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भारत को कॉरिडोर देने पर बांग्लादेश में बवाल: नाहिद इस्लाम बोले- ट्रांजिट नहीं देंगे, गंगा के पानी पर क्या कहा?

Sat, 31 Oct 2026 03:14 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 31 Oct 2026 03:14 PM IST
सार

बांग्लादेश में एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम ने भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने का विरोध किया और 12 दिसंबर को खत्म हो रही गंगा जल संधि में देश का उचित हिस्सा सुरक्षित रखने की मांग की है।

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Uproar in Bangladesh over granting corridor to India Nahid Islam says no transit will be provided Ganges water
नाहिद इस्लाम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बांग्लादेश में विपक्षी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने भारत को लेकर अपनी सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश की जमीन से भारत को किसी भी तरह का ट्रांजिट कॉरिडोर देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने गंगा जल बंटवारे को लेकर भी भारत के साथ निष्पक्ष समझौते की मांग की है। नाहिद ने चेतावनी दी कि अगर नए समझौते में बांग्लादेश के हिस्से के पानी की सुरक्षा नहीं हुई तो लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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सरकार के खिलाफ ढाका में रैली
शुक्रवार को ढाका में NCP की ओर से एक रैली आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों समर्थक शामिल हुए। रैली में मुख्य रूप से गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और बिजली, ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि दोनों मंत्री कानून-व्यवस्था संभालने और गैस-बिजली की किल्लत दूर करने में नाकाम रहे हैं। इसी दौरान नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
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जापान के दौरे से क्यों जुड़ा कॉरिडोर का मुद्दा?
नाहिद इस्लाम का आरोप है कि जापान एक बार फिर बांग्लादेश के रास्ते क्षेत्रीय कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहा है और सरकार इसे भारत को सौंपना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से साफ कहा कि बांग्लादेश की जनता ऐसा कोई कॉरिडोर स्वीकार नहीं करेगी। दरअसल, तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर तक जापान के दौरे पर थे। इस दौरान जापान और बांग्लादेश ने आपसी सहयोग बढ़ाने और बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने आर्थिक विकास, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही।
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मातारबाड़ी बंदरगाह पर जापान कर रहा मदद
जापान बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में मातारबाड़ी गहरे समुद्र के बंदरगाह को विकसित करने में आर्थिक मदद कर रहा है। जापान की एजेंसी JICA इस परियोजना को वित्तीय सहयोग दे रही है। जापान की क्षेत्रीय योजना में इस बंदरगाह के जरिए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की संभावनाएं भी शामिल रही हैं। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जापान दौरे के दौरान किसी तीसरे देश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। उनके मुताबिक, बातचीत का केंद्र केवल बांग्लादेश और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी थी।

भारत ने भी पूर्वोत्तर को लेकर दिया बयान
इसी बीच 28 अक्टूबर को भारत ने जापान के साथ अपने संबंध और मजबूत करने की बात कही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान के बीच कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनमें पूर्वोत्तर भारत की भूमिका अहम है। भारत इन संपर्क परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहता है। यह बयान ऐसे समय आया, जब बांग्लादेश और जापान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमत हुए थे।

12 दिसंबर को खत्म हो रही गंगा जल संधि
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में है। 12 दिसंबर 1996 को दोनों देशों के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ था, जो इस साल 12 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। इस संधि के तहत पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच कम पानी के मौसम में गंगा के जल का बंटवारा तय किया गया है। बांग्लादेश चाहता है कि नया समझौता पहले से ज्यादा लंबी अवधि का हो और उसमें ऐसी गारंटी हो, जिससे सूखे के मौसम में उसके हिस्से का पानी सुरक्षित रहे।


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नाहिद बोले- पानी के हक से समझौता नहीं
नाहिद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश इस बार गंगा जल समझौते में अपने जायज हिस्से से एक बूंद भी कम स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने साफ किया कि अगर समझौता बांग्लादेश के हितों के मुताबिक नहीं हुआ तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं, भारत का कहना है कि गंगा जल बंटवारे समेत साझा नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी आयोग (JRC) के माध्यम से बातचीत होती है। यह आयोग 1972 में बनाया गया था। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, गंगा जल संधि को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत भी जारी है।

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