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Red Sea: अमेरिकी सेना ने अपने ही लड़ाकू विमान को बनाया निशाना; हूती विद्रोहियों पर हमले के दौरान हुई गलती
Sun, 22 Dec 2024 06:12 PM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 22 Dec 2024 06:12 PM IST
सार
इस्राइल व हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यमन समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले सैन्य व वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। लाल सागर के जरिये परिवहन सेवा को सुचारू रखने तथा हूती विद्रोहियों से जहाजों की रक्षा करने के लिए अमेरिका व उसके गठबंधन सहयोगी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
अमेरिकी सेना ने रविवार को लाल सागर में अपने ही एक विमान को मार गिराया। विमान में सवार दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। एक पायलट को मामूली चोट आई है। अमेरिकी सेना से यह गलती उस समय हुई, जब वह हूती विद्रोहियों को निशाना बना रही थी।
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अमेरिकी केंद्रीय कमान की तरफ से जारी बयान के अनुसार, गाइडेड मिसाइल युद्धपोत यूएसएस गेटीसबर्ग ने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेस्ट पर गलती से गोलाबारी की और उसे मार गिराया। जिस समय एफ/ए-18 पर हमला हुआ, वह यूएसएस हैरी एस. ट्रूमैन से उड़ान भर रहा था। यूएसएस गेटीसबर्ग युद्धपोत भी यूएसएस हैरी एस. ट्रूमैन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का ही हिस्सा है। एफ/ए-18 विमान नेवल एयर स्टेशन ओसियाना (वर्जीनिया) के स्ट्राइक फाइटर स्क्वार्डन 11 के रेड रिपर जत्थे का हिस्सा था।
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कैसे हुई चूक... अभी इसका नहीं लगा पता
अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने यह नहीं बताया कि यह घटना किस मिशन के दौरान हुई। यह भी अभी साफ नहीं है कि युद्धपोत गेटीसबर्ग एफ/ए-18 विमान को दुश्मन का विमान या मिसाइल के रूप में पहचानने की गलती कैसे कर सकता है। खासकर तब, जब युद्ध समूह के जहाज एक-दूसरे के साथ रडार व रेडियो संचार के साथ जुड़े होते हैं।
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ट्रूमैन के आने के बाद बढ़े हूतियों पर अमेरिकी हमले
इस्राइल व हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यमन समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले सैन्य व वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। लाल सागर के जरिये परिवहन सेवा को सुचारू रखने तथा हूती विद्रोहियों से जहाजों की रक्षा करने के लिए अमेरिका व उसके गठबंधन सहयोगी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं। लाल सागर में ट्रूमैन के आने के बाद अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने 15 दिसंबर को बताया था कि ट्रूमैन पश्चिम एशिया में पहुंच चुका है। हालांकि, तब उसने यह साफ नहीं किया था कि ट्रूमैन लाल सागर में है।