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US: सीडीसी ने डब्ल्यूएचओ के साथ काम करने से इनकार, मारबर्ग वायरस-एमपॉक्स और बर्ड फ्लू के प्रकोप के बीच चौंकाया
Tue, 28 Jan 2025 04:23 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 28 Jan 2025 04:23 AM IST
सार
एक तरफ अफ्रीका में मारबर्ग वायरस-एमपॉक्स का बढ़ता प्रकोप तो दूसरी ओर दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारी बर्ड फ्लू पर नजर बनाएं हुए है। इसी बीच अमेरिकी सीडीसी ने एक हैरान करने वाला निर्देश जारी करते हुए डब्ल्यूएचओ के साथ काम बंद करने या किसी भी प्रकार सहयोग पर रोक लगाने की बात कही है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : Ani/एक्स@WHO
विस्तार
देश-दुनिया में बढ़ते वायरस के संकट के बीच अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक हैरान करने वाला निर्देश जारी किया है। सीडीसी ने अपने कर्मचारियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ काम करने य़ा फिर किसी भी प्रकार के सहयोग को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि सीडीसी का यह आदेश एक ज्ञापन के माध्यम से दिया गया, जिसमें कहा गया कि डब्ल्यूएचओ के साथ जुड़ी सभी तकनीकी कार्य समूहों, सलाहकार बोर्डों और सहकारी समझौतों पर काम को रोक दिया जाए। इसके तहत सीडीसी के कर्मचारियों को डब्ल्यूएचओ के कार्यालयों में जाने की अनुमति भी नहीं होगी।
सीडीसी का हैरन करने वाला फैसला
देखा जाए तो सीडीसी का ये अचानक लिया हुआ फैसला हैरान करने वाला था क्योंकि इससे अफ्रीका में मारबर्ग वायरस और एमपॉक्स जैसी बीमारियों के प्रकोप की जांच और रोकथाम में रुकावट आएगी। साथ ही सीडीसी का ये फैसला ऐसे समय में हुआ जब दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारी बर्ड फ्लू के प्रकोप पर नजर रख रहे थे।
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ट्रंप ने पहले ही कर दी थी घोषणा
गौरतलब है कि सीडीसी का यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह अमेरिका को डब्ल्यूएचओ से अलग करने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, हालांकि इस आदेश का तत्काल प्रभाव नहीं हुआ। डब्ल्यूएचओ से अलग होने के लिए कांग्रेस की मंजूरी और अमेरिका के वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की जरूरत होगी, इसके साथ ही एक साल का नोटिस भी देना होगा।
सीडीसी के फैसले पर डॉ. जेफरी ने जताई चिंता
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डब्ल्यूएचओ के साथ काम कर रहे हैं डॉ. जेफरी क्लॉसनर ने सीडीसी के फैसले को एक बड़ी चिंता का विषय बताया है। उनका कहा है कि डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग और बैठकें रोकना एक बड़ी समस्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह अचानक हुआ निर्णय सभी को चौंका देने वाला था क्योंकि उम्मीद थी कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी न कि तुरंत।
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बता दें कि सीडीसी का यह आदेश एक ज्ञापन के माध्यम से दिया गया, जिसमें कहा गया कि डब्ल्यूएचओ के साथ जुड़ी सभी तकनीकी कार्य समूहों, सलाहकार बोर्डों और सहकारी समझौतों पर काम को रोक दिया जाए। इसके तहत सीडीसी के कर्मचारियों को डब्ल्यूएचओ के कार्यालयों में जाने की अनुमति भी नहीं होगी।
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सीडीसी का हैरन करने वाला फैसला
देखा जाए तो सीडीसी का ये अचानक लिया हुआ फैसला हैरान करने वाला था क्योंकि इससे अफ्रीका में मारबर्ग वायरस और एमपॉक्स जैसी बीमारियों के प्रकोप की जांच और रोकथाम में रुकावट आएगी। साथ ही सीडीसी का ये फैसला ऐसे समय में हुआ जब दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारी बर्ड फ्लू के प्रकोप पर नजर रख रहे थे।
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ट्रंप ने पहले ही कर दी थी घोषणा
गौरतलब है कि सीडीसी का यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह अमेरिका को डब्ल्यूएचओ से अलग करने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, हालांकि इस आदेश का तत्काल प्रभाव नहीं हुआ। डब्ल्यूएचओ से अलग होने के लिए कांग्रेस की मंजूरी और अमेरिका के वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की जरूरत होगी, इसके साथ ही एक साल का नोटिस भी देना होगा।
सीडीसी के फैसले पर डॉ. जेफरी ने जताई चिंता
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डब्ल्यूएचओ के साथ काम कर रहे हैं डॉ. जेफरी क्लॉसनर ने सीडीसी के फैसले को एक बड़ी चिंता का विषय बताया है। उनका कहा है कि डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग और बैठकें रोकना एक बड़ी समस्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह अचानक हुआ निर्णय सभी को चौंका देने वाला था क्योंकि उम्मीद थी कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी न कि तुरंत।
उन्होंने यह भी बताया कि डब्ल्यूएचओ और अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दो-तरफ़ा रास्ता है, यानी दोनों पक्ष एक-दूसरे की विशेषज्ञता से लाभ उठाते हैं। इस सहयोग से अमेरिका को नई जानकारी मिलती है, जैसे कि नए परीक्षण, उपचार और उभरते हुए स्वास्थ्य संकटों के बारे में, जो अमेरिका में लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।