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Ruchira Kamboj: संयुक्त राष्ट्र से सेवानिवृत्त हुईं रुचिरा कंबोज; 37 साल की शानदार विदेश सेवा के बाद हुई विदाई
Sat, 01 Jun 2024 08:34 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 01 Jun 2024 08:34 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला राजदूत रुचिरा कंबोज सेवानिवृत्त हो गईं। 37 साल की शानदार विदेश सेवा के बाद आज रिटायर हुईं कंबोज ने 1987 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में बतौर नौकरशाह करियर शुरू किया था।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
एक कामयाब राजनयिक के रूप में संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला राजदूत नियुक्त हुईं रुचिरा कंबोज आज सेवानिवृत्त हो गईं। साढ़े तीन दशक से अधिक लंबी विदेश सेवा के बाद रिटायर हुईं कंबोज संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि के रूप में मुखर वक्ता के रूप में जानी जाती हैं। बिजनेस की दुनिया में कामयाब शख्सियत दिवाकर कंबोज के साथ शादी करने वाली रुचिरा एक बेटी की मां हैं। रुचिरा ने संयुक्त राष्ट्र से राजदूत के रूप में रिटायरमेंट की घोषणा सोशल मीडिया पर की।
2022 में संयुक्त राष्ट्र में पदभार संभाला, रिटायरमेंट पर मिलीं शुभकामनाएं
60 वर्षीय वरिष्ठ राजनयिक रुचिरा कंबोज ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, असाधारण वर्षों और अविस्मरणीय अनुभवों के लिए भारत का धन्यवाद। 37 साल पहले साल 1987 में सिविल सेवा बैच की अखिल भारतीय महिला टॉपर और इसी साल विदेश सेवा बैच की टॉपर रहीं रुचिरा कंबोज ने 2 अगस्त, 2022 को भारत की स्थायी प्रतिनिधि/राजदूत का पदभार संभाला था। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करने को लेकर कई बार सुर्खियों में रहीं रुचिरा ने जब सेवानिवृत्ति का एलान किया तो सोशल मीडिया पर उन्हें ढेरों शुभकामनाएं मिलीं।
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सेवानिवृत्ति पर नेटिजन्स ने दी प्रतिक्रियाएं
अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवर और पूर्व राजदूतों से लेकर आम नागरिकों ने भी रुचिरा को भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। रिटायरमेंट वाली पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर रोहित बंसल ने भी कमेंट किया। उन्होंने कहा, 37 वर्षों की सेवा के दौरान शालीनता और दृढ़ता दिखाई। आपका प्रभाव हमेशा बना रहेगा।
संवेदनशील मुद्दों पर प्रभावी तरीके से भारत का पक्ष रखा
हिंदी, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा बोलने वाली कंबोज ने 1989 से 1991 तक फ्रांस में भारतीय दूतावास में तीसरे सचिव के रूप में काम किया। पेरिस में अपनी कूटनीतिक यात्रा शुरू करने वाली कंबोज ने कई देशों में नौकरशाह के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। कंबोज पहली बार 2002-2005 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर के रूप में पहुंचीं। कंबोज ने पूरे करियर में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार, पश्चिम एशिया / मध्य पूर्व संकट (West Asia Unrest) सहित कई संवेदनशील मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में मिला विशेष जिम्मा
भारतीय मिशन के मुताबिक कंबोज ने राष्ट्रमंडल सचिवालय लंदन में भी सेवाएं दी हैं। यहां उन्होंने महासचिव के कार्यालय के उप प्रमुख के रूप में काम किया। 2011-2014 तक कंबोज भारत की प्रोटोकॉल प्रमुख रहीं। इस पद को संभालने वाली पहली और एकमात्र महिला होने का गौरव भी कंबोज के पास है। यूनेस्को के पेरिस कार्यालय में भी तीन साल के शानदार कार्यकाल के दौरान उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हुईं। मई, 2014 में विदेश मंत्रालय ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया था। विशेष कार्य पर नई दिल्ली बुलाई गईं रुचिरा ने सार्क देशों और मॉरीशस के राष्ट्राध्यक्ष की उपस्थिति वाले कार्यक्रम का सफल निर्देशन किया।
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Thank you, Bharat 🇮🇳, for the extraordinary years and unforgettable experiences. pic.twitter.com/VbkKlW6wOg
— Ruchira Kamboj (@ruchirakamboj) June 1, 2024
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2022 में संयुक्त राष्ट्र में पदभार संभाला, रिटायरमेंट पर मिलीं शुभकामनाएं
60 वर्षीय वरिष्ठ राजनयिक रुचिरा कंबोज ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, असाधारण वर्षों और अविस्मरणीय अनुभवों के लिए भारत का धन्यवाद। 37 साल पहले साल 1987 में सिविल सेवा बैच की अखिल भारतीय महिला टॉपर और इसी साल विदेश सेवा बैच की टॉपर रहीं रुचिरा कंबोज ने 2 अगस्त, 2022 को भारत की स्थायी प्रतिनिधि/राजदूत का पदभार संभाला था। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करने को लेकर कई बार सुर्खियों में रहीं रुचिरा ने जब सेवानिवृत्ति का एलान किया तो सोशल मीडिया पर उन्हें ढेरों शुभकामनाएं मिलीं।
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सेवानिवृत्ति पर नेटिजन्स ने दी प्रतिक्रियाएं
अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवर और पूर्व राजदूतों से लेकर आम नागरिकों ने भी रुचिरा को भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। रिटायरमेंट वाली पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर रोहित बंसल ने भी कमेंट किया। उन्होंने कहा, 37 वर्षों की सेवा के दौरान शालीनता और दृढ़ता दिखाई। आपका प्रभाव हमेशा बना रहेगा।
संवेदनशील मुद्दों पर प्रभावी तरीके से भारत का पक्ष रखा
हिंदी, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा बोलने वाली कंबोज ने 1989 से 1991 तक फ्रांस में भारतीय दूतावास में तीसरे सचिव के रूप में काम किया। पेरिस में अपनी कूटनीतिक यात्रा शुरू करने वाली कंबोज ने कई देशों में नौकरशाह के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। कंबोज पहली बार 2002-2005 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर के रूप में पहुंचीं। कंबोज ने पूरे करियर में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार, पश्चिम एशिया / मध्य पूर्व संकट (West Asia Unrest) सहित कई संवेदनशील मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में मिला विशेष जिम्मा
भारतीय मिशन के मुताबिक कंबोज ने राष्ट्रमंडल सचिवालय लंदन में भी सेवाएं दी हैं। यहां उन्होंने महासचिव के कार्यालय के उप प्रमुख के रूप में काम किया। 2011-2014 तक कंबोज भारत की प्रोटोकॉल प्रमुख रहीं। इस पद को संभालने वाली पहली और एकमात्र महिला होने का गौरव भी कंबोज के पास है। यूनेस्को के पेरिस कार्यालय में भी तीन साल के शानदार कार्यकाल के दौरान उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हुईं। मई, 2014 में विदेश मंत्रालय ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया था। विशेष कार्य पर नई दिल्ली बुलाई गईं रुचिरा ने सार्क देशों और मॉरीशस के राष्ट्राध्यक्ष की उपस्थिति वाले कार्यक्रम का सफल निर्देशन किया।