बांग्लादेश के प्रति क्यों बदल रहा है अमेरिका का नजरिया: क्या मानवाधिकारों के कथित हनन के आरोप हैं वजह
अमेरिका की इलिनोइस स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अली रियाज की राय में अमेरिकी कदमों का यह मतलब नहीं है कि बांग्लादेश के प्रति उसकी नीति पूरी तरह बदल गई हैं। लेकिन यह इस बात का संकेत है कि उसका धीरज जवाब दे रहा है। रियाज ने कहा- ‘लंबे समय तक अमेरिका बांग्लादेश को भारत के नजरिए से देखता था। लेकिन हालिया प्रतिबंध इस बात का संकेत है कि उसने बांग्लादेश को अपनी भारत नीति से अलग कर दिया है।’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने हाल में बांग्लादेश के प्रति जो नजरिया दिखाया है, उसे लेकर यहां कयासों का दौर जारी है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका के साथ बांग्लादेश के संबंध एतिहासिक और बहुआयामी रहे हैं। इसके बावजूद बाइडन प्रशासन के हाल के कदमों से यह संकेत मिला है कि बांग्लादेश के प्रति अमेरिका का नजरिया बदल रहा है।
पूर्व सेनाध्यक्ष अजीज अहमद का वीजा रद्द
ऐसा पहला संकेत तब मिला, जब अमेरिका ने राष्ट्रपति बाइडन की तरफ से आयोजित डेमोक्रेसी सम्मेलन में बांग्लादेश को आमंत्रित नहीं किया। अभी इसकी वजहों को समझने की कोशिश की ही जा रही थी कि बीते शुक्रवार को अमेरिका ने बांग्लादेश के प्रमुख अर्धसैनिक बल रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के सात पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए। उन पर ये प्रतिबंध मानवाधिकारों के कथित हनन के आरोप में लगाए गए हैं।
प्रतिबंध का मतलब यह है कि आरएबी अमेरिका में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकेगा। न ही वह किसी अमेरिकी संस्था से वित्तीय लेन-देन कर पाएगा। जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा है, वे अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इस बीच बांग्लादेश के मीडिया के एक हिस्से ने ये खबर दी है कि अमेरिका ने बांग्लादेश के पूर्व सेनाध्यक्ष अजीज अहमद का वीजा रद्द कर दिया है। इस साल फरवरी में टीवी चैनल अल-जरीरा की एक खबर में बताया गया था कि जनरल अहमद ने 1996 में अपने भाई को जेल से भगाने में मदद की थी। उनके भाई को हत्या के आरोप में सजा सुनाई गई थी।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के इस बदले नजरिए से बांग्लादेश को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका बांग्लादेशी निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। बांग्लादेश हर साल अमेरिका को लगभग सात अरब डॉलर का निर्यात करता है, जिनमें 90 फीसदी हिस्सा रेडीमेड कपड़ों का है। बांग्लादेश ने हाल के वर्षों में ऊंची आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है। उसमें अमेरिका को होने वाले निर्यात का बड़ा योगदान है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा अमेरिकी अनुदान बांग्लादेश को
इसके अलावा अमेरिका बांग्लादेश के सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस को प्रशिक्षण की सेवाएं भी देता रहा है। उधर दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा अमेरिकी अनुदान बांग्लादेश को मिलता है। इसीलिए हाल के अमेरिकी कदमों ने बांग्लादेश के लिए गहरी चिंता का कारण समझा गया है। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में रिसर्च फेलॉ मुबशार हसन ने टीवी चैनल अल-जजीरा से बातचीत में कहा कि बाइडन प्रशासन ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने कहा- ‘ये बदलाव सिर्फ बांग्लादेश के प्रति नहीं है। बल्कि यह आम बदलाव है। अब अमेरिका अपनी विदेशी नीति में चुनावी लोकतंत्र और मानवाधिकारों को केंद्रीय महत्त्व दे रहा है।’
अमेरिका की इलिनोइस स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अली रियाज की राय में अमेरिकी कदमों का यह मतलब नहीं है कि बांग्लादेश के प्रति उसकी नीति पूरी तरह बदल गई हैं। लेकिन यह इस बात का संकेत है कि उसका धीरज जवाब दे रहा है। रियाज ने कहा- ‘लंबे समय तक अमेरिका बांग्लादेश को भारत के नजरिए से देखता था। लेकिन हालिया प्रतिबंध इस बात का संकेत है कि उसने बांग्लादेश को अपनी भारत नीति से अलग कर दिया है।’