क्या चीन होगा बेनकाब?: सवालों के बीच संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार उच्चायुक्त की शिनजियांग यात्रा शुरू
अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड कहा है- ‘बैशलेट की बहु-प्रतीक्षित यात्रा उस क्षेत्र में मानव अधिकारों के हनन का समाधान ढूंढने के लिहाज से एक निर्णायक अवसर है। लेकिन इस दौरान उन्हें सच छिपाने की चीनी अधिकारियों की कोशिश से लगातार संघर्ष भी करना होगा। संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस यात्रा का इस्तेमाल खुलेआम दुष्प्रचार को बढ़ावा देने के लिए ना किया जाए।’
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संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट की चीनी राज्य शिनजियांग की यात्रा सोमवार से शुरू हो गई है। अब पश्चिमी देशों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं कि बैशलेट को वहां बेरोक-टोक वे जहां चाहें, जाने की इजाजत दी जाती है या नहीं। पश्चिमी मानव अधिकार संगठनों ने कहा है कि अगर उन्हें बेरोक आने-जाने का मौका नहीं मिला, तो उनकी यात्रा के निष्कर्ष संदिग्ध हो जाएंगे।
चीन कर सकता है इनकार!
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक कुछ पश्चिमी नेताओं ने यात्रा शुरू करने के पहले बैशलेट को पत्र लिख कर उन्हें आगाह किया था। पत्र में चेतावनी दी गई कि बैशलेट की यात्रा से शिनजियांग में मानव अधिकार के कथित हनन को लेकर जो धारणा दुनिया में बनी है, उसे स्थायी रूप से नुकसान पहुंच सकता है। पत्र के मुताबिक ऐसा उस हाल में होगा, अगर स्वतंत्रता से घूमने-फिरने का अवसर मिले बिना बैशलेट ने चीन को क्लीन चिट दे दी।
यह पत्र इंटर-पार्लियामेंटरी एलायंस ऑन चाइना नाम के संगठन की तरफ से लिखा गया। इस संगठन में दुनिया भर के सांसद शामिल हैं। इसे आमतौर पर चीन विरोधी गुट के रूप में देखा जाता है। पत्र में आशंका जताई गई है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू प्रतिबंधों का बहाना बना कर चीन बैशलेट को आजादी से घूमने-फिरने की इजाजत देने से मना कर सकता है।
इस पत्र पर चीन समर्थक खेमों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई। उन्होंने इसे पहले से ही बैशलेट की यात्रा के निष्कर्षों को प्रभावित करने की कोशिश करार दिया। चीन में सोशल मीडिया पर कहा गया कि पश्चिमी देशों इस बात से डरे हुए हैं कि बैशलेट की यात्रा से जो सच सामने आएगा, वह उनके अब तक किए गए प्रचार के अनुरूप नहीं होगा।
छह दिन शिनजियांग में रहेंगी बैशलेट
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के मुताबिक चीनी अधिकारियों ने बैशलेट की यात्रा का पूरा कार्यक्रम जारी नहीं किया है। सिर्फ यह बताया गया है कि बैशलेट छह दिन शिनजियांग में रहेंगी। इसके पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग ने एक बयान में कहा था कि बैशलेट शिनजियांग जाने के पहले चीन के दक्षिणी शहर ग्वांगझाऊ में यूनिवर्सिटी छात्रों को संबोधित करेंगी। उच्चायोग ने कहा- ‘इस यात्रा का मकसद चीनी अधिकारियों के साथ उनके घरेलू, क्षेत्रीय, और वैश्विक मानव अधिकार मुद्दों पर संवाद करना है।’
अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड कहा है- ‘बैशलेट की बहु-प्रतीक्षित यात्रा उस क्षेत्र में मानव अधिकारों के हनन का समाधान ढूंढने के लिहाज से एक निर्णायक अवसर है। लेकिन इस दौरान उन्हें सच छिपाने की चीनी अधिकारियों की कोशिश से लगातार संघर्ष भी करना होगा। संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस यात्रा का इस्तेमाल खुलेआम दुष्प्रचार को बढ़ावा देने के लिए ना किया जाए।’
इस यात्रा के लिए बैशलेट का कार्यालय 2018 से चीन से बातचीत कर रहा था। तभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों के दमन की कहानियों के चर्चित होने की शुरुआत हुई थी। पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीनी दमन के कारण बहुत से उइघुर मुसलमान लापता हो गए हैं। बड़ी संख्या में उन्हें जेल में भी डाला गया है। चीन इऩ आरोपों का खंडन करता रहा है। इन आरोपों पर संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। लेकिन उसे अभी तक जारी नहीं किया गया है।