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ट्रंप को भारी पड़ रही जंग: अमेरिका ने माना लापता 'MQ-4सी ट्राइटन' ड्रोन हुआ था क्रैश, अब तक 25 ड्रोन का नुकसान

Wed, 15 Apr 2026 08:26 PM IST
Rahul Kumar आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन Published by: Rahul Kumar Updated Wed, 15 Apr 2026 08:26 PM IST
सार

अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही जंग में पहली बार माना है कि उन्हें बड़ी तादात में अपने ड्रोन खोने पड़े हैं। 9 अप्रैल को फारस की खाड़ी में अमेरिका का 2000 करोड़ रुपये की कीमत का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन भी क्रैश हुआ था। 

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US Confirms Missing MQ-4C Triton Drone Crash During Hormuz Mission
अमेरिकी ड्रोन। - फोटो : आईएनएस

विस्तार

पिछले एक महीने से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब डोनाल्ड ट्रंप के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिका अभी तक इस युद्ध में सबसे उन्नत एफ-35 समेत कई विमान और ड्रोन को गंवा चुका है। अब अमेरिका ने माना है कि उसे हाल ही में बड़ी तादात में उन्नत ड्रोन खोने पड़े हैं। अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक पुष्टि की कि उसका लापता ड्रोन 'एमक्यू-4सी ट्राइटन' खाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया। यह पहली बार है जब अमेरिका ने अपने बड़े नुकसान को कबूला है। 

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होर्मुज में निगरानी कर रहा था ड्रोन
यह जानकारी यूनाइटेड स्टेट्स नेवल सेफ्टी कमांड की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। यह हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस (एचएलीई) निगरानी ड्रोन समुद्री इलाकों में जासूसी और दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई जा रही है। यह 24 घंटे तक हवा में रहने के लिए डिजाइन किया गया है। अमेरिकी नौसेना सुरक्षा कमांड की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा है-9 अप्रैल 2026 (स्थान गोपनीय-ऑपरेशनल सिक्योरिटी) एमक्यू-4सी क्रैश।
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दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग के नियमानुसार, 2.5 मिलियन डॉलर से अधिक नुकसान वाले हादसों को क्लास ए मिसहैप माना जाता है। ये भी इसी श्रेणी में बताया गया है यानी 2000 करोड़ रुपये के करीब होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि ड्रोन किसी के हमले का शिकार नहीं हुआ, बल्कि 9 अप्रैल को ये “क्रैश” हुआ था। मानवरहित ड्रोन होर्मुज में इंटरनेशनल एयरस्पेस में तीन घंटे के रूटीन मिशन पर निकला था।
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विमान अचानक ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग साइट्स से गायब हो गया
फारस की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरते समय जब विमान अचानक ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग साइट्स से गायब हो गया, ब्रॉडकास्ट इमरजेंसी कोड 7700 नजर आने लगा, जो आमतौर पर इन-फ्लाइट इमरजेंसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि उसे ईरानी हवाई सुरक्षा बलों ने मार गिराया था; हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। 'द वॉर जोन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरा और 10,000 फीट से भी नीचे पहुंचने के बाद उसका संपर्क टूट गया था।

नेवी ने ऑपरेशनल सुरक्षा कारणों से उसने दुर्घटना की सटीक जगह का खुलासा नहीं किया है। विमान में अमेरिका का कोई भी कर्मी सवार नहीं था, और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। ट्राइटन ड्रोन को नॉर्थरॉप ग्रुम्मन ने बनाया है। यह अमेरिकी नेवी के पावरबैंक का सबसे एडवांस मानवरहित एरियल सिस्टम है। इसे बेहद ऊंचाई पर उड़ने और लंबे वक्त के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। ग्रुम्मन की आधिकारिक साइट पर दावा किया गया है कि यह रक्षा के लिए सबसे उन्नत, ऊंची उड़ान भरने वाली और लंबे समय तक टिकने वाली क्षमता रखता है।

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25 ड्रोन का नुकसान
मामला यहीं खत्म नहीं होता। इसी अवधि में अमेरिका ने अपने 24 और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवाए हैं। इनकी कुल कीमत लगभग 6727 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस तरह कुल 25 ड्रोन के नुकसान ने अमेरिकी सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


ट्राइटन, एमक्यू-4 ग्लोबल हॉक का ही एक रूप है, और समुद्री निगरानी में विशेषज्ञता हासिल है। इस विमान की रेंज 13,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जो बड़े इलाके की लगातार निगरानी के लिए जरूरी है। ये खराब मौसम में भी काम करने की कुव्वत रखता है। इसके एयरफ्रेम को समुद्र के खराब मौसम का सामना करने के लिए काफी मजबूती से गढ़ा गया है, जिससे यह हर तरह के हालात में समुद्र के ऊपर अपनी जगह पर डटा रह सकता है।

हर विमान में एएन/जेडपीवाई-3 मल्टी-फंक्शन एक्टिव सेंसर रडार लगा होता है, जिसे 360 डिग्री समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है और विस्तृत इलाके में जहाजों को ट्रैक करने की खूबी से लैस है। ड्रोन को रीयल टाइम में डेटा दूसरे सैन्य जहाजों और विमानों तक भेजने में महारत हासिल है। इससे अमेरिकी सेना को समुद्री इलाकों में लगातार नजर रखने में मदद मिलती है; अन्य विमानों के मुकाबले इसकी लागत आधी होती है। यही वजह है कि विदेशी मीडिया इसे ट्रंप प्रशासन के लिए बहुत बड़ा झटका मान रही है। इस संघर्ष में ईरान तबाह कर देने का दावा ट्रंप बार-बार करते हैं लेकिन 25 ड्रोन का नुकसान भी अमेरिका के लिए बड़ा आघात है।

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