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फ्रांस: भारतीय युवक पर गंभीर आरोप, नाबालिग लड़कियों को ब्लैकमेल कर कराता था यौन हरकतें; अदालत में ट्रायल शुरू
Tue, 06 Oct 2026 03:31 PM IST
शिवम गर्ग
पीटीआई, पेरिस
पीटीआई, पेरिस
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 06 Oct 2026 03:31 PM IST
सार
फ्रांस में 29 वर्षीय भारतीय युवक रोहन राणे पर नाबालिग लड़कियों के ऑनलाइन यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोपों में मुकदमा चल रहा है। मामले में करीब 100 पीड़ितों की पहचान हुई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
पेरिस में 29 वर्षीय भारतीय युवक रोहन राणे पर नाबालिग लड़कियों को कथित तौर पर ऑनलाइन जाल में फंसाने और उनका यौन शोषण करने के मामले में मुकदमा शुरू हो गया है। उस पर लड़कियों को यौन हरकतें करने और खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
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फ्रांस की राजधानी पेरिस में सोमवार से विशेष आपराधिक अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। यह सुनवाई बंद कमरे में हो रही है। फ्रांस 24 के मुताबिक, मुकदमा शुक्रवार तक चलने की उम्मीद है। दोषी पाए जाने पर राणे को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
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2021 में हुई थी गिरफ्तारी
राणे पढ़ाई के लिए फ्रांस आया था। उसने एंटिब्स के एक बिजनेस स्कूल में शिक्षा ली और बाद में फिटनेस कोच के तौर पर काम करने लगा। उसे 2021 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर नाबालिगों के खिलाफ यातना या बर्बरता के कृत्य, संगठित जबरन वसूली और बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के वितरण समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
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12 साल की लड़की से जुड़े मामले के बाद शुरू हुई जांच
मामले की जांच नवंबर 2020 में शुरू हुई थी। उस समय अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन ने 12 साल की एक लड़की से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री की सूचना दी थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, राणे Discord मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सक्रिय एक ऑनलाइन समूह सीवीएलटी से जुड़ा था। एक रिपोर्ट के अनुसार, समूह के सदस्यों पर नव-नाजी, नस्लवादी और यहूदी विरोधी विचारों को बढ़ावा देने और कमजोर किशोरियों को निशाना बनाने का आरोप है।
अश्लील तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप
आरोप है कि समूह के सदस्य ‘सेक्सटॉर्शन’ के जरिए नाबालिग लड़कियों से निजी तस्वीरें हासिल करते थे। इसके बाद तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था। जांच के अनुसार, कुछ पीड़ितों को कथित तौर पर यौन हरकतें करने या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए भी मजबूर किया गया।
कई देशों में करीब 100 पीड़ितों की पहचान
जांच में कई देशों से करीब 100 पीड़ितों की पहचान की गई है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया और नीदरलैंड्स शामिल हैं। फ्रांस 24 के मुताबिक, अमेरिका की पांच महिलाएं, जिनकी उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, मामले में सिविल पार्टी के तौर पर शामिल हुई हैं। उनके वीडियो लिंक के जरिए अदालत में गवाही देने की उम्मीद है।
गवाहों की सुरक्षा को लेकर बंद कमरे में सुनवाई
पेरिस की अदालत ने अमेरिकी अधिकारियों के अनुरोध के बाद सुनवाई बंद कमरे में कराने का फैसला किया। रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे पीड़ितों और गवाहों को कथित तौर पर डराने-धमकाने की चिंता बताई गई है। अमेरिकी अभियोजकों को भी कथित समूह की ओर से धमकियां दिए जाने की बात सामने आई है। मामले में अदालत शुक्रवार तक सुनवाई जारी रख सकती है।