तेल में लगेगी आग?: खर्ग पर हमले के बाद पलटवार के मूड में ईरान, UAE के तीन बंदरगाहों पर हमले की कर रहा तैयारी
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब खाड़ी देशों तक तनाव बढ़ाता दिख रहा है। अमेरिका के ईरान के खर्ग द्वीप स्थित तेल केंद्र पर हमले के बाद ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के तीन बड़े बंदरगाहों दुबई के जेबेल अली, अबू धाबी के खलीफा और फुजैराह के आसपास के इलाकों को खाली करने की चेतावनी दी है। आइए जानते हैं क्यों?
विस्तार
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के कुछ बड़े बंदरगाहों के पास धुआं उठता देखा गया, जिसके बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। इसी बीच ईरान ने यूएई के लोगों को दुबई, अबू धाबी और फुजैराह के बड़े बंदरगाहों के आसपास के इलाकों को तुरंत खाली करने की चेतावनी दी है। दरअसल, यह चेतावनी उस समय आई जब अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप स्थित तेल केंद्र पर हमला किया। खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है और यहां से देश के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है।
ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम ने लोगों से दुबई के जेबेल अली पोर्ट, अबू धाबी के खलीफा पोर्ट और फुजैराह पोर्ट के आसपास से दूर रहने को कहा। एजेंसी के अनुसार इन इलाकों में अमेरिकी सैन्य बल मौजूद हैं और इसलिए ये स्थान वैध सैन्य लक्ष्य बन सकते हैं।
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आईआरजीसी ने भी यूएई को दिया कड़ा संदेश
ईरान की इस चेतावनी के बाद उसकी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी यूएई के नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया। संगठन के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने कहा कि अगर यूएई के शहरों के अंदर अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया जाएगा, तो वहां के बंदरगाह और सैन्य सुविधाएं ईरान के निशाने पर हो सकती हैं।
इस बीच यूएई प्रशासन ने बताया कि एक ड्रोन को मार गिराया गया था और उसके मलबे के कारण आग लग गई। फुजैराह क्षेत्र में दिखाई दिया धुआं इसी घटना से जुड़ा माना जा रहा है। फुजैराह का इलाका तेल भंडारण और व्यापार का बड़ा केंद्र है और यहां महत्वपूर्ण निर्यात टर्मिनल भी स्थित है।
यूएई विदेश मंत्रालय ने हमलों की निंदा की
इस बीच यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी क्षेत्र में हो रहे हमलों की निंदा की है और कहा है कि जब तक हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी भी तरह की मध्यस्थता या शांति वार्ता संभव नहीं है। कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान टकराव के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और यह संकट अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।उधर अमेरिका ने भी पुष्टि की है कि उसके सैन्य अभियान में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 90 से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर हमले किए गए, जिनमें मिसाइल और नौसैनिक हथियारों के भंडार शामिल थे।
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ईरान के निशाने पर खाड़ी देश
गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कुवैत से लेकर ओमान तक कई तेल और गैस सुविधाओं पर हमले हुए हैं। इनमें सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी, कतर का रास लाफान गैस प्लांट और यूएई की रुवैस रिफाइनरी जैसी बड़ी ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही इस संघर्ष का असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है। लेकिन बढ़ते हमलों और सुरक्षा खतरे के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है।
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