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कनाडा में ट्रूडो का इस्तीफा, गाजा में युद्ध रुका: ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से अबतक, दुनिया में क्या बदला?
Mon, 20 Jan 2025 04:49 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 20 Jan 2025 04:49 PM IST
सार
ऐसे में यह जानना अहम है कि ट्रंप के नवंबर में चुनाव जीतने से लेकर 20 जनवरी को उनके शपथग्रहण तक, इस दौरान दुनिया में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं? इन बदलावों का अमेरिका और दुनिया के लिए क्या असर है? साथ ही इन बदलावों में ट्रंप की क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
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इस्राइल के बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के जस्टिन ट्रूडो।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शपथग्रहण कुछ घंटों में शुरू हो जाएगा। इस बीच पूरी दुनिया की निगाहें उनके अगले चार साल के कार्यकाल की योजनाओं पर रहेंगी। ट्रंप खुद शपथग्रहण के बाद संबोधन में अपनी योजनाओं का ब्योरा रखेंगे। दरअसल, जबसे डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए हैं, दुनिया में उथल-पुथल का माहौल है। खासकर वैश्विक मामलों में उनके रुख की अनिश्चितताओं को देखते हुए।
ट्रंप ने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ही कई वादे किए थे। फिर चाहे वह रूस-यूक्रेन संघर्ष को इसके अंत तक ले जाने का वादा हो या हमास को इस्राइल से संघर्ष न रोक पाने की स्थिति में तबाह करने की धमकी देने का दावा। उनकी ऐसी ही कुछ बातों के बाद दुनिया में बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव हुए हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि ट्रंप के नवंबर में चुनाव जीतने से लेकर 20 जनवरी को उनके शपथग्रहण तक, इस दौरान दुनिया में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं? इन बदलावों का अमेरिका और दुनिया के लिए क्या असर है? साथ ही इन बदलावों में ट्रंप की क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
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ट्रंप ने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ही कई वादे किए थे। फिर चाहे वह रूस-यूक्रेन संघर्ष को इसके अंत तक ले जाने का वादा हो या हमास को इस्राइल से संघर्ष न रोक पाने की स्थिति में तबाह करने की धमकी देने का दावा। उनकी ऐसी ही कुछ बातों के बाद दुनिया में बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव हुए हैं।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि ट्रंप के नवंबर में चुनाव जीतने से लेकर 20 जनवरी को उनके शपथग्रहण तक, इस दौरान दुनिया में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं? इन बदलावों का अमेरिका और दुनिया के लिए क्या असर है? साथ ही इन बदलावों में ट्रंप की क्या भूमिका रही? आइये जानते हैं...
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इस्राइल हमास समझौता
- फोटो : अमर उजाला
1. इस्राइल-हमास संघर्ष रुका, बंधकों की रिहाई शुरू
ट्रंप ने जिस वक्त राष्ट्रपति चुनाव जीता था, तब तक इस्राइल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के साथ-साथ गाजा में हमास को भी नेस्तनाबूत कर दिया था। हालांकि, उसे बंधकों को छुड़ाने में सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को चेतावनी दी थी कि अगर वह इस्राइली बंधकों को जल्द नहीं छोड़ता है तो उसे अंजाम भुगतने होंगे। इसके बाद खबरें आईं कि इस्राइल और हमास के बीच संघर्षविराम पर गंभीरता से विचार चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के शपथग्रहण से ठीक पहले इस्राइल और हमास के बीच 15 महीने से जारी युद्ध को रोकने पर सहमति बन गई। 19 जनवरी को युद्धबंदी के लिए प्रस्तावित समय से करीब तीन घंटे बाद संघर्षविराम लागू हो गया।
ट्रंप ने जिस वक्त राष्ट्रपति चुनाव जीता था, तब तक इस्राइल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के साथ-साथ गाजा में हमास को भी नेस्तनाबूत कर दिया था। हालांकि, उसे बंधकों को छुड़ाने में सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को चेतावनी दी थी कि अगर वह इस्राइली बंधकों को जल्द नहीं छोड़ता है तो उसे अंजाम भुगतने होंगे। इसके बाद खबरें आईं कि इस्राइल और हमास के बीच संघर्षविराम पर गंभीरता से विचार चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के शपथग्रहण से ठीक पहले इस्राइल और हमास के बीच 15 महीने से जारी युद्ध को रोकने पर सहमति बन गई। 19 जनवरी को युद्धबंदी के लिए प्रस्तावित समय से करीब तीन घंटे बाद संघर्षविराम लागू हो गया।
जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा के प्रधानमंंत्री पद से दिया इस्तीफा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
2. कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का इस्तीफा
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के साथ ही पड़ोसी कनाडा पर निशाना साधना शुरू कर दिया। उनके करीबी उद्योगपति एलन मस्क ने तो यहां तक कह दिया था कि जस्टिन ट्रूडो का अगले चुनाव में हारना तय है। इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर अवैध आव्रजन न रोक पाने का आरोप लगाते हुए उस पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद जब ट्रूडो ने अमेरिका में ट्रंप के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी, तब ट्रंप ने उनका मजाक उड़ाते हुए कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य घोषित करने के लिए कहा था।
