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PoJK Protest: पाकिस्तान की जड़ें तक हिला सकता है पीओजेके का विद्रोह; खतरे में चीन का अरबों डॉलर का निवेश
Sat, 04 Oct 2025 06:22 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 04 Oct 2025 06:22 AM IST
सार
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में उठी आजादी की आवाज अब पाकिस्तान की संप्रभुता, कश्मीर नीति और चीन-पाक आर्थिक गलियारे पर गहरा संकट बन गई है। जानें कैसे यह विद्रोह पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए खतरा साबित हो सकता है।
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खतरे में चीन का अरबों डॉलर का निवेश
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) की सड़कों पर गूंज रही आजादी की हुंकार अब सिर्फ स्थानीय असंतोष का स्वर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की संप्रभुता, उसकी दशकों पुरानी कश्मीर नीति और चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) तीनों पर गहरा संकट बन चुकी है। दक्षिण एशिया पर नजर रखने वाले सामरिक विशेषज्ञों और वैश्विक थिंक-टैंकों का कहना है कि अगर यह विद्रोह और तेज हुआ तो पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता बिखर सकती है और बीजिंग का अरबों डॉलर का निवेश भी असुरक्षित हो जाएगा।
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वॉशिंगटन स्थित कार्नेगी एंडॉवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की ताजा रिपोर्ट में चेताया गया है कि पाकिस्तान के भीतर एक साथ कई विद्रोही मोर्चे खुलना राष्ट्र-राज्य की अवधारणा को कमजोर कर सकता है। इस विश्लेषण के अनुसार पीओके में उठ रही स्वतंत्रता की लहर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ते असंतोष से मिलकर पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती खड़ी कर रही है। यदि विरोध हिंसक हुआ तो पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर और आलोचना झेलनी पड़ेगी, जबकि इस्लामाबाद दशकों से खुद को कश्मीरियों का संरक्षक बताने की नाकाम कोशिश करता रहा है।
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चीन-पाक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) भी इस उभरते संकट से सीधे प्रभावित हो रहा है। सीपीईसी की कई अहम परियोजनाएं गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर के हिस्सों से होकर गुजरती हैं, जो स्थानीय विरोध की वजह से लटकी हुई हैं। यदि यहां आजादी का आंदोलन और व्यापक हो जाता है तो परियोजनाओं की सुरक्षा और निवेशकों का भरोसा दोनों डगमगा सकते हैं।
गहरे रणनीतिक संकट की ओर पाकिस्तान, बढ़ेगी आंतरिक असुरक्षा
अमेरिका और यूरोप में नीति-निर्माताओं का मानना है कि पीओके की गूंज पाकिस्तान को गहरे रणनीतिक संकट की ओर धकेल रही है, जिसका असर न सिर्फ इस्लामाबाद- बीजिंग रिश्तों पर पड़ेगा बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को भी हिला देगा। पीओके में पाकिस्तान को और अधिक सैन्य संसाधन केंद्रित करने पड़ेंगे, जिससे देश के अन्य संवेदनशील हिस्सों जैसे बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आंतरिक असुरक्षा बढ़ सकती है।
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कश्मीर पर दावे की साख पर गंभीर सवालिया निशान
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह पीओके की यह जबरदस्त बगावत पाकिस्तान की कश्मीर पर दावा करने की साख को ही खत्म नहीं कर रही, बल्कि सीपीईसी के भविष्य और चीन-पाक रिश्तों पर भी गहरा सवाल खड़ा कर रही है। अब पाकिस्तान की कश्मीर नीति पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अब दुनिया को खुलकर यह पता चल रहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर में दमन के दम पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। अगर पाकिस्तान ने इसका राजनीतिक हल नहीं निकाला तो यह अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक संकट साबित होगा।