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नेपाल त्रासदी: सड़े अंग, बिलखते परिजन और 5000 लोग लापता; अब डीएनए टेस्ट ही क्यों बना अपनों का आखिरी सहारा?
Sat, 05 Sep 2026 07:22 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काठमांडो।
पीटीआई, काठमांडो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 05 Sep 2026 07:22 PM IST
सार
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शवों की पहचान चुनौती बनी हुई है। अब तक 2,272 डीएनए सैंपल जुटाए गए हैं और 1,030 शव दफनाए जा चुके हैं। सिर्फ 96 शव पहचान के बाद परिवारों को सौंपे गए हैं। करीब 5,000 लोगों के लापता होने के बीच डीएनए जांच परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में निश्चित जानकारी पाने की उम्मीद दे रही है। वहीं, पीड़ित भी अब लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।
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नेपाल में त्रासदी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को अपनों से दूर कर दिया। अब शवों की पहचान बड़ी चुनौती बन गई है। बाढ़ के पानी में बहकर आए शव कई जगह क्षत-विक्षत, सड़ चुके या अधूरे मिले हैं। ऐसे में चेहरा, कपड़े या सामान देखकर पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक पानी, कीचड़ और मलबे में रहने से शवों की पहचान वाली विशेषताएं भी खत्म हो सकती हैं। इसी वजह से डीएनए टेस्ट पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जा रहा है।
डीएनए टेस्ट से कितने शवों की पहचान हो पाई है?
अधिकारियों के मुताबिक, डीएनए सैंपल लेने और पहचान की दूसरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शव दफनाए जा चुके हैं। इनमें 222 महिलाएं, 355 पुरुष और 453 ऐसे शव हैं, जिनका लिंग तय नहीं किया जा सका। हालांकि अब तक सिर्फ 96 शवों की पहचान के बाद उन्हें परिवारों को सौंपा गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस के मुताबिक, डीएनए जांच में शव के नमूने की तुलना उसके करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने से की जाती है।
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राज कुमार के परिवार को डीएनए टेस्ट से क्या उम्मीद?
रासुवा जिले के स्याफ्रुबेसी में रहने वाले 33 वर्षीय राज कुमार, उनकी 30 वर्षीय पत्नी शृति और चार साल के बेटे सिराज का बाढ़ के बाद से पता नहीं है। परिवार ने नदी के किनारे चितवन और नवलपुर तक उनकी तलाश की। जिंदा मिलने की उम्मीद खत्म होने के बाद परिवार शव खोजने लगा। बाढ़ के पांच दिन बाद राज कुमार के भतीजे अविनाश को नवलपुर में एक इंसानी हाथ मिला। फोटो देखकर परिवार को लगा कि वह राज कुमार के हाथ जैसा है। मंगलवार को उस नमूने को काठमांडू की नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया। यह सैंपल जांच की कतार में 182वें नंबर पर है। दियाली ने कहा, 'हमने अब किसी और चीज की उम्मीद करना बंद कर दिया है। अगर वह हाथ मेरे भाई का भी निकला, तो कम से कम हमें पक्का पता चल जाएगा।'
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो में किया सफर: बच्चों से की बातचीत, एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में हुए शामिल
नेपाल में परिवारों के लिए डीएनए सैंपल देना आसान कैसे किया गया?
नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों की परेशानी कम करने के लिए नुवाकोट के बिदुर में डीएनए सैंपल कलेक्शन सेंटर खोला है। इससे परिवारों को सैंपल देने के लिए काठमांडू तक जाने की जरूरत नहीं होगी। पुलिस अस्पताल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल दामोदर पौडेल के मुताबिक, करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने शव से मिले डीएनए की तुलना में खास तौर पर उपयोगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि शवों की पहचान में आ रही दिक्कतों के बीच डीएनए टेस्ट अहम भूमिका निभाएगा।
परिवार लापता लोगों की जानकारी कहां देख सकते हैं?
नेपाल पुलिस ने 1,270 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है। परिवार इन विवरणों को देखकर पता कर सकते हैं कि उनके लापता रिश्तेदारों में से कोई बरामद हुआ है या नहीं। अधिकारियों के लिए शवों की पहचान जरूरी है, लेकिन परिवारों के लिए इसका मतलब इससे कहीं बड़ा है। पहचान होने पर उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिलेगा। राज कुमार के परिवार की तरह कई परिवार अब डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह जांच अपनों के बारे में सच जानने की आखिरी उम्मीद बन गई है।
कैसे मसीहा बने नेपाल बाढ़ के पीड़ित, दर्द भूल राहत कार्य में जुटे?
दूसरी ओर, इस भीषण त्रासदी के बीच, कई ऐसे पीड़ित सामने आए हैं जो अपने खुद के परिजनों को खोने या उनके लापता होने के बावजूद दूसरों की जान बचाने और मदद करने में दिन-रात जुटे हुए हैं। रसुवा के 31 वर्षीय सुदीप कुमार न्यौपाने ने इस आपदा में अपने छोटे भाई और दोस्त को खो दिया, लेकिन दो दिन के शोक के बाद वे बेघर हुए लोगों को खाना और राहत सामग्री बांटने के काम में लग गए। वहीं नुवाकोट के सुचित जोशी की पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा अभी भी लापता हैं। इसके बावजूद सुचित अपनी टीम बनाकर बाढ़ में फंसे बुजुर्गों और अन्य लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल और राहत शिविरों तक पहुंचा रहे हैं। अपनों को ढूंढने की तड़प के बीच पीड़ितों की यह निस्वार्थ सेवा हर किसी की आंखें नम कर रही है।
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- बाढ़ में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं करीब 5,000 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं।
- पुलिस ने अब तक 2,272 डीएनए सैंपल जुटाए हैं। इनमें 1,260 शवों से और 1,012 परिजनों से लिए गए हैं।
डीएनए टेस्ट से कितने शवों की पहचान हो पाई है?
