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United States: अमेरिका से निकाले गए प्रवासियों का दूसरा दल कोस्टा रिका पहुंचा, एक भारतीय भी शामिल
Sat, 18 Apr 2026 07:29 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 18 Apr 2026 07:29 AM IST
सार
तीसरे देश में निर्वासन नीति के तहत अमेरिका ने 30 प्रवासियों के दूसरे दल कोस्टा रिका भेज दिया है। इसमें एक भारतीय भी शामिल है। इन प्रवासियों को या तो अपने देश लौटने या कोस्टा रिका में शरण लेने का विकल्प दिया गया है। यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है।
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अमेरिकी झंडा
- फोटो : Google Gemini
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विस्तार
कोस्टा रिका में शुक्रवार को प्रवासियों का दूसरा दल पहुंचा। अमेरिका ने इन लोगों को अपने देश से निकाल दिया है। इस दल में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। यह कदम अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह प्रवासियों को 'तीसरे देशों' में भेज रहा है।
कोस्टा रिका के राष्ट्रपति रोड्रिगो चावेस और अमेरिकी विशेष दूत क्रिस्टी नोएम ने मार्च में एक द्विपक्षीय समझौता किया था। इस समझौते के तहत कोस्टा रिका हर हफ्ते अमेरिका से निकाले गए 25 विदेशी नागरिकों को अपने यहां जगह देने के लिए तैयार हुआ है।
शुक्रवार को आए 30 लोगों के दल में अलग-अलग देशों के नागरिक हैं। इसमें 8 कोस्टा रिका के, 8 ब्राजील के, 3 रोमानिया के, 2 चीन के, 3 उज्बेकिस्तान के और 2 अजरबैजान के नागरिक हैं। इनके अलावा आयरलैंड, भारत, वियतनाम और बेलारूस का 1-1 नागरिक भी शामिल है। कोस्टा रिका की प्रवासन पुलिस और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) इन लोगों की मदद कर रहे हैं।
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इससे पहले शनिवार को 25 लोगों का पहला दल सैन जोस के हवाई अड्डे पर पहुंचा था। उस दल में अल्बानिया, केन्या, मोरक्को, चीन, भारत और कैमरून के लोग थे। साथ ही ग्वाटेमाला के 8 और होंडुरास के 4 नागरिक भी उसमें शामिल थे।
ये भी पढ़ें: 'अब परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा ईरान': तेहरान पर ट्रंप का बड़ा दावा, बताया होर्मुज पर कब खत्म होगी नाकाबंदी?
इन प्रवासियों के पास अब दो मुख्य विकल्प हैं। वे चाहें तो अपने देश वापस जाने के लिए 'सहायता प्राप्त स्वैच्छिक वापसी कार्यक्रम' का हिस्सा बन सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि वे कोस्टा रिका में कानूनी तौर पर रहने या मानवीय आधार पर शरण लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अभी इन लोगों को एक होटल में रखा गया है। कोस्टा रिका में शुरुआती सात दिनों के दौरान उन्हें अपना फैसला लेना होगा। अगर वे कोस्टा रिका छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें स्थानीय अधिकारियों को जानकारी देनी होगी। उन्हें यह भी बताना होगा कि वे जाने का खर्चा खुद उठाएंगे या उन्हें मानवीय मदद की जरूरत है।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दबाव में अफ्रीका और अमेरिका के कई देशों ने ऐसे समझौते किए हैं। इनमें दक्षिण सूडान, होंडुरास, रवांडा, गुयाना, डोमिनिका और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे देश शामिल हैं। कई बार प्रवासी ऐसे देशों में कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं जहां की भाषा वे नहीं जानते।
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कोस्टा रिका के राष्ट्रपति रोड्रिगो चावेस और अमेरिकी विशेष दूत क्रिस्टी नोएम ने मार्च में एक द्विपक्षीय समझौता किया था। इस समझौते के तहत कोस्टा रिका हर हफ्ते अमेरिका से निकाले गए 25 विदेशी नागरिकों को अपने यहां जगह देने के लिए तैयार हुआ है।
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शुक्रवार को आए 30 लोगों के दल में अलग-अलग देशों के नागरिक हैं। इसमें 8 कोस्टा रिका के, 8 ब्राजील के, 3 रोमानिया के, 2 चीन के, 3 उज्बेकिस्तान के और 2 अजरबैजान के नागरिक हैं। इनके अलावा आयरलैंड, भारत, वियतनाम और बेलारूस का 1-1 नागरिक भी शामिल है। कोस्टा रिका की प्रवासन पुलिस और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) इन लोगों की मदद कर रहे हैं।
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इससे पहले शनिवार को 25 लोगों का पहला दल सैन जोस के हवाई अड्डे पर पहुंचा था। उस दल में अल्बानिया, केन्या, मोरक्को, चीन, भारत और कैमरून के लोग थे। साथ ही ग्वाटेमाला के 8 और होंडुरास के 4 नागरिक भी उसमें शामिल थे।
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इन प्रवासियों के पास अब दो मुख्य विकल्प हैं। वे चाहें तो अपने देश वापस जाने के लिए 'सहायता प्राप्त स्वैच्छिक वापसी कार्यक्रम' का हिस्सा बन सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि वे कोस्टा रिका में कानूनी तौर पर रहने या मानवीय आधार पर शरण लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अभी इन लोगों को एक होटल में रखा गया है। कोस्टा रिका में शुरुआती सात दिनों के दौरान उन्हें अपना फैसला लेना होगा। अगर वे कोस्टा रिका छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें स्थानीय अधिकारियों को जानकारी देनी होगी। उन्हें यह भी बताना होगा कि वे जाने का खर्चा खुद उठाएंगे या उन्हें मानवीय मदद की जरूरत है।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दबाव में अफ्रीका और अमेरिका के कई देशों ने ऐसे समझौते किए हैं। इनमें दक्षिण सूडान, होंडुरास, रवांडा, गुयाना, डोमिनिका और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे देश शामिल हैं। कई बार प्रवासी ऐसे देशों में कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं जहां की भाषा वे नहीं जानते।
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