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नौसेना की खुफिया निगरानी के लिए हिंद महासागर के समुद्र में ड्रोन्स को तैनात कर रहा चीन : रिपोर्ट

Fri, 01 Jan 2021 03:24 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, न्यूजर्सी
एजेंसी, न्यूजर्सी Published by: देव कश्यप Updated Fri, 01 Jan 2021 03:24 AM IST
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US Defence Specialist Report China deploying drones in the Indian Ocean sea to monitor naval intelligence
हिन्द महासागर में भारतीय नौसेना (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

रक्षा मामलों के विश्लेषक एचआई सटन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने हिंद महासागर में सी विंग (हेयी) ग्लाइडर्स नाम से जाने जाने वाले अंडरवॉटर (जल के भीतर) ड्रोन्स का एक बेड़ा तैनात किया है। ये न सिर्फ महीनों तक काम कर सकते हैं बल्कि नौसेना की खुफिया मकसद के तहत निगरानी भी कर सकते हैं।

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फोर्ब्स मैगजीन के लिए लिखी गई अपनी रिपोर्ट में सटन ने कहा है कि चीन इन ग्लाइडर्स को बड़े स्तर पर तैनात कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये ग्लाइडर्स भूमिगत जल वाहन बेड़े (यूयूवी) का ही एक प्रकार हैं। इन्हें 2019, दिसंबर के मध्य में लॉन्च किया गया था और फिर फरवरी में वापस ले लिया गया था। इस अवधि में इन्होंने 3,400 से ज्यादा विश्लेषण किए।
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सटन ने लिखा, अगर इस बात पर भरोसा करें तो यह बहुत हैरानी की बात है कि चीन अब हिंद महासागर में बड़े स्तर पर ऐसे ड्रोन्स तैनात कर रहा है। चीन ने आर्कटिक में भी सी विंग तैनात किया है। सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए सटन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन के ये ग्लाइडर्स वैसे ही हैं, जैसे अमेरिकी नौसेना ने तैनात किए थे और चीन ने 2016 में इनमें से एक को रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने का हवाला देकर जब्त कर लिया था।
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लंबे मिशन पर काम करने में सक्षम
रक्षा विशेषज्ञ एचआई सटन ने बताया है कि पिछले साल दिसंबर में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कहा जा रहा था कि चीन ऐसे 14 ग्लाइडर्स हिंद महासागर में छोड़ेगा, लेकिन इनमें से सिर्फ 12 ही इस्तेमाल किए गए। उन्होंने बताया कि इसमें प्रॉपेलिंग के लिए कोई ईंधन प्रणाली नहीं है। ये बड़े विंग्स के सहारे समुद्र में नीचे ग्लाइड करते रहते हैं। ये बहुत तेज या फुर्तीले नहीं होते हैं, लेकिन ये लंबे मिशन पर काम कर सकते हैं।

खुफिया मकसद के लिए समुद्र विज्ञान डाटा का इस्तेमाल संभव
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंद महासागर में ये चीनी ग्लाइडर्स कथित रूप से समुद्र विज्ञान से जुड़ी जानकारी एकत्रित कर रहे हैं, जो अपने आप में कोई नुकसानदायी बात नहीं लगती। लेकिन समुद्र विज्ञान डाटा का इस्तेमाल नौसेना के खुफिया उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है और यह चीन के खतरनाक संकेत हैं।

जनरल रावत ने किया था हिंद-प्रशांत में चुनौतियों का जिक्र
इसी महीने हुए वैश्विक सुरक्षा संवाद सम्मेलन में भारत के चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि दुनिया हिंद महासागर क्षेत्र में अपना रणनीतिक आधार बनाने के लिए जारी दौड़ की साक्षी बन रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि आने वाले वक्त में यह रेस और ज्यादा बढ़ने वाली ही है।

 
चीन ने कहा, ताइवान में अमेरिका ने किया ‘शक्ति प्रदर्शन’
दुनिया के कई क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर अपनी ताकत की नुमाइश कर रहे चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने ताइवान जलडमरूमध्य में गुरुवार की सुबह अपने दो नौ सैन्य पोतों के जरिये ‘शक्ति का प्रदर्शन’ किया है। हालांकि अमेरिकी नौसेना ने कहा है कि विध्वंसक पोत एस मैककेन और कर्टिस विल्बर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ताइवान जलडमरूमध्य मार्ग का इस्तेमाल किया। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, पोत की आवाजाही खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को दिखाती है। जबकि चीनी रक्षा मंत्रालय ने घटनाक्रम को भड़काऊ कदम बताते हुए इसका विरोध किया।

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