अधिकारियों के मुताबिक, डीएनए सैंपल लेने और पहचान की दूसरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शव दफनाए जा चुके हैं। इनमें 222 महिलाएं, 355 पुरुष और 453 ऐसे शव हैं, जिनका लिंग तय नहीं किया जा सका। हालांकि अब तक सिर्फ 96 शवों की पहचान के बाद उन्हें परिवारों को सौंपा गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस के मुताबिक, डीएनए जांच में शव के नमूने की तुलना उसके करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने से की जाती है।
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- माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन के डीएनए सैंपल पहचान में ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं।
- उंगलियों के निशान और दांतों के रिकॉर्ड भी मदद कर सकते हैं, लेकिन यह शव की स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड पर निर्भर करता है।
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राज कुमार के परिवार को डीएनए टेस्ट से क्या उम्मीद?
रासुवा जिले के स्याफ्रुबेसी में रहने वाले 33 वर्षीय राज कुमार, उनकी 30 वर्षीय पत्नी शृति और चार साल के बेटे सिराज का बाढ़ के बाद से पता नहीं है। परिवार ने नदी के किनारे चितवन और नवलपुर तक उनकी तलाश की। जिंदा मिलने की उम्मीद खत्म होने के बाद परिवार शव खोजने लगा। बाढ़ के पांच दिन बाद राज कुमार के भतीजे अविनाश को नवलपुर में एक इंसानी हाथ मिला। फोटो देखकर परिवार को लगा कि वह राज कुमार के हाथ जैसा है। मंगलवार को उस नमूने को काठमांडू की नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया। यह सैंपल जांच की कतार में 182वें नंबर पर है। दियाली ने कहा, 'हमने अब किसी और चीज की उम्मीद करना बंद कर दिया है। अगर वह हाथ मेरे भाई का भी निकला, तो कम से कम हमें पक्का पता चल जाएगा।'
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो में किया सफर: बच्चों से की बातचीत, एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में हुए शामिल
नेपाल में परिवारों के लिए डीएनए सैंपल देना आसान कैसे किया गया?
नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों की परेशानी कम करने के लिए नुवाकोट के बिदुर में डीएनए सैंपल कलेक्शन सेंटर खोला है। इससे परिवारों को सैंपल देने के लिए काठमांडू तक जाने की जरूरत नहीं होगी। पुलिस अस्पताल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल दामोदर पौडेल के मुताबिक, करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने शव से मिले डीएनए की तुलना में खास तौर पर उपयोगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि शवों की पहचान में आ रही दिक्कतों के बीच डीएनए टेस्ट अहम भूमिका निभाएगा।
- बाढ़ के बाद मिले शवों में कई गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं। इसलिए सामान्य पहचान के तरीके हर मामले में काम नहीं कर रहे।
- डीएनए जांच में समय लगता है। शव और उसके रिश्तेदार, दोनों के जैविक नमूनों की तुलना करनी पड़ती है।
परिवार लापता लोगों की जानकारी कहां देख सकते हैं?
नेपाल पुलिस ने 1,270 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है। परिवार इन विवरणों को देखकर पता कर सकते हैं कि उनके लापता रिश्तेदारों में से कोई बरामद हुआ है या नहीं। अधिकारियों के लिए शवों की पहचान जरूरी है, लेकिन परिवारों के लिए इसका मतलब इससे कहीं बड़ा है। पहचान होने पर उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिलेगा। राज कुमार के परिवार की तरह कई परिवार अब डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह जांच अपनों के बारे में सच जानने की आखिरी उम्मीद बन गई है।
कैसे मसीहा बने नेपाल बाढ़ के पीड़ित, दर्द भूल राहत कार्य में जुटे?
दूसरी ओर, इस भीषण त्रासदी के बीच, कई ऐसे पीड़ित सामने आए हैं जो अपने खुद के परिजनों को खोने या उनके लापता होने के बावजूद दूसरों की जान बचाने और मदद करने में दिन-रात जुटे हुए हैं। रसुवा के 31 वर्षीय सुदीप कुमार न्यौपाने ने इस आपदा में अपने छोटे भाई और दोस्त को खो दिया, लेकिन दो दिन के शोक के बाद वे बेघर हुए लोगों को खाना और राहत सामग्री बांटने के काम में लग गए। वहीं नुवाकोट के सुचित जोशी की पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा अभी भी लापता हैं। इसके बावजूद सुचित अपनी टीम बनाकर बाढ़ में फंसे बुजुर्गों और अन्य लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल और राहत शिविरों तक पहुंचा रहे हैं। अपनों को ढूंढने की तड़प के बीच पीड़ितों की यह निस्वार्थ सेवा हर किसी की आंखें नम कर रही है।