US: पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर अमेरिका की दो टूक, कहा- आवाज उठाने से हम हिचकेंगे नहीं
अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं सांसद ब्रैड शर्म ने कहा, हम पाकिस्तान में हिंसा की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंतित हैं। हम देश में मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने से नहीं हिचकेंगे।
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पाकिस्तान इस समय देश के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलाउट पैकेज को जारी करने पर सहमत नहीं हुआ है। दूसरी ओर, दुनिया पाकिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर चिंता व्यक्त कर रही है। इसी कड़ी में अमेरिका के एक प्रभावशाली सांसद ने भी इस्लामी देश मानवाधिकार और लोकतंत्र के लगातार उल्लंघन चिंता जाहिर की है। सांसद ने शहबाज सरकार से देश में अभिव्यक्ति की आजादी और कानून के शासन को लागू करने को कहा है।
'मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने से हिचकेंगे नहीं'
अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं सांसद ब्रैड शर्म ने ट्वीट में कहा, हम पाकिस्तान हिंसा की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंतित हैं। कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद ने यह भी कहा कि वह मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने से नहीं हिचकेंगे। शर्मन ने एक वीडियो संदेश में कहा, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध 1940 के दशक की शुरुआत से हैं और वर्षों से दोनों देशों ने कई वैश्विक और क्षेत्री मुद्दों पर साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा, अमेरिका को दुनिया भर में और खासकर पाकिस्तान में लोकतंत्र और मानवाधिकारों का समर्थन करना चाहिए।
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'पाकिस्तान की आंतरिक संवैधानिक प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका नहीं'
इससे पहले उन्होंने ट्वीट किया कि उन्होंने पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बात की और कैलिफोर्निया में 40वें कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट में यंग किम के खिलाफ चुनाव लड़ रहे पाकिस्तानी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार आसिफ महमूद से मुलाकात की। उन्होंने कहा, पाकिस्तान की आंतरिक संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन हमें पाकिस्तान या कहीं भी मानवाधिकारों और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए। खान की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी नेता ने कहा, मुझे इमरान खान या किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करने कोई दिलचस्पी नहीं है और कई मुद्दों पर उनके साथ असहमति है।
कानून का शासन और स्थिर पाकिस्तान देखना चाहता है अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
26 साल से विदेश मामलों की समिति में जिम्मेदारियां निभा रहे शर्मन ने आगे कहा कि पाकिस्तान को अपने नागरिकों को खुद को अभिव्यक्त करने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति देनी चाहिए। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि हर कोई एक शांत, व्यवस्थित, लोकतांत्रिक और समृद्ध पाकिस्तान देखना चाहता है जहां पाकिस्तानियों को खुली और राजनीतिक बातचीत करने की स्वतंत्रता हो। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जिसके साथ देश लंबे समय से ऋण कार्यक्रम के लिए बातचीत कर रहा है, वह भी एक ऐसा स्थिर पाकिस्तान देखना चाहता है जो कानून के शासन का पालन करे।
सामाजिक सामंजस्य की संभावनाओं को खतरे में डाल रहे चरमपंथी
शर्मन ने इस बात का भी जिक्र किया कि पाकिस्तान कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते चरमपंथ, असहिष्णुता और असंतोष पाकिस्तान में सामाजिक सामंजस्य की संभावनाओं को खतरे में डाल रहे हैं। तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान) टीटीपी और सरकार के बीच पिछले साल नवंबर में संघर्ष विराम समझौता टूटने के बाद से आतंकवादियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों, प्रतिष्ठानों और यहां तक कि मस्जिदों और बाजारों पर हमले तेज किए हैं। हालांकि, कराची में पिछले कुछ समय से कोई बड़ी घटना नहीं हुई है।
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