कनाडा के खिलाफ ट्रंप की बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने कई और मौकों पर कनाडा को अमेरिका का हिस्सा घोषित करने से जुड़ा बयान दिया और ट्रूडो पर तंज कसा। ट्रंप ने ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर तक बुलाया। अमेरिका की व्यापार युद्ध शुरू करने की धमकी दी। इसे लेकर पीएम ट्रूडो को कनाडा की घरेलू राजनीति काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा। अंततः अपनी ही सरकार की मंत्री और नेताओं के विरोध के बीच ट्रूडो ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। हालांकि, वे अगले पीएम की नियुक्ति तक पद पर बने रहेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के साथ ही पड़ोसी कनाडा पर निशाना साधना शुरू कर दिया। उनके करीबी उद्योगपति एलन मस्क ने तो यहां तक कह दिया था कि जस्टिन ट्रूडो का अगले चुनाव में हारना तय है। इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर अवैध आव्रजन न रोक पाने का आरोप लगाते हुए उस पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद जब ट्रूडो ने अमेरिका में ट्रंप के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी, तब ट्रंप ने उनका मजाक उड़ाते हुए कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य घोषित करने के लिए कहा था।
कनाडा के खिलाफ ट्रंप की बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने कई और मौकों पर कनाडा को अमेरिका का हिस्सा घोषित करने से जुड़ा बयान दिया और ट्रूडो पर तंज कसा। ट्रंप ने ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर तक बुलाया। अमेरिका की व्यापार युद्ध शुरू करने की धमकी दी। इसे लेकर पीएम ट्रूडो को कनाडा की घरेलू राजनीति काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा। अंततः अपनी ही सरकार की मंत्री और नेताओं के विरोध के बीच ट्रूडो ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। हालांकि, वे अगले पीएम की नियुक्ति तक पद पर बने रहेंगे।
सीरिया से भागे बशर अल असद
- फोटो : अमर उजाला
3. सीरिया में असद सरकार का पतन
डोनाल्ड ट्रंप के चुने जाने के बाद पश्चिम एशिया में एक और बड़ा बदलाव देखा गया। दिसंबर में सीरिया में रूस समर्थित बशर अल-असद सरकार का पतन हो गया। यहां विद्रोहियों ने अलेप्पो इदलिब, होम्स और हमा समेत एक के बाद एक शहरों पर कब्जा किया और इसके बाद 12 दिन के अंदर राजधानी दमिश्क को अपने शासन में ले लिया। बशर अल-असद को देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। इस तरह सीरिया में 13 साल के बशर शासन का अंत हुआ और रूस को इस क्षेत्र में करारा झटका लगा।
डोनाल्ड ट्रंप के चुने जाने के बाद पश्चिम एशिया में एक और बड़ा बदलाव देखा गया। दिसंबर में सीरिया में रूस समर्थित बशर अल-असद सरकार का पतन हो गया। यहां विद्रोहियों ने अलेप्पो इदलिब, होम्स और हमा समेत एक के बाद एक शहरों पर कब्जा किया और इसके बाद 12 दिन के अंदर राजधानी दमिश्क को अपने शासन में ले लिया। बशर अल-असद को देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। इस तरह सीरिया में 13 साल के बशर शासन का अंत हुआ और रूस को इस क्षेत्र में करारा झटका लगा।
यूक्रेन-रूस जंग
- फोटो : ANI
4. रूस-यूक्रेन संघर्ष में तेजी
ट्रंप ने शपथ ग्रहण से पहले मेक अमेरिका ग्रेट अगेन रैली में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था- मैं यूक्रेन में युद्ध समाप्त कर दूंगा। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष को रोकने और तीसरे विश्व युद्ध को टालने की भी बात कही थी। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में खबरें थीं कि डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष रुकवाने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात भी की। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
इस बीच माना जा रहा है ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद वे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं। इसकी संभावना को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय- क्रेमलिन ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। खुद पुतिन भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि वे इस मुद्दे पर अमेरिका से चर्चा कर सकते हैं।
ट्रंप ने शपथ ग्रहण से पहले मेक अमेरिका ग्रेट अगेन रैली में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था- मैं यूक्रेन में युद्ध समाप्त कर दूंगा। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष को रोकने और तीसरे विश्व युद्ध को टालने की भी बात कही थी। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में खबरें थीं कि डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष रुकवाने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात भी की। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
इस बीच माना जा रहा है ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद वे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं। इसकी संभावना को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय- क्रेमलिन ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। खुद पुतिन भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि वे इस मुद्दे पर अमेरिका से चर्चा कर सकते हैं।
5. लेबनान के राष्ट्रपति चुनाव
इस्राइल और ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला के बीच लंबे समय से जारी जंग का केंद्र रहे लेबनान में डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद बड़ा बदलाव हुआ है। यूं तो ट्रंप के चुनाव जीतने से पहले ही इस्राइल से जंग में हिज्बुल्ला को बड़ा नुकसान हुआ और उसने लेबनान में अपनी बिगड़ती स्थिति के चलते युद्धविराम पर सहमति जता दी थी। लेकिन ट्रंप के आने के बाद यहां नई सरकार का गठन हुआ। 9 जनवरी 2025 को सेना प्रमुख जोसेफ आउन को लेबनान का राष्ट्रपति चुना गया, जो देश के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। जोसेफ आउन को अमेरिका का करीबी माना जाता है। उनके पेंटागन के अधिकारियों और अमेरिकी प्रशासन से अच्छे संबंध रहे हैं। ट्रंप के चुने जाने के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिका समर्थित एक नेता का आना क्षेत्र में पैठ बनाने में उसकी मदद करेगा।
इस्राइल और ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला के बीच लंबे समय से जारी जंग का केंद्र रहे लेबनान में डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद बड़ा बदलाव हुआ है। यूं तो ट्रंप के चुनाव जीतने से पहले ही इस्राइल से जंग में हिज्बुल्ला को बड़ा नुकसान हुआ और उसने लेबनान में अपनी बिगड़ती स्थिति के चलते युद्धविराम पर सहमति जता दी थी। लेकिन ट्रंप के आने के बाद यहां नई सरकार का गठन हुआ। 9 जनवरी 2025 को सेना प्रमुख जोसेफ आउन को लेबनान का राष्ट्रपति चुना गया, जो देश के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। जोसेफ आउन को अमेरिका का करीबी माना जाता है। उनके पेंटागन के अधिकारियों और अमेरिकी प्रशासन से अच्छे संबंध रहे हैं। ट्रंप के चुने जाने के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिका समर्थित एक नेता का आना क्षेत्र में पैठ बनाने में उसकी मदद करेगा।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (फाइल)
- फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
6. वेनेजुएला में सियासी उठापटक के बाद फिर राष्ट्रपति बने मादुरो
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने से पहले ही वेनेजुएला में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके थे। जहां देश के चुनाव आयोग ने इसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के जीतने की बात कही, वहीं विपक्षी दल के उम्मीदवार एडमुंडो गोंजालेज ने अपनी जीत का दावा किया। इस घटनाक्रम के बाद देश के शासन में संभावित बदलाव का संकेत मिला। अमेरिका समेत अन्य देशों ने भी वेनेजुएला के चुनाव नतीजों का मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, 10 जनवरी को विरोध के बावजूद निकोलस मादुरो ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। दूसरी तरफ विपक्षी नेता गोंजालेज ने स्पेन में शपथ ले ली।
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने से पहले ही वेनेजुएला में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके थे। जहां देश के चुनाव आयोग ने इसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के जीतने की बात कही, वहीं विपक्षी दल के उम्मीदवार एडमुंडो गोंजालेज ने अपनी जीत का दावा किया। इस घटनाक्रम के बाद देश के शासन में संभावित बदलाव का संकेत मिला। अमेरिका समेत अन्य देशों ने भी वेनेजुएला के चुनाव नतीजों का मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, 10 जनवरी को विरोध के बावजूद निकोलस मादुरो ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। दूसरी तरफ विपक्षी नेता गोंजालेज ने स्पेन में शपथ ले ली।
तिब्बत में भीषण भूकंप
- फोटो : एएनआई
7. ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दुनिया में दो भयानक आपदाएं
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अब तक दुनिया ने दो भयंकर प्राकृतिक आपदाएं देखीं। इनमें तिब्बत में भूंकप सबसे घातक रहा। 7 जनवरी 2025 को चीन के तिब्बत क्षेत्र में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें कम से कम 95 लोगों की जान गई और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ।
इसके अलावा अमेरिका में कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस के जंगलों में आग ने भारी तबाही मचाई। जनवरी 2025 की शुरुआत में, लॉस एंजिलिस में जंगलों की आग हॉलीवुड के पास तक पहुंच गई, जिसमें कई सेलिब्रिटीज के घर तक तबाह हो गए।
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अब तक दुनिया ने दो भयंकर प्राकृतिक आपदाएं देखीं। इनमें तिब्बत में भूंकप सबसे घातक रहा। 7 जनवरी 2025 को चीन के तिब्बत क्षेत्र में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें कम से कम 95 लोगों की जान गई और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ।
इसके अलावा अमेरिका में कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस के जंगलों में आग ने भारी तबाही मचाई। जनवरी 2025 की शुरुआत में, लॉस एंजिलिस में जंगलों की आग हॉलीवुड के पास तक पहुंच गई, जिसमें कई सेलिब्रिटीज के घर तक तबाह हो गए।