदमी; व्यापार समझौते पर भी दिए संकेत
विज्ञापन
सैन्य विशेषज्ञों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीति पर जताई हैरानी
युद्धपोत पर हजारों की संख्या में सैन्यकर्मी, दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं और इसे दुनिया में कहीं भी ले जा जा सकता है। युद्धपोत लंबे समय से अमेरिका की ताकत और इसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा रहे हैं। पश्चिम एशिया में विवाद को देखते हुए इलाके में अमेरिका के पांच युद्धपोत तैनात रहे हैं और इस साल और बीते साल भी दो युद्धपोत तैनात थे। अब यहां एक भी युद्धपोत का तैनात न होना चौंकाने वाला है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ सलाहकार और रिटायर्ड मरीन कर्नल मार्क कैंसियन ने युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की दक्षिण अमेरिका में तैनाती और भूमध्य सागर में एक भी युद्धपोत के तैनात न रहने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 11 युद्धपोतों में से अभी तीन ही विभिन्न जगहों पर तैनात हैं। दक्षिण चीन सागर में तैनात रहा अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस निमित्ज भी वापस पश्चिमी तट पर आ रहा